मेरी आपबीती जिसमें मैं कोरोना संक्रमित हुआ और मौत से बाहर निकला : मुरली मनोहर तिवारी (सीपू)

कोरोना और मैं तथा कोरोना को परास्त करने में सक्षम आयुर्वेद
हिमालिनी अंक अक्टूबर 2020 | वैश्विक महामारी बन चुके कोरोना के कहर से पूरी दुनिया जूझ रही है । इन सबके बीच कई ऐसे किस्से भी सुनने को मिल जाते हैं जिससे इस खतरनाक वायरस के संक्रमण से जूझ रहे लोगों के अंदर लड़ने की हिम्मत बढ़ती है । आज मैं आपबीती सुनाने जा रहा हैं जिसमें मैं खुद कोरोना संक्रमित हुआ और मौत के मुँह से बाहर निकला ।
गले में खराश से शुरू हुआ सिलसिलाः– जब बीरगंज में संक्रमण की दर सबसे तेज थी तब मुझे गले में खराश का अहसास हुआ, मैं पान और गुटका खाता था इसलिए लगा की यह गुटका के कारण है । फिर भी यह जानने के लिए कि कहीं संक्रमण तो नहीं हो गया, कोरोना होने के सभी लक्षणों के बारे में जानना शुरू कर दिया । खांसी या बुखार जैसे कोई लक्षण नहीं थे । गले का इलाज करने के लिए गर्म पानी, ग्रीन टी और कुछ आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन करना शुरू कर दिया । उस समय तक गले में सर्दी जैसी ही खराश थी । मुझे डर था कि परिवार के सदस्य भी इस बीमारी से संक्रमित न हो जाएं ।
मै खुद के संक्रमित होने के अहसास से डरा हुआ था, पिछले २ महीनों से घर से बाहर बहुत कम निकला था । यह भी सोचा कि क्या किसी ऐसी वस्तु को छुआ है जिसपर कोरोना के वायरस चिपके हों ? इसका जवाब भी नकारात्मक था । क्योंकि जो भी सामान घर लाया जाता था उसे बाहर २÷३ दिनों के लिए छोड़ दिया जाता था । बाद में उसे कीटाणुरहित करने के बाद ग्लव्स पहनकर ही घर में लाया जाता था ।
मैंने शुरुआती दिनों में ही सभी आवश्यक वस्तुओं का स्टाक अपने घर में कर लिया था, क्योंकि मुझे अंदेशा था कि महामारी का प्रकोप बढ़ने पर इनकी कमी हो सकती है । हुआ भी ऐसा ही, वायरस के संक्रमण के कारण बंद की घोषणा कर दी गई ।
इसके बाद भी मुझे महसूस हुआ कि कहीं न कहीं कुछ तो गलत है । गले में खराश बढ़ती जा रही थी जिसके बाद डाक्टर से मिलकर जांच कराने का फैसला किया । अगली सुबह एक डाक्टर से समय लेकर विडियो काल के जरिए बात किया । डाक्टर को बताया कि मेरे गले में खराश है ।
- इसके बाद डाक्टर ने कुछ सवाल किए कि क्या आप बाहर गए थे ?
- आप ऐसा कब से महसूस कर रहे हैं ? क्या आप को बुखार है ?
- क्या आपको कोई थकान महसूस हो रही है ?
