कर्णाली प्रदेश सरकार विरुद्ध पंजीकृत अविश्वास प्रस्ताव वापसी के लिए प्रचण्ड की दौड़धूप
काठमांडू, १२ अक्टूबर । कर्णाली प्रदेश सरकार के विरुद्ध प्रदेशसभा में पंजीकृत अविश्वास प्रस्ताव वापसी के लिए नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड राजनीतिक दौड़धूप में सक्रिय हो गए हैं । उन्होंने प्रधानमन्त्री भी रहे दूसरे अध्यक्ष केपीशर्मा ओली और पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व प्रधानमन्त्री माधव कुमार नेपाल से मिलकर प्रस्ताव वापसी के लिए आग्रह किया है ।
स्मरणीय है, कर्णाली प्रदेश में पूर्व माओवादी पृष्ठभूमि के महेन्द्र बहादुर शाही मुख्यमन्त्री हैं । यहां नेकपा की स्पष्ट दो तिहाई बहुमत होते हुए भी नेकपा के ही १८ सांसदों ने मुख्यमन्त्री विरुद्ध आइतबार अविश्वास प्रस्ताव पंजीकृत किया है । विशेषतः चुनाव से पहले से ही यहां पूर्व एमाले पृष्ठभूमि के यमलाल कँडेल मुख्यमन्त्री बनाना चाहते थे । पार्टी पोलिटव्युरो सदस्य भी रहे कँडेल मुख्यमन्त्री बनने की उद्देश्य के साथ ही प्रदेशसभा चुनाव में उम्मीदवार बन गए थे । लेकिन पार्टी एकता के बाद भागबंडा में कर्णाली प्रदेश तत्काली माओवादी की भाग में पड़ गया और शाही मुख्यमन्त्री बन गए ।
आज कँडेल पक्षधर प्रदेश सांसद् मुख्यमन्त्री के प्रति असंतुष्ट हैं और उनको हटाकर कँडेल खूद मुख्यमन्त्री बनाना चाहते हैं । इसीलिए माओवादी पृष्ठभूमि के शाही को पुनः मुख्यमन्त्री कायम रखने के लिए प्रचण्ड ने नेता ओली और नेपाल से सहयोग मांग करते हुए भेटवार्ता किया है । कहा जाता है कि प्रधानमन्त्री भी रहे अध्यक्ष ओली के ही निर्देशन में कर्णाली प्रदेश में मुख्यमन्त्री विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पंजीकृत हुआ है ।
स्मरणीय बात यह भी है कि कूल ४० सदस्यीय प्रदेशसभा में नेकपा संबंद्ध ३घ सांसद् हैं । इसमें से पूर्व माओवादी के १३ हैं बांकी २० पूर्व एमाले से हैं । २० सांसदों में भी ओली पक्षधर १२ और नेपाल पक्षधर ८ सांसद् हैं । इसीलिए ओली और नेपाल को मनाने के लिए सोमबार अध्यक्ष प्रचण्ड ने ओली और नेपाल से मिलकर विमर्श किए हैं ।
दोनों नेता से मिलकर अध्यक्ष प्रचण्ड ने कहा है कि तत्काल मुख्यमन्त्री शाही को हटाना ठीक नहीं है, यह पार्टी एकता की आधार भी है । प्रचण्ड निकट स्रोत का मानना है कि नेता नेपाल ने अपने पक्षधर नेताओं को फोन कर अविश्वास प्रस्ताव रोकने के लिए कहा है । लेकिन प्रधानमन्त्री ओली ने ऐसा कुछ भी नहीं किया है । बताया जाता है कि प्रचण्ड को साइज में लाने के लिए ही प्रधानमन्त्री ओली ने यह कदम चाला है ।

