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कलयुग में सच्चे और सही सोच वाले इंसान को सम्मान क्यों नहीं मिलता? : बिमल सर्राफ

 

बिमल सर्राफ, रक्सौल । आज के समय में अक्सर यह सुनने को मिलता है कि “जो व्यक्ति सच्चा, ईमानदार, सरल और नेक विचारों वाला होता है, उसे उसका उचित सम्मान नहीं मिलता।” यह बात पूरी तरह हर परिस्थिति पर लागू नहीं होती, लेकिन समाज के अनेक अनुभव इस भावना को जन्म देते हैं।

वर्तमान युग में बाहरी दिखावा, धन, प्रभाव, प्रसिद्धि और स्वार्थ को कई बार चरित्र, ईमानदारी और मानवीय मूल्यों से अधिक महत्व दिया जाने लगा है। ऐसे माहौल में जो व्यक्ति सत्य के मार्ग पर चलता है, नियमों का पालन करता है और किसी का अहित नहीं चाहता, उसे कई बार कमजोर या असफल समझ लिया जाता है। जबकि वास्तव में वही व्यक्ति समाज की सबसे बड़ी ताकत होता है।

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आज अनेक लोग व्यक्ति का मूल्य उसके चरित्र से नहीं, बल्कि उसके पद, प्रतिष्ठा और आर्थिक स्थिति से आंकने लगे हैं। यही कारण है कि सच्चे और ईमानदार लोग कई बार भीड़ में अनदेखे रह जाते हैं, जबकि दिखावा करने वाले लोग अधिक चर्चा में रहते हैं।

इतिहास गवाह है कि सत्य का मार्ग कभी आसान नहीं रहा। भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण, महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद और अनेक महापुरुषों ने भी संघर्षों का सामना किया। उन्हें तत्काल सम्मान नहीं मिला, लेकिन समय ने उनके सत्य और महानता को स्वीकार किया। इससे स्पष्ट होता है कि सम्मान का वास्तविक निर्णय समय करता है, भीड़ नहीं।

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सच्चा इंसान कभी सम्मान पाने के लिए अच्छे कर्म नहीं करता। उसका उद्देश्य मानवता, सत्य और न्याय की रक्षा करना होता है। उसका सबसे बड़ा पुरस्कार उसका शांत मन, स्वच्छ अंतःकरण और ईश्वर का आशीर्वाद होता है। बाहरी सम्मान देर से मिल सकता है, लेकिन आत्मसम्मान और ईश्वर का सम्मान कभी व्यर्थ नहीं जाता।

आज समाज को आवश्यकता है कि वह व्यक्ति का मूल्य उसके वस्त्र, धन और पद से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार, संस्कार, ईमानदारी और मानवता से करे। यदि हम सच्चे लोगों का सम्मान करना सीख जाएँ, तो समाज में विश्वास, प्रेम और नैतिकता स्वतः मजबूत होगी।

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अंततः यही कहा जा सकता है कि कलयुग में सच्चे लोगों को सम्मान मिलने में देर अवश्य हो सकती है, लेकिन उनके अच्छे कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाते। झूठ और दिखावा कुछ समय तक चमक सकते हैं, परंतु सत्य का प्रकाश अंततः सबसे अधिक उज्ज्वल होता है। इसलिए परिस्थितियाँ कैसी भी हों, हमें सत्य, सदाचार और मानवता का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि यही मार्ग अंततः जीवन को वास्तविक सम्मान और सार्थकता प्रदान करता है।

बिमल सर्राफ
रक्सौल

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