इसके बाद डाक्टर ने कहा कि यह मौसमी सर्दी हो सकती है । थोड़े दिनों में आप सही हो जाएंगे । हालांकि मै इससे भी संतुष्ट नहीं हुआ । डाक्टर से पूछा कि क्या वह कोरोना वायरस का टेस्ट करवा सकते है ? डाक्टर ने कहा कि आपको संक्रमण का कोई लक्षण नहीं है लेकिन फिर भी अगर आपको संदेह है, तो इसका परीक्षण करवाएं और उस विचार को स्थायी रूप से दूर कर लें । इसी बीच गले की तकलीफ बढ़ती गई, फिर खाने का स्वाद और सुगंध का एहसास होने बंद हो गया । सांस लेने में दिक्कत होने लगी ।
पाजिटिव आई रिपोर्टः– अगले ही दिन एक टेस्ट कराया, मुँह और नाक में एक सीक डालकर नमूने लिए गए । जिसके बाद कहा गया कि इसका परिणाम ७२ घंटे बाद आएगा । मैं वापस अपने घर आ गया लेकिन अगले ७२ घंटे बड़े मुश्किल रहे । सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, मैंने खÞुद को अस्पताल ले जाने की कोशिश की लेकिन कोई भी अस्पताल बिना रिपोर्ट आए देखने को तैयार नही थी । मुझे लगा अगले ७२घंटे जब तक रिपोर्ट आएगी तब तक मेरी मृत्यु हो जाएगी ।
बड़ी मुश्किल के ७२ घंटे निकाले, रिपोर्ट पोजिटिव आया । इस समय तक मेरी हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि मैं बिस्तर से उठने में भी असमर्थ था । घर मे मेरी पत्नी और ६ साल का बेटा था, वे मेरा ख्याल रख रहे थे, डर लग रहा था कि कहीं उन्हें भी कोरोना न हो गया हो । खÞैर, जब रिपोर्ट आई अस्पताल जाने के लिए कोई भी एम्बुलेंस नहीं मिल रहा था, सुबह ८ बजे से इंतजार करते करते दोपहर हो गई, कोई एम्बुलेंस वाला ले जाने को तैयार नही हुआ । ऐसे हालात थे कि अब प्राण निकला ही निकला ।
जब कही से भी एम्बुलेंस नही मिला, तो मैंने तय किया कि बिस्तर पर मरने से बेहतर है, आखिरी कोशिश करू । मैं अपने शरीर की पूरी शक्ति इकट्ठा करके उठा और लड़खड़ाते हुए अपने मोटरसाइकिल तक पहुंचा और खÞुद ही मोटरसाइकिल चलाते हुए जैसे तैसे गंडक होस्पिटल पहुंचा । गंडक होस्पिटल पंहुचने के बाद उसके पहले तल्ले पर जाना था, लेकिन मुझे सांस लेने में इतनी दिक्कत थी कि वहाँ तक जाना नामुमकिन सा लग रहा था । गंडक अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मी बहुत सहयोगी थे, एक स्वास्थ्यकर्मी मुझे व्हीलचेयर पर बैठा कर ऊपरी तल्ले पर पहुंचाया ।
अस्पताल पहुचने के बाद इलाज शुरू हो गया । वहाँ के स्वास्थ्यकर्मी की दिनचर्या बहुत कठिन थी, जब भी किसी को दवा देनी होती थी तो सुरक्षा के तहत पूरा पीपीई किट पहन कर आना पड़ता था, गर्मी के कारण उनके शरीर से पानी बहता रहता था, वे जल्दी जल्दी दवा करके वापस जाते थे और खÞुद को सेनेटाइज करके कपड़े बदलते थे । स्वास्थ्यकर्मी के जाने के बाद अगर किसी मरीज की तबीयत बिगड़ती तो उन्हें दुबारा पीपीई किट पहन कर आने में कुछ समय लगता था, इसी समय मे मरीज के जान जाने का खतरा सबसे अधिक था । जो भी हो उस समय यही स्वास्थ्यकर्मी भगवान का रूप धारण किए हुए थे जो अपने जान का बाजी लगाकर हमलोगों का जीवन बचा रहे थे ।
अस्पताल में बीरगंज महानगरपालिका के तरफ से खाना मिलता था, बहुत ज्यादा मरीज होने के वावजूद खाना अच्छा और गुणवत्तायुक्त मिलता था । अस्पताल के बेड पर सोचता था, जिस समय बीरगंज महानगरपालिका के मेयर बिजय सरावगी कोरोना अस्पताल के लिए प्रयास कर रहे थे तो कितना विरोध हो रहा था, आइसोलेशन और कÞवारेन्टीन बनवाने के समय विभिन्न नेता के साथ स्थानीय लोगो ने भी विरोध किया । राहत सामग्री वितरण के समय राजनीतिकरण किया गया । कोरोना जांच के लिए पीसीआर मशीन और किट खरीदने के लिए चंदा सहयोग मांगने पर भी टीका टिप्पणी किया गया लेकिन अगर बीरगंज में कोरोना अस्पताल नही बना होता तो कितनी जाने जाती ।
