गुजारी है जो बिना तेरे रात अपनी उसी को मेरी जुबानी लिखी हुई है : नीतू सिन्हा ” तरंग “
ग़ज़ल
मुहब्बत की कहानी लिखी हुई है
खुद अपनी ही बयानी लिखी हुई है
गुजारी है जो बिना तेरे रात अपनी
उसी को मेरी जुबानी लिखी हुई है
की है तस्लीम याद की रातभर जो
उसे अश्को की रवानी लिखी हुई है

मिली सौगाते जो तेरे इश्क़ से मुझे
उसी मे ही ज़िन्दगानी लिखी हुई है

खलेगी बात ये भी ताउम्र ” तरंग “
जिसे इश्क़ की निशानी लिखी हुई है
नीतू सिन्हा ” तरंग “
राँची झारखंड

