ओह ! राहत गए , हम आहत हुए (एक श्रद्धांजलि) : सुरेन्द्र लाभ
श्रद्धांजलि
ओह ! राहत गए ,
हम आहत हुए ।
पता नहीं क्या थे,
एक हिन्दु या मुसलमान ,
हाँ हमे मालूम है,
वो थे एक सच्चे इनसान ।
शायर सीमाओं से पार होता है,
लव्जों में उनसे दिदार होता है।
बेजुवानों के इस दौर में,
एक वाजिव जुवान खोया है,
सन्नाटा छाया महफिल को देखो,
हर शक्स आज खूब रोया है ।