अस्पताल में मेरा इलाज शुरू हो गया । मुझे और मेरे परिवार को वैद्य निरक्षक धीरेन्द्र सिंह ने आयुर्वेदिक काढ़ा और दवा दिया जो मुझे जल्दी ठीक होने में असरदार रहा । इन्ही दवाओं के कारण मेरे घर के लोगो का रिपोर्ट निगेटिव आया ।
बीरगंज में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में नारायणी अस्पताल के तत्कालीन मे.सु.डा. मदन उपाध्याय, वर्तमान मे.सु. डा. संजय ठाकुर, डा. उदय नारायण सिंह, डा. नीरज सिंह, जयमोद ठाकुर, वैद्य निरक्षक धीरेन्द्र सिंह और इनलोगों टीम, सफाईकर्मी की जितनी सराहना की जाए कम है । मैं डा. नीरज सिंह से फोन संपर्क द्वारा जुड़ा हुआ था, उन्होंने अत्यधिक सहयोग और हौसलाअफजाई किया ।
अस्पताल में १४ दिन रहने के बाद मेरा रिपोर्ट निगेटिव आया और मैं सकुशल घर वापस आ गया । जब कोरोना संक्रमण का दौर समाप्त हो जाएगा तब भी बीरगंज इन डाक्टरों के सहयोग और कर्तव्यनिष्ठा को याद करेगा ।
कोरोना को परास्त करने में सक्षम आयुर्वेद

जिस कोरोना का इलाज अभी तक पूरी दुनिया नहीं खोज पाई है वह आयुर्वेदिक काढ़े से परास्त हो रहा है । जिन्होंने काढ़ा पी लिया, उन्हें कोराना वायरस बीमार नहीं कर पा रहा है । उधर, जो बीमार हैं वह भी जल्दी स्वस्थ हो रहे हैं ।
यह दावा पर्सा के जानकीटोला आयुर्वेद औषधालय के वैद्य निरीक्षक और नेपाल आयुर्वेद स्वास्थ्यकर्मी के केन्द्रीय सचिव धीरेंद्र कुमार सिंह का है ।
उनके तरफ से अस्पतालों व क्वारंटाइन सेंटरों में यह काढ़ा संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों और पॉजिटिव मरीजों को क्लीनिकल ट्रायल के तौर पर निशुल्क दिया गया । कई तरह की दवाओं के मिश्रण से यह काढ़ा तैयार किया जाता है । उनका कहना है कि इससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है । इसके अच्छे नतीजे सामने आ रहे हैं ।
वैद्य निरीक्षक धीरेंद्र कुमार सिंह ने ६०० पीडि़तों को मुफ्त आयुर्वेदिक दवा दी । जिन लोगों को क्वारंटाइन किया गया था । यह सभी संक्रमित के सीधे संपर्क में आए थे और हाई रिस्क में थे । काढ़ा पीने वाले लोगों में एक भी पाजिटिव नहीं आया । कई तो ऐसे हैं जो पाजिटिव आने के १० दिन के भीतर ही नेगेटिव हो गए ।
कोरोना नियंत्रण और रोकथाम के लिए पर्सा के ग्रामीण क्षेत्र में संचालित जानकीटोला आयुर्वेद औषधालय से आयुर्वेदिक दवा की मांग और उपयोग में भी वृद्धि हुई है । स्व संक्रमित लोगों की प्रतिक्रिया है कि इस मिश्रण के सेवन से अतिरिक्त ऊर्जा प्राप्त होती है ।
सकारात्मक सोच, उच्च मनोबल स्वस्थ भोजन खाने, योग र व्यायाम करने और कोभिड( १९ बिरुद्ध आयुर्वेद तथा बैकल्पिक चिकित्सा विभागद्वारा जारी किया गया निर्देशिका अनुसार आयुर्वेद की दवा का उपयोग करने से कोई अन्य दुष्प्रभाव नहीं होता है । वैद्य धीरेंद्र कुमार सिंह हर दिन घंटों बिताते हैं, गिलोय, तुलसी, आंवला, मिर्च, दाल चीनी और १५ अन्य आयुर्वेदिक जड़ी–बूटियों के मिश्रण से बना आयुर्वेदिक काढ़ा बनाते हैं और इसे पर्सा में निशुल्क वितरित करते हैं । कई लोग कहते हैं कि पर्सा में समुदाय में कोरोना को नियंत्रित करने के लिए आयुर्वेदिक औषधि ने रामबाण का काम किया है ।
