Thu. Aug 6th, 2020

लॉकडाउन और बच्चे : निक्की शर्मा रश्मि

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लॉकडाउन के दौरान लगातार घर में रहने से बच्चे चिड़चिड़े हो गए हैं । घर से बाहर नहीं निकलने, पसंद का बाहर का खाना और खिलौने न मिलने के कारण उनमें यह बदलाव आ रहा है । १० वर्ष तक के बच्चों में इस तरह की समस्या ज्यादा सामने आ रही है । बड़े बच्चों में पढ़ाई की चिंता भी एक वजह है । गट शी फाउंडेशन के सोशल मीडिया सर्वे में यह बात सामने आई है ।

छोटे बच्चे बाहर न जाने से तो बड़े पढ़ाई के लिए चिंतित

रिपोर्ट के मुताबिक १० साल तक के बच्चे बाहर खेलने नहीं जा पा रहे । जंक फूड और नए गिफ्ट जैसे खिलौने, कपड़े आदि नहीं मिलने से बच्चे चिड़चिड़े हो गए हैं । वहीं बड़े बच्चे पढ़ाई, कोचिंग आदि में आई रुकावट की वजह से तनावग्रस्त हैं ।
लॉकडाउन में समय बिताते हुए एक माह से ज्यादा वक्त हो चला है । बच्चे घर के नये माहौल में भले ढलते दिख रहे हों पर उनके मन में वर्तमान समय को लेकर सवाल हैं । विशेषज्ञ कहते हैं कि बच्चों की उत्सुकता को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए । डब्लूएचओ कहता है कि दुनिया भर में बच्चों पर दुर्व्यवहार की घटनाएं बढ़ रही हैं । सभी अभिभावक अपने बच्चों को कोरोना के बारे में जानकारी देने के साथ ही वायरस से जुड़े शारीरिक व सामाजिक असर के बारे में भी बताकर लड़ने के लिए तैयार करें । लॉकडाउन के दौरान बच्चों पर शारीरिक, मानसिक हिंसा से जुड़ी घटनाएं बढ़ गईं ।

यूनिसेफ ने दुनियाभर से आ रही बाल हिंसा की घटनाओं से निपटने के लिए छह एजेंडा के तहत सभी अभिभावकों के लिए निर्देश जारी किए हैं । आइए जानते हैं कि आप किस महामारी में बच्चों को भेदभाव का शिकार होने से बचा सकते हैं ।
गरीब बच्चों की मदद
यह समय उस समुदाय के लिए बेहद चुनौतीभरा है, जो रोज कमाते–खाते हैं । ये परिवार कई तरह से आपसे सीधे या अप्रत्यक्षरूप से जुड़े हो सकते हैं । आपके घर में काम करने वाले कर्मचारी को फोन लगाकर हालचाल लें, अपने बच्चों को भी ऐसे संवाद में शामिल करें ताकि वे संवेदनशील बनें ।

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बच्चों को ऐसे दें जानकारी
 बच्चों के सामने समाचार देखते या पढ़ते हुए सावधानी बरतना जरूरी है ।
 कोरोना से जुड़े बच्चों के हर सवाल को ध्यान से सुनें और जवाब देने का प्रयास करें ।
 बच्चों के सामने तथ्यात्मक बात ही बताएं पर उनकी उम्र के हिसाब से ही जानकारी दें ।
 कोरोना से जुड़ा कौन से कंटेंट बच्चे टीवी, इंटरनेट पर देख रहे हैं, इस पर नजर रखें ।
सुरक्षित–स्वस्थ वातावरण
यूनिसेफ के मुताबिक, घर में बच्चे को बेहद स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण मिलना जरूरी हैं । अगर इसमें से किसी एक चीज से भी समझौता हो रहा है तो बच्चे पर महामारी का असर गहरा होगा । अभिभावक अपने बच्चे के व्यवहार पर विशेष ध्यान दें, देखें कि क्या बच्चा घर या किसी बाहरी व्यक्ति के प्रति अनावश्यक डर तो महसूस नहीं करने लगा है ।
इंटरनेट सुरक्षा पर नजर
आजकल बच्चे ऑनलाइन पढ़ रहे हैं, डब्लूएचओ की सलाह है कि अभिभावक इस बात पर नजर रखें कि बच्चे कहीं इंटरनेट पर बुलीईंग का शिकार होने के खतरे पर नहीं हैं । स्थानीय साइबर सेल से भी आप शिकायत कर सकते हैं । यूनिसेफ कहता है कि किसी भी स्थिति में बच्चों की शिक्षा जारी रहनी चाहिए ।

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