सुनो दिसंबर तुम अब जाने को हो …. बहुत सताया तुमने : संध्या चतुर्वेदी
सुनो दिसंबर तुम अब जाने को हो। इस साल सब को बहुत सताया तुमने। मौत के खौफ से बहुत रुलाया तुमने। साल के आरंभ होते ही जिंदगी जैसे थम गई थी। मार्च आते ही सड़क से ले कर हवाई यात्रा भी रुक गई थी। कोरोना ने दस्तक देनी शुरू ही कि थी भारत में और गाँव से ले कर महानगरों को भी रोक दिया था। मजदूर मजबूरी में सड़कों पर पैदल ही चल पड़ा था। प्रसव पीड़ा को दरकार कर औरत ने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दिया था। शायद ही कोई ऐसा होगा जिस को ये वर्ष खुशनुमा लगा होगा। हर बच्चा कोरोना के कहर से डरा और सहमा होगा । पर वर्ष अंत तक आते आते तुमने मौत से ज्यादा जीवन का मूल सीखा दिया। आज भी कोरोना महामारी है। पर कितनों ने इसे मात दे मौत की बाजी मारी है। वर्ष दिसम्बर 2020 तुम जाते जाते इस महामारी को भी अपने साथ ले जाना और 2021 में ऊर्जा और स्फूर्ति से जीवन वापिस दे जाना। मास्क और सेनिटाइजर की आदत को अब सबने आने जीवन में शामिल कर लिया है। सोशल डेस्टिनेशन को थोड़ा सा कम कर देना। बहुत टूट जाता है मानव जब अकेला पड़ जाता है। मौत से पहले अकेलेपन का डर सताता है। सुनो दिसंबर तुम जाते जाते खुशहाली दे जाना।

मथुरा, उप, India
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