निरीक्षक धीरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि आइसोलेशन में बिताए गए समय में विभिन्न स्थानों पर इस तरह की दवाई अच्छी सेहत और लंबी उम्र के लिए उपयोगी है । जगन्नाथपुर ग्राम स्वास्थ्य शाखा के प्रमुख, प्रमेंद्र प्रसाद साह ने अनुभव किया है कि कुछ संक्रमित लोग जो कोरोना संक्रमित है, उन्हें इस संयोजन की सेवाओं से अच्छा लाभ मिला है । उन्होंने कहा कि उनमें से कई का इलाज करते हुए संक्रमित होने के बाद उन्होंने नियमित रूप से आयुर्वेदिक दवा ली । संक्रमित स्वास्थ्यकर्मी आमोद साह, बैरिया क्वारंटाइन इंचार्ज हरेराम साह, रौतहट अस्पताल के कर्मचारी कपिलदेव झा सभी ने आयुवेर्दिक काढ़े का लाभ बताया ।
यह देखा गया कि पर्सा के बाहुदरमई नगर पालिका के अंतर्गत अधिकांश क्षेत्रों में आयुर्वेदिक चिकित्सा का अधिक उपयोग किया जा रहा है । बैरिया हेल्थ पोस्ट के प्रभारी हरे राम प्रसाद का कहना है कि मरीजों के बीच आयुर्वेदिक दवाइयां भी मांग में हैं । वे कहते हैं कि स्वस्थ भोजन के साथ आयुर्वेदिक चिकित्सा के संयोजन की मांग रोगियों द्वारा स्वयं की जाती है ।
इस बीच, स्थानीय लोगो ने बताया कि आयुर्वेदिक चिकित्सा ने बहुत मदद की है । जगरनाथपुर ग्राम के प्रमुख जालिम मिया, पोखरिया नगर पालिका के उप प्रमुख सलमा खातुन और बहूदरमाई नगरपालिका के मेयर नितेंद्र साह, कॉंग्रेस नेता अजय चौरसिया, तात्कालीन सहायक सीडीओ ने कहा कि उनके क्षेत्र में आयुर्वेदिक दवा का उपयोग बहुत फायदेमंद रहा है ।
वर्तमान में, पर्सा में कोरोना का प्रभाव कम है । कई लोगों का मानना है कि इस प्रकार की दवा का स्वास्थ्य, व्यायाम और उपयोग करने से कोई अन्य दुष्प्रभाव नहीं होता है । हमारे समाज में जहां आयुर्वेदिक चिकित्सा का प्रसार बहुत कम है, जिस तरह नदी को पार करने के बाद छड़ी को भूलने की आदत में सुधार करना आवश्यक है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोरोना की रोकथाम और नियंत्रण में अमूल्य भूमिका निभाने वाले धीरेंद्र कुमार सिंह की भूमिका प्रकाश में नहीं आई है ।
कोरोना वायरस का खतरा अभी कम नहीं हुआ है और संक्रमण के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं और पूरे नेपाल में अब ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं । इस वायरस से बचने के लिए डॉक्टरों के द्वारा तरह–तरह की इलाज प्रक्रिया के बारे में भी बताया जा रहा है जो प्रभावी रूप से मददगार भी साबित हो रहे हैं । कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद भी घर इलाज करके ही इस वायरस के संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं ।
वैद्य निरीक्षक धीरेंद्र कुमार सिंह के द्वारा कुछ आयुर्वेदिक इम्युनिटी बूस्टर टिप्स के बारे में बताया गया है जो कोरोना वायरस को खत्म करने में प्रभावी रूप से मददगार साबित हो सकती है । जो लोग संक्रमण से ग्रसित नहीं हैं और अपनी इम्युनिटी को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं तो उन्हें इन सुझावों को जरूर अपनाना चाहिए ।
आयुर्वेदिक तरीकों से मजबूत होगी इम्युनिटीः– वैद्य निरीक्षक धीरेंद्र कुमार सिंह इस बारे में जानकारी देते हुए बताते हैं कि आयुर्वेद में ऐसे कई तरीके हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने के लिए प्रभावी रूप से मददगार साबित हो सकते हैं । यही वजह है कि कोरोना वायरस से बचे रहने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में भी आयुर्वेद काफी मददगार साबित हो सकता है ।
वैद्य निरीक्षक धीरेंद्र कुमार सिंह अपने अनुभव के आधार पर इस बारे में विशेष जानकारी दी है, आइए इसके बारे में आपको पूरी जानकारी देते हैंः–
