*आख़िर क्यों भटक रहा है युवा* *अंशुल राजपूत*
*आज की भागती दौड़ती हुई ज़िन्दगी में युवा भटक सा गया है आगे जाकर तमाम* *तरह की परेशानियों में पड़ रहा है युवा*
*आज युवाओं में संस्कार की कमी भी* *देखने को मिल रही है किस इंसान से किस तरह बात करनी है उसको इसकी भी समझ नही है आज क्यों भटक रहा है* *युवा मैंने तमाम जगहों पर अधिकतर संस्कार की कमी को महसूस किया है*
*गलत संगत के कारण अपनो से ही दूर हो रहा* *है आज का युवा दोस्ती शब्द को क्यों बदनाम कर रहा आज का युवा आज कल तमाम घटनाएं क्यों आ रही है दोस्त ने किया दोस्त का कत्ल आख़िर भविष्य कहाँ खो सा गया है गलत खानपान के कारण आज क्यों युवा बीमार बीमार सा रहने लगा है कमी है संस्कार अच्छे आचरण की आज किसी की बात को क्यों नही सुनता, समझता आज का युवा अपनो से बड़ो का क्यों अनादर कर रहा आज का युवा यह सब बातें मैंने खुद महसूस की हैं आख़िर क्यों हमारा आने वाला कल अंधकार में धकेलता हुआ जा रहा है*



