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अमन व शान्ति के प्रतीकः अमनेश्वर महादेव -अमाना मठ

 

नवीनकुमार नवल:सीतामढ बिहार । भारत विहार प्रान्त के सीतामढÞी जिला के सुरसण्ड मुख्यालय से ७ किलोमिटर दक्षीण में अवस्थित अमाना मठ -अमनेश्वर महादेव) धार्मिक साँस्कृतिक के साथसाथ -नेपाल और भारत) दोनों देशों के सुमधुर सम्बन्ध की धरोहर हैं ।
इस मन्दिर की स्थापना सन् १३३र्९र् इ. में दरभंगा महाराज के द्वारा की गई थी । कहा जाता है कि इस स्थान में पहले घना जंगल था । उस समय सुकेश्वर नामक एक स्थानीय ग्वाला द्वारा खेती करते समय शिवलिंग प्राप्त हुआ था । और बहुत जोरों की आवाज हर्र्ुइर्, जिसे वह मर्ूर्छित हो गया । बाद में कई दिनों के बाद शंकर भगवान ने उसे स्वप्न दिया कि वहाँ शिवलिंग है, तुम उस का उद्धार करवाओ । तब यह चर्चा चारों तरफ फैली और दरभंगा महाराज तक बात पहुँची । उसके बाद दरभंगा महाराज द्वारा वहाँ सुकेश्वर महादेव मन्दिर की स्थापना की गई । दरभंगा महाराज जब कभी वहाँ आते थे तो उन को शान्ति का अनुभव होता था । इसीलिए बगलवाले गाँव का नाम अमाना रखा गया औंर इस मन्दिर को लोग अमाना मठ के नाम से जानने लगे ।

अमन व शान्ति के प्रतीकः अमनेश्वर महादेव -अमाना मठ
अमन व शान्ति के प्रतीकः अमनेश्वर महादेव -अमाना मठ

जैसा की त्रेता युग में राम विवाह के समय बाराती का ठहराव यहीं हुआ था । औंर इसी के बगल में र्स्वर्ग श्री -अपभ्रंशः संगहीं) नदी भी है । साथ ही बाराती के लिए मन्दिर से पूरब राजा जनक द्वारा १५ एकड भूमी में तलाव भी खुदवाया गया था, जोर् इटहरवा पोखरी के नाम से प्रसिद्ध है ।
सन् १९३र्४र् इ.में आए भयंकर भूकम्प के प्रकोप से मन्दिर क्षत्रि्रस्त हो जाने के वाद बगल के रधाऊर गाँवके विश्वम्भर तिवारी द्वारा मन्दिर का जीर्णोद्धार किया गया और पूजापाठ यथावत् चलता रहा । उस के वाद शाही मीनापुर -मुजफ्फरपुर) निवासी विजयकुमार शाही की पत्नी सुषमा शाही द्वारा सन्तान प्राप्ति के उद्देश्य से नरहा गाँवसे आकर पूजापाठ करनेके बाद एक लक्ष्मी रुपी पुत्री प्राप्त होने की खुशी में शाहीजी द्वारा मन्दिर को सन् २०११ में भव्य रुप दिया गया । तब से यह मन्दिर अमनेश्वर महादेव के नाम से चर्चा में है । साथ ही शाहीजी द्वारा महामृत्युंजय जप, रुद्राभिषेक आदि यज्ञ करा कर भक्तों की आस्था को जागृत करया गया ।
यहाँ के पुजारी उमेश गिरी द्वारा पूजा एवं बाबा रामपुकार दास दण्डी बम द्वारा अखण्ड दीप जलाने का प्रावधान रखा गया, जो वर्तमान में सुबह-शाम जलता रहता है । इस मन्दिर परिसर में मुख्य रुप से पार्वती, बजरंगबली, राम दरवार, बासुदेव मन्दिर के साथ-साथ एक धर्मशाला भी है, जिस में रामसीता की मर्ूर्ति है । १९६२ में बाबा राम बिलास उर्फखेहरु दास द्वारा यज्ञ कराने के क्रम में ११ पत्तोंवाला बेलपत्र मिला था, जिससे लोगों की आस्था को और बढÞावा मिला । फिलहाल हर एकादशी के रोज मन्दिर में स्थानीय ग्रामिणों द्वारा २४ घण्टे का अष्टजाम कर्ीतन किया जाता है । साथ ही अमाना ग्रामबासियों के द्वारा प्रत्येक घर से दूध, चिनी, खोवा आदि का प्रसाद बनाकर नित्य दिन रामनाम संकर्ीतन किया जाता है ।
शिवरात्री में इस मठ का महत्व मिथिलांचल में विशेष रुपसे देखा जाता है । शिवरात्री के दिन यहाँ नेपाल महोत्तरी जिले के जलेश्वर स्थित जलेश्वरनाथ महादेव की तरह जलढरी के साथसाथ धानकी झोंटी चढाने के लिए चिंटीके धारीके तरह उत्तरमे जलेश्वर -नेपाल), पूरब में चोरौत पुपरी, दक्षिण में बाजपट्टी, पश्चिम में सीतामढÞी से दर्शनार्थी आते हैं । यहाँ चर्मरोग से ग्रसित लोग भाटाका भार चढÞाकर इस रोग से मुक्त हो जाते हैं । शिवरात्री के दूसरे दिन भव्य मेला का आयोजन होता है । मेला के मुख्य आकर्षा में पुराने जमाने के राम हिलोडÞा, बाइसकोपबाला सिनेमा, कुश्ती पहलवानी, नाटक के अतिरिक्त अन्य बहुत कुछ होते हैं । इस क्षेत्र के लोगों की मान्यता यह हैं कि जो भी मनोकामना महादेव मन्दिर में आकर करते हैं, ओ सभी मनोकामनाएं पर्ूण्ा होती हैं । धार्मिक एवं साँस्कृतिक रुप से यह परम्परा सदियों से चली आ रही है । साथ ही इस क्षेत्र के लोग सामाजिक कार्यकर्ता विजय कुमार शाही के सहयोग और नेतृत्व में इस मन्दिर को पर्यटकीय क्षेत्र बनाने में जुटे हुए हैं ।

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