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कोरोना परीक्षण निःशुल्क करने के लिए सर्वोच्च ने फिर दिया सरकार को आदेश

 

काठमांडू, ५ नवम्बर । सर्वोच्च अदालत ने कोरोना वायरस परीक्षण निःशुल्क बनाने के लिए पुनः सरकार को आदेश दिया है । इससे पहले जारी आदेश के विरुद्ध स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मन्त्रालय ने सर्वोच्च में परमादेश पुनरावलोकन के लिए निवेदन पंजीकृत किया था ।
बिहीबार सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश हरिकृष्ण कार्की, सपना मल्ल प्रधान और पुरुषोत्तम भण्डारी के पूर्ण इजलास ने सरकारी पुनरावलोकन निवेदन को खारीज करते हुए इससे पहले (आश्वीन १५ गते) सर्वोच्च अदालत द्वारा जारी परमादेश को ही कार्यान्वयन के लिए कहा है । सर्वोच्च द्वारा जारी आदेश के अनुसार कोरोना वायरस (कोभीड–१९) परीक्षण में सरकार की ओर से जो शुल्क लिया जा रहा है, वह अवैध साबित हो गया है ।
स्मरणीय है, गत आश्वीन १५ गते सर्वोच्च अदालत ने फैसला किया था कि निजी तथा सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं की ओर से कोरोना परीक्षण के नाम में जो शुल्क लिया जा रहा है, वह कानून विपरित है । उस दिन सर्वोच्च ने सरकार को यह भी कहा था कि कोरोना परीक्षण निःशुल्क किया जाए । सर्वोच्च द्वारा जारी परमादेश के विरुद्ध कार्तिक १७ गते स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मन्त्रालय के सचिव लक्ष्मण अर्याल ने महान्यायाधिवक्ता की कार्यालय से परमादेश पुनरावलोकन के लिए सर्वोच्च में निवेदन पंजीकृत किया था । सर्वोच्च द्वारा आज जारी आदेश के अनुसार अब सरकार को कोरोना परीक्षण निःशुल्क करना होगा ।

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