Wed. Jun 10th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

शून्य से शिखर तक के यात्री राजेश्वर नेपाली : लक्षमण नेवटिया

Rajeshwar Nepali
 

बिराटनगर । जो समाज में अपरिचित होता उसे समाज को परिचित कराना होता है परंतु राजेश्वर नेपाली एक ऐसा नाम है जो किसी परिचयका मोहताज नहीं है।
मै राजेश्वर नेपाली को अपनी तरुणावस्था से जानता हूं उनके द्वारा सम्पादित प्रकाशित लोकमत पत्रिका में उनके विचार पढकर उनसे मैं प्रभावित हुआ था। उनसे अनेक बार बिराटनगर में हुई मुलाकातों के वाद उनसे सम्पर्क बढता ही चला गया। जब आप जनकपुर जेलमें थे उस समय भी मेरा अनवरत पत्राचार चलता था। उनके साथ सम्पर्क मुख्यरुपसे स्थानीय भाषाओंके विकास संरक्षण के सन्दर्भमें ही
अधिक रहा है।नेपालकी एक बहुत बडी आबादी द्वारा बोली समझी जानेवाली हिन्दी भाषाके संरक्षणके आन्दोलनमें भी मै उनके साथ सहयोगी की भूमिकामें सदा रहा हुँ।

बाह्य जगतमें राजेश्वरजी का एक अलगही जुझारु रूप है। परन्तु अंतरजगत में राजेश्वरजी एक आत्मावान व्यक्ती हैं। आत्मा को अपने लक्ष्य में समाहित कर वे एक आत्मवान व्यक्ति बन गए हैं। जो आत्मवान होता है वही दूसरों के हृदय को छू सकता है। राजेश्वरजी ने जन जन के मानस को छुआ है। यही उनके उज्ज्वल व्यक्तित्वका रहस्य भी है।

गेहूंवा रंग,मंझला कद, साधारण वेशभूषा उनके प्रथम दर्शन में आकृष्ट करने दृश्य व्यक्तित्व है। प्रसन्न मन सबके प्रति समभाव व आत्मीयता की तीव्र अनुभूति, विशाल चिंतन, विरोधी के प्रति भी विनोदी स्वभाव उनके व्यक्तित्व के ये गुण सबको प्रभावित करते हैं। आप सदा अनेक संघर्षों की दीवारों को तोड़कर ही आगे बढ़े हैं । भूख और प्यास से अभिजीत रहकर गांव गांव नगर नगर में घूम कर उन्होंने समाजकी राष्ट्रकी सेवा की है।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 6 जून 2026 शनिवार शुभसंवत् 2083

उन्होंने अपने जीवन में दो शब्दों का प्रयोग कभी नहीं किया । एक “आराम” दूसरा “असम्भव” ।अपने लक्ष्यको जीवन का मुख्य उद्देश्य मानकर हर समय उसी ओर आगे बढ़ने में लगे रहते हैं। जैसी भी समस्या जब भी जिस रूपमें सामने आई उन्होंने उसका सामना करके पर उसपर विजय प्राप्त की है।
अपने लक्ष्यों की ओर समाज को आकृष्ट करने के लिए दो प्रमुख साधनों को अपनाया है जिसमें एक है “लेखन” और दूसरा है “वाणी”। आपने यिन दोनों ही माध्यमों द्वारा अपनें विचारोंको पल्लवित-पुष्पित किया है। जनता की भाषा में जनता की बातें करना उनकी एक विशेषता है।
संसारमें अनेक व्यक्ति जन्म लेते हैं परंतु चर्चा उनकी होती है जो दुनियाके भले के लिए स्वयंको शतप्रतिशत खपा देते हैं।जीवन में आने वाले अनेक कष्टों , विषम परिस्थितियों का सामना करके जीवन के अनेक उतार-चढ़ावको संयमित होकर सह लेते हैं। जहां चाह वहां राह वाली कहावत उनके जीवन में पूर्ण रूपसे सही उतरती है। एकला चलो रे के सिद्धांत पर विश्वास करते हैं।किसीका समर्थन मिले या ना मिले वह अपने विचार को कार्यान्वित करने के लिए आगे बढ़ जाते हैं।
संघर्षशील जीवन जीने वाले व्यक्ति के कर्म स्वयं बोलते हैं। मैंने यह किया वह किया उसे घोषणा नहीं करनी पडती हैं। ऐसा व्यक्ती उस फूल कि तरह है जो खिलता है तो उसकी खुसबु स्वयं चारों और फैलजाती है।ऐसे संघर्षशील पुरुषोंकी गाथा समाज के लिए प्रेरक होती है।
इस ग्रंथ में राजेश्वरजी के जीवन की अनेक संघर्षगाथाओंको हम पढ पाएंगे।आने वाली पीढ़ी के लिए यह प्रेरणाका श्रोत बनेगी।
मनुष्यका जीवन एक बदलते हुए मौसम की तरह है। कभी सुख कि शीतल मंद मंद हवाके झोंके तो कभी
दुखकी गर्म हवाओंका सामना उसे करना होता है।जो व्यक्ती यिन गर्म हवाओंसे घबराकर अपनी यात्रा अधुरी छोड देता है वह राजेश्वर नेपाली कभी नहीं बन सकता है। यही माणक उन्होंने समाजमें स्थापित किया है और यही विशेषता उन्हें भीडसे अलग पहचान दिलाती है। परिस्थितियों के हाथ का खिलौना नहीं बनता उसका स्वयंका जीवन तो हरा भरा बन जाता है साथही समाजकी बगियाको भी वह हराभरा बनादेता है।श्री राजेश्वर नेपालजी का जीवन विविध प्रस्तुतियों की प्रणालियों में उपस्थित होकर गुजरा और उनकी हिम्मत कभी उदास बनकर लड़खड़ाइ नहीं हर स्थिति में समाज को कुछ न कुछ दिया ही दिया है। आज भी वह हर क्षेत्र में वह सक्रिय हैं और निर्बाध गति से हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहे है।
नेपाल में हिंदी भाषा की उन्नति के लिए उन्होंने अनेक प्रयास किए अनेक पुरस्कार उन्होंने स्थापित किए खुद सम्मानित होनेसे ज्यादा वे दुसरोंको सम्मानित पुरस्कृत कर प्रसन्न होते हैं।उनकी इन्ही विशेषताओंके कारण आज वे श्रद्धा सम्मान के पात्र बन पाए हैं।
न जाने किस मिट्टी से बने हैं राजेश्वरजी तभी तो जीवनके अनेकानेक झंझा तुफानों सहकर भी
लौहस्तम्भ कि तरह आजभी अडीग खडे हो नयी पीढीको प्रेरणा दे रहे हैं।
मैं उनके सुस्वास्थ, सुख समृद्धि की कामना प्रभुसे करते हुए अपनी कलम को विराम देता हुँ।

यह भी पढें   नेपाली सेना द्वारा प्रेशर कुकर बम निष्क्रिय
लक्ष्मण नेवटिया,
विराटनगर -९

nevatialk@gmail.com

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *