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रखना मान इस राखी की : स्मृति श्रीवास्तव

 

रखना मान इस राखी की

बँधवाना जब तुम राखी भैया,
अपनी सूनी कलाई पे,
वचन दे देना उससे इतना,
विश्वस्त हो तुम्हारी तरुणाई पे |

रखना मान इस राखी की,
रेशम का बस नहीं ये धागा हैं,
सबकी बहनों की इज्जत करना,
तुम्हारी यही मर्यादा हैं |

कहना भुजदंडों को वो सबल करें,
तेज को उच्च, प्रखर और प्रबल करें,
बनें कृष्ण कलियुग का वो,
हर द्रौपदी की लाज रखें |

निस्तेज कलाई रह जायेगी,
वचन नहीं अगर निभा पाओगे,
बहनों की इज्जत लुटते देखोगे,
क्या चुपचाप खड़े रह जाओगे |

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एक योद्धा सा पराक्रमी बन,
जब भाई खुद शस्त्र उठाएगा,
बहन की स्वाभिमान की रक्षा हेतु,
जब बन ढाल खुद भिड़ जाएगा|

तब देश एक रक्षा सूत्र में बंध,
खुश हो ये त्योहार मनाएगा,
बहन बेटियां, हो निडर जिएंगी,
स्वर्ग धरा पे आएगा |

स्मृति श्रीवास्तव
शिक्षिका, डी.ए.वी. स्कूल, काठमाण्डू।

 

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