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क्या खूब लगती हो…. “योग करो निरोग रहो” : कमला भंसाली जैन

 

कविता,राग-:क्या खूब लगती हो….
“योग करो निरोग रहो”

योगासन करने से सारे सुख मिलते हैं,
जीवन मे तन-मन के सारे दुःख मिटतें हैं।
ॐ जपो,जपते रहो!पाप गलते हैं,
मन-उपवन में खुशियों के फूल खिलते हैं।
योगासन करने से सारे सुख मिलतें हैं।
१.है बहुत फायदे इसके हां इसके,
जो करता है मिट जाते रोग उसके हां उसके।
करो कपाल-भांति मनभावन-मनभावन,
प्राणायाम तो पवित्र है अति पावन… अति पावन।
ॐ जपो जपते रहो बंधन कटतें है,
मन-उपवन में खुशियों के फूल खिलतें हैं,
योगासन करने से सारे सुख मिलतें हैं।
२.”मधुमेह”रोग हो या ब्लड-प्रेशर,
“कैंसर”हो या कोई भी ट्यूमर।
अनुलोम-विलोम करने से कटजाते रोग भयंकर।।
ॐ जपो जपते रहो पाप कटतें हैं
मन-उपवन मैं…..।।।
३.यदि चाहते हो सुख से जीना हां जीना,
तो भूल-चूक से भी मदिरा को मत पीना..मत पीना।
“कोरोना वायरस”को जड़ से यदि दूर भगाना हां भगाना,
तो खाने में लोलुपता मत करना,
सात्विक भोजन अपनाना-सब जीवों पर मैत्री भाव है रखना,सब जीवों पर दया भाव है रखना।।
ॐ जपो जपते रहो पाप कटतें हैं।
मन-उपवन में खुशियों के फूल खिलतें हैं,
योगासन करने से सारे दुःख मिटतें हैं।
जीवन में तन-मन के सारे सुख मिलते हैं।।

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कमला भंसाली
(राजविराज)

कमला भंसाली जैन

राजबिराज।

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