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भारत से कम्यूनिष्टों का सफाया नेपाल में जसपा पर जेएनयू हावी : पंकज दास

 

काठमाण्डू । जसपा पार्टी में वामपंथी विचारधारा वाले नेता हावी हैं। डा बाबूराम भट्टराई से लेकर उपेन्द्र यादव तक और अशोक राई से लेकर राजेन्द्र श्रेष्ठ तक। इनकी सोच वामपंथी, इनके विचार वामपंथी, इनकी कार्यशैली वामपंथी, इनका आचरण वामपंथी।

इस पार्टी के एकीकरण के पीछे दिल्ली के #JNU वाले जमात की भूमिका किसी से छिपी नहीं है। भारत से कम्यूनिष्टों का सफाया हो रहा है तो जेएनयू वालों ने अब नेपाल में वामपंथ को मजबूत करने में लगे हैं।

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हद तो तब हो गई जब इस पार्टी की गठन के बाद पहली बैठक हो रही है उसके लिए पूरे काठमांडू में और कोई जगह नहीं मिली । हर दूसरे दिन खुमलटार में प्रचण्ड के दरबार में मत्था टेकने वाले और रात के अंधेरे में बालुवाटार में बार्गेनिंग करने वाले जसपा के शीर्ष नेताओं को नेकपा से संबंधित एक कार्यालय का सभाकक्ष उपलब्ध कराया गया है।

यह कोई ऐसे ही नहीं हुआ है। जसपा तो बस कहने के लिए वैकल्पिक शक्ति का राग अलापती है। दरअसल में यह पार्टी नेकपा की बी टीम है। जिसका प्रयोग जल्द ही ओली के सत्ता टिकाने में या प्रचण्ड को सत्ता में बिठाने के लिए होने जा रहा है। अगले चुनाव से पहले इस पार्टी का नेकपा में विलय कराने की योजना के साथ इसका गठन हुआ है।

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मंच पर दो बेचारे दिल्ली के मारे मधेशी नेता दिख रहे हैं। जिनकी हैसियत महाभारत काल के धृतराष्ट्र की तरह है। जिनके सामने द्रौपदी का चीरहरण होता रहेगा, ये देखते रहेंगे लेकिन कुछ भी कहने और करने की अवस्था में नहीं रह गए हैं। इनका काम अंत में ताली बजाना ही रह गया है। राजपा के चार अध्यक्ष (चौबे) जसपा बनाकर छब्बे बनने निकले थे लेकिन पार्टी में इनकी औकात दूबे वाली भी नहीं है।

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