ललितपुर में भारत सरकार के सहयोग से पुनर्निर्मित श्री गुस्तल महाविहार और प्रथमश्री महाविहार का भव्य उद्घाटन
हिमालिनी ऑनलाइन विशेष, ललितपुर/काठमाडौँ, २८ जुलाई २०२६ (१२ श्रावण २०८३)
नेपाल की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक नगरी पाटन (ललितपुर) के गुइत टोल स्थित ऐतिहासिक सांस्कृतिक संपदा स्थल **’श्री गुस्तल महाविहार’** तथा **’प्रथमश्री महाविहार के आगम’** का पुनर्निर्माण कार्य संपन्न होने के बाद मंगलवार को भव्य समारोह के बीच संयुक्त रूप से उद्घाटन किया गया।
इस नव-पुनर्स्थापित विरासत का उद्घाटन प्रतिनिधि सभा सदस्य (सांसद) **माननीय श्री जगदीश खरेल**, ललितपुर महानगरपालिका के प्रमुख (मेयर) **श्री चिरीबाबु महर्जन** तथा नेपाल के लिए भारत के राजदूत **महामहिम श्री नवीन श्रीवास्तव** ने संयुक्त रूप से किया। उद्घाटन के अवसर पर गणमान्य व्यक्तियों ने वैदिक एवं स्थानीय परंपरा के अनुसार आयोजित विशेष पूजा-अर्चना में भाग लिया तथा उद्घाटन पट्टिका का अनावरण किया।
१२ करोड़ नेपाली रुपये की लागत से हुआ पुनर्निर्माण
वर्ष २०१५ के विनाशकारी भूकंप में क्षतिग्रस्त हुए इस प्राचीन महाविहार का पुनर्निर्माण भारत सरकार के भूकंपोत्तर पुनर्निर्माण अनुदान (Post-Earthquake Reconstruction Grant) के तहत लगभग **१२ करोड़ नेपाली रुपये (NPR 12 Crores)** की लागत से किया गया है।
इस परियोजना का कार्यान्वयन नेपाल सरकार के शहरी विकास तथा भवन निर्माण विभाग (DUDBC) के अंतर्गत ‘केंद्रीय आयोजना कार्यान्वयन इकाई (भवन तथा आवास)’ द्वारा किया गया। वहीं, इसकी संपूर्ण डिजाइन एवं परियोजना प्रबंधन परामर्श (Project Management Consultancy) का कार्य ‘इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट्स एंड कल्चरल हेरिटेज’ (**INTACH**) ने संभाला है।
स्थानीय जीवंत संस्कृति का संरक्षण आवश्यक: सांसद जगदीश खरेल
समारोह को संबोधित करते हुए सांसद जगदीश खरेल ने स्थानीय समुदाय की सहनशीलता और अपनी संस्कृति के प्रति समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि गुस्तल महाविहार जैसे प्राचीन और जीवंत विरासत स्थलों का संरक्षण नेपाल की सांस्कृतिक पहचान के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने नेपाल के सांस्कृतिक धरोहरों के जीर्णोद्धार एवं पुनर्निर्माण में भारत सरकार द्वारा दिए जा रहे निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
भारत का सहयोग अत्यंत सराहनीय: मेयर चिरीबाबु महर्जन
ललितपुर महानगरपालिका के मेयर चिरीबाबु महर्जन ने ललितपुर सहित नेपाल के विभिन्न जिलों में सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और पुनर्निर्माण में भारत सरकार के योगदान की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदाय के सक्रिय सहयोग और भारतीय सहायता के समन्वय से ही ऐसे विशाल ऐतिहासिक कार्यों को सफलता पूर्वक पूर्ण किया जा सका है।
भारत-नेपाल संबंध सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े हैं: राजदूत नवीन श्रीवास्तव
नेपाल के लिए भारतीय राजदूत महामहिम नवीन श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने गहरे सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नेपाल के ऐतिहासिक स्मारकों के जीर्णोद्धार में भारत का सहयोग केवल एक विकास साझेदारी नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों की साझी विरासत, अटूट मित्रता और आत्मीयता का जीवंत प्रतीक है। पुनर्निर्मित यह संरचना दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ संबंधों को भावी पीढ़ियों तक जीवंत रखेगी।
नेपाल के विकास और पुनर्निर्माण में भारत की ऐतिहासिक भूमिका
कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार द्वारा नेपाल में संचालित विभिन्न पुनर्निर्माण परियोजनाओं के आंकड़ों को भी रेखांकित किया गया:
* **सांस्कृतिक धरोहर:** भारत सरकार ने नेपाल के ८ जिलों में स्थित कुल **३० सांस्कृतिक विरासत स्थलों** के संरक्षण एवं पुनर्निर्माण में सहयोग प्रदान किया है।
* **आवास निर्माण:** गोरखा और नुवाकोट जिलों में **५०,००० निजी मकानों** का सफलतापूर्वक पुनर्निर्माण कराया गया है।
* **शिक्षा क्षेत्र:** ८ जिलों में **८५ शैक्षणिक संस्थानों** (विद्यालयों/कॉलेजों) के भवनों का निर्माण।
* **स्वास्थ्य क्षेत्र:** ११ जिलों में **१३३ स्वास्थ्य सुविधाओं/अस्पतालों** का पुनर्निर्माण शामिल है।
समारोह में गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
उद्घाटन समारोह में नेपाल सरकार के शहरी विकास तथा भवन निर्माण विभाग (DUDBC) एवं केंद्रीय आयोजना कार्यान्वयन इकाई (CLPIU) के वरिष्ठ अधिकारी, INTACH के प्रतिनिधि, काठमाडौँ स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारीगण, स्थानीय गुठी के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
यह परियोजना भारत और नेपाल के बीच की व्यापक विकास साझेदारी (Development Partnership) को और अधिक मजबूती प्रदान करती है।



