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अफगानिस्तान, भारत तथा बांग्लादेश में प्रतिबंधित कौमार्य परीक्षण पाकिस्तान में भी प्रतिबंधित

 

कराची, न्यूयार्क टाइम्स।

पाकिस्तान में लाहौर हाई कोर्ट ने पंजाब प्रांत में दुष्कर्म पीडि़तों के कौमार्य परिक्षण पर प्रतिबंध लगा दिया है। दुष्कर्म पीडि़तों का कौमार्य परीक्षण महिला की तथाकथित विश्वसनीयता की जांच के लिए किया जाता है। इसमें ‘दो उंगलियों वाला टेस्ट’ भी शामिल है। कौमार्य परीक्षण के आलोचकों ने इसे प्रतिबंधित करवाने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दी थी।

कौमार्य परीक्षण को अवैध बताते हुए हाई कोर्ट जज जस्टिस आयशा मलिक ने कहा यह एक अपमानजनक प्रथा है, जिसका इस्तेमाल पीडि़ता पर संदेह करने के लिए किया जाता है। इससे पीडि़ता की व्यक्तिगत मर्यादा को चोट पहुंचती है और इस वजह से यह जीने के अधिकार और मर्यादा के अधिकार के खिलाफ है।

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इस तरह के परीक्षण के पैरोकार दावा करते हैं कि इससे महिला की यौन गतिविधियों के इतिहास का पता लगाया जा सकता है। इस तरह के नतीजों का इस्तेमाल अक्सर दुष्कर्म पीडि़तों को बदनाम करने के लिए किया जाता है।

मालूम हो कि यह परीक्षण अफगानिस्तान, भारत तथा बांग्लादेश में प्रतिबंधित है। लेकिन पाकिस्तान समेत कई देशों में जारी है।

इस मामले में याचिका दायर करने वाले वकीलों ने एक बयान जारी कर कहा कि यह फैसला तहकीकात संबंधी और न्यायिक प्रक्रियाओं को सुधारने और उन्हें यौन हमले और दुष्कर्म पीडि़तों के प्रति और न्यायपूर्ण बनाने की दिशा में एक अति आवश्यक कदम है।

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कोर्ट के फैसले से पंजाब प्रांत में हर तरह का कौमार्य परीक्षण प्रतिबंधित हो गया है और यह पाकिस्तान में इस तरह का पहला आदेश है।

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