कोविड से बचने के लिए सबसे पहले हमें गर्म पानी पीने की आदत डालनी होगी । स्टोव पर स्टील के कंटेनर में पीने के पानी को अच्छी तरह से उबालें । अंत में, चार या पांच पेपरमिंट के पत्ते, एक छोटा अदरक का टुकड़ा और लौंग डालें और इसे ३–४ मिनट तक उबलने दें । सुबह में एक बार इस पानी के मिश्रण को तैयार करें और इसका सेवन करें । पूरे दिन साधारण पानी पीने के बजाय इस पानी को पीने के लिए इस्तेमाल करें ।
(नोटः– मलद्वार के बिमारी वाले इसका सेवन न करें, आयुर्वेद स्वास्थ्य कर्मी और चिकित्सक के सलाह सुझाव मे लें)
आयुर्वेद में तुलसी के पौधे का प्रत्येक भाग का उपयोग सेहतमंद बने रहने के लिए किया जाता है । रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने के लिए यह निम्न प्रकार से कारगर साबित होगी । लगभग एक लीटर पानी में तुलसी के पत्ते को अच्छी तरह उबाल लें । तुलसी के पत्तों को तब तक उबालें, जब तक एक लीटर पानी, एक चौथाई न हो जाए । अब एक चौथाई पानी के बचे होने पर द्ध(ट दाने काली मिर्च, थोड़ा सा गुड़ और एक चम्मच नींबू रस डालकर इसे तैयार किया जा सकता है । इसे हर्बल चाय के रूप में आप दिन में एक या दो बार भी पी सकते हैं । बुखार के लक्षणों की शुरुआत में केवल कुछ दिनों के लिए इसका सेवन कर सकते हैं ।
सर्दी, खांसी होने पर क्या करें ?ः– कोरोना वायरस के प्रमुख लक्षणों में देखा जाए तो सर्दी, खांसी भी शामिल है । ऐसी स्थिति में इस आयुर्वेदिक टिप्स को अपनाकर फायदा देखा जा सकता है । इसके लिए आपको अदरक के कटे हुए छोटे हुए टुकड़े, ज्ञरद्द चम्मच जीरा, ज्ञरद्द चम्मच हल्दी और एक चम्मच नींबू रस को एक कप पानी में मिलाकर इसका सेवन करना है । सर्दी, खांसी से पीडित लोगों में इस आयुर्वेदिक ड्रिंक का फायदा बड़ी तेजी से देखने को मिलेगा । यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती है और कोरोना वायरस के इस लक्षण को भी ठीक करने के काम आ सकती है ।
छोटे बच्चों का भी रखें विशेष ध्यानः– कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ रहे मामले को देखते हुए जरूरी नहीं है कि यह केवल बड़ों और युवाओं पर ही असर दिखाएगा बल्कि घर में रहने वाले छोटे बच्चे भी इसकी चपेट में आ सकते हैं । इसलिए घर में रहने वाले छोटे बच्चों का भी विशेष ध्यान रखें । अप्राकृतिक खानपान रहनसहन से बचे और बचाऐं ।
बुजुर्गों का रखें विशेष ध्यानः– कोरोना वायरस की चपेट से बुजुर्गों को बचाए रखना बहुत जरूरी है । खासकर अगर आपके घर में डायबिटीज और ब्लड प्रेशर से जुड़ी हुई समस्याओं से ग्रसित बुजुर्ग हैं तो उनकी इम्युनिटी बढ़ाने के लिए ऊपर बताई गई टिप्स को जरूर फालो करें । उन्हें नियमित रूप से योग और एक्सरसाइज करने के लिए भी कहें ताकि उनकी इम्युनिटी इस तरह से भी मजबूत की जा सके । इन टिप्स को फालो करके आप रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में भी सफल रहेंगे और कोरोना वायरस का खतरा भी कम होगा ।
लंच के बाद न सोएंः– लंच के बाद सोने की आदत अगर आपको भी है तो यह आपकी सेहत के लिए बहुत ही नुकसानदायक साबित हो सकता है । लंच करने के तुरंत बाद सोने के कारण पाचन क्रिया ठीक तरीके से ना होने पर आपके शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी नहीं मिलेंगे । यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी कमजोर बना सकता है । इस कारण आप कोरोना वायरस की चपेट में आने के साथ साथ अन्य बीमारियों से भी ग्रसित हो सकते हैं । इसलिए दोपहर में सोने की आदत को पूरी तरह छोड़ दें ।

