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१८वें प्रयास में राष्ट्रीयसभा सदस्य ! लेकिन मन्त्री बनने का ‘सपना’ अधूरा ही रहने की संभावना !

 
बामदेव गौतम, फाईल फोटो

काठमांडू, ४ सितम्बर । वि.सं. २०७२ साल में सम्पन्न चुनाव में तत्कालीन नेकपा एमाले के चर्चित नेता वामदेव गौतम को बर्दिया निर्वाचन क्षेत्र नं. १ निवासी जनता ने पराजित कर दिया । चुनाव में पराजित होते हुए भी गौतम ने सांसद् बनने की ख्वाब देखना नहीं छोड़ा । लगभग ढाई साल की अवधि में उन्होंने १७ बार सांसद् बनने का असफल प्रयास भी किया । अन्ततः १८वें प्रयास में नेता गौतम राष्ट्रीयसभा सदस्य बनने में सफल हो गए ।
इससे पहले उन्होंनें कई बार संसद् बनने के लिए प्रयास किया था । एक दर्जन से अधिक पार्टी संबंद्ध सांसदों को उनके निर्वाचन क्षेत्र से इस्तीफा दिलाकर वहां से चुनाव जीतना चाहते थे नेता गौतम । इसके लिए उन्होंने काठमांडू से लेकर कई जिलों में प्रयास किया । कई पार्टी कार्यकर्ता का विरोध, कहीं शीर्ष नेताओं की तो कई जनता की आक्रोशपूर्ण अभिव्यक्ति के कारण उन्होंने हार मान ली थी । पिछली बार नेता गौतम राष्ट्रपति से मनोनित होकर राष्ट्रीयसभा सदस्य बनने के लिए लग गए थे । इसमें भी उनको कई बार ठोकर खाना पड़ा । लेकिन अंततः गौतम ने जीत हासिल की । अब पार्टी निर्णय अनुसार गौतम राष्ट्रीयसभा सदस्य बनने जा रहे हैं ।
सत्ताधारी दल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) निकट कुछ नेताओं की माने तो पार्टी उपाध्यक्ष भी रहे गौतम उप–प्रधानमन्त्री एवं अर्थमन्त्री बनने की महत्वाकांक्षा के साथ राष्ट्रियसभा सदस्य होने के लिए राजी हो गए हैं । यह भी कहा गया है कि अगर अर्थमन्त्री ना मिले तो उनकी प्राथमिकता गृहमन्त्रालय है । लेकिन संविधान विज्ञ को मानना है कि उनकी यह ख्वाब पूरा होनेवाला नहीं है । अर्थात् संविधान के अनुसार नेता गौतम मन्त्री नहीं हो सकते हैं ।
संविधानविद् भिमार्जुन आचार्य के अनुसार संविधान की धारा ७६ (९), धारा ७८ (१) और धारा ७८ (४) उनके लिए बाधक है । उक्त धारा में उल्लेखित प्रावधान के अनुसार नेता गौतम मन्त्री बनने के लिए योग्य नहीं हो सकते । आखिर क्या है संविधान की उल्लेखित धाराओं में ?
धारा ७६ (९) के अनुसार राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री कि सिफारिश में संघीय संसद् सदस्यों में से समावेशी सिद्धान्त बमोजिम प्रधानमन्त्री के साथ अधिक से अधिक २५ सदस्यीय मन्त्रिपरिषद् गठन कर सकते हैं । इसीतरह धारा ७८ (१) में लिखा है– ‘धारा ७६ की उपधारा ९ में जो भी लिखा हो, संघीय संसद् ना रहे व्यक्ति को भी प्रधानमन्त्री के सिफारिश अनुसार राष्ट्रपति मन्त्री पद में नियुक्त कर सकते हैं ।’ लेकिन संविधान अनुसार ऐसे व्यक्ति को ६ महीनों के भीतर संघीय संसद् का सदस्य होना अनिवार्य है, नहीं तो उन को मन्त्री पद से इस्तिफा देना होगा । यही प्रवाधान अनुसार राष्ट्रीयसभा सदस्य होने की संभावना ना होने के कारण वर्तमान अर्थमन्त्री डा. युवराज खतिवडा भी इस्तिफा दे रहे हैं ।
पार्टी निर्णाय अनुसार नेता गौतम राष्ट्रीयसभा सदस्य तो होने की संभावना है, लेकिन उनके लिए दूसरे धारा बाधक है । धारा ७८ उपधारा (४ में लिखा है– ‘उपधारा १ में जो भी लिखा हो, तत्काल कायम प्रतिनिधिसभा निर्वाचन में परातिज व्यक्ति उक्त प्रतिनिधिसभा की कार्यकाल रहते वक्त उपधारा १ बमोजिम मन्त्री पद में नियुक्त होने के लिए योग्य नहीं है ।’
संविधान विद् को मानना है कि संविधान में उल्लेखित इसी प्रावधान के कारण नेता गौतम मन्त्री बनने के लिए योग्य नहीं है । उन लोगों का मानना है कि अगर नेता गौतम को मन्त्री बनाना ही है तो संविधान में उल्लेखित इस प्रवाधान में संशोधन आवश्यक है ।

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