ज़ख़्म जितने हैं दिल को दिया कीजिए ( गजल ) : अंजु दास गीतांजलि
ग़ज़ल आप मेरी सिफारिश किया कीजिए नाम महफ़िल में मेरा लिया कीजिए। आप चाहें तो राहों में मिलकर मुझे ज़ख़्म जितने हैं दिल को दिया कीजिए। साथ तन्हाइयाँ जो चली आपकी छुप के ऐसे न आँसू पिया कीजिए। हमको रुसवाइयों ने किया दर -ब -दर चाक दामन ये मेरा सिया कीजिए। जिससे बदनामियाँ साथ मिलकर चले काम ऐसा न कोई किया कीजिए।

बिहार ।

