देश हमारा सिसक रहा है इसे कब तक रोने देंगे : श्यामानन्द ठाकुर
भबिस्य के प्रश्न ….
बहु हमारी बोली एक दिन
क्या है मेरा नाता ।
प्रथम नागरिक मैं बन नही सकती
कहते देश के नेता ।।
मैं तो सब कुछ छोड़ छाड़ के
आपके घर आ गई ।
लेकिन देख के अपनी स्थिती
बोल नही कुछ पाई ।।
मुझे आपने सम्मान देकर
अच्छे से अपनाया ।
लेकिन देश की राजनीति ने
मुझे अधर लटकाया ।।
अब तो जीवन भर मै
तृतीय नागरिक रहूंगी ।
जीवन मेरा राम भरोसे
कुछ भी ना कर पाउंगी ।।
मैंनेअपनी बहु बेटी को
धीरे से समझाया ।
बोला बेटी नेता बोले
कारण देश की माया ।।
सुनकर वो गंभीर हो गई
बोल नही कुछ पायी ।
लेकिन मैंने उसके आंखों में
सिर्फ उलझन ही पायी ।
कैसे उसैको मैं बतलाता
अपने देश की हालात ।
बंसज होके भी मैं पीड़ित
बुरी अंगीकृत की हालात ।।
बहु हमारी पढ़ी लिखी थी
इतिहास समझकर आयी ।
बोली मैं तो कुछ ना समझी
ये कैसी नियम बनाई ।।
करते है बदनाम किसी को (अँगीकृत)
देकर रात दिन तारण ।
जितने सारे घात हुए हैं
सब बंसज के कारण ।।
अच्छी बुरी सारी संधियां
बंसज ने ही करी थी ।
बेच के देस की सारी सम्पति
अपनी झोली भड़ी थी ।।
मैंने तो इतिहास में अपने
बस कुछ ऐसा ही पाया ।
एक तरह के लोग के कारण
देश ने सब कुछ गंवाया ।।
मैं ना कहती सब बुरे हैं
कुछ को देश की माया ।
लेकिन वो सब बड़े खतरनाक
जिसने ये नियम बनाया ।।
ऎसे नेता बड़े छली हैं
छल से देश चलाया ।
बस करते सत्ता की साजिश
देश बेच के खाया ।।
सीता और भृकुटी की भूमि पर
ये नारी का अपमान ।
बहु बेटी की हालात नही अच्छी
बचा नही स्वाभिमान ।।
ऐसे सारे नियम कायदे
हमलोगों के ख़ातिर ।
अपने लिए सब सही है
ये सत्ता के शातिर ।।
ऐसे वैसे नियम बनाकर
हमे किया सत्ता से बाहर ।
देसभक्ति का ढोंग रचाकर
देश बनाया बदतर ।।
बस अब बहुत हो गया
नही चाहिए बंसज
मिल जुल कर ही देश बनेगा
बस यही है आज का सच ।।
भबिस्य देश का खतरे में
खतरनाक ये चाल ।
देस तोड़ने की ये साजिश
आज का बड़ा सवाल ।।
अब तो हम लोगों को ही
अभियान चलाना होगा ।
ऐसे सोच से देश को खतरा
हमे देश बचाना होगा ।।
करती हूँ आह्वान सभी से
सबको आगे आना होगा ।
राट्रघातियों से हमको
देश बचाना होगा ।।
देश तोड़ने के खड्यंत्रों को
अब तो नही सहेंगे ।
ऐसे नेताओं से सिंहासन
वापस लेके रहेंगे ।।
देश हमारा सिसक रहा है
इसे कब तक रोने देंगे।
सत्ता ने बस छला अभी तक
पर भबिस्य ना छलने देंगें ।।
अब भबिस्य ना छलने देंगें ।।।

बनैनिया सप्तरी ।हाल विराटनगर..13
श्यामानन्द््द्द्््द््द्द्द््द्द्््द््द््द््द्द्््द््द्द्द््द्द् ठाकुु

