दिल में तो है बस इस बात का गौरव, शान है बरकरार अपनी मातृभाषा पर : लालिमा
१
बस थोड़ा इंतजार
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तलाश है एक अच्छे समय की
शुभ मुहूर्त का है सबको इंतजार
प्रतीक्षारत दिख रहे हैं अब भी सब
उत्सुक नयन तो यूं ही निहार रहा पथ
ये परिस्थिति असहनीय प्रतीत होती
जीवन की गति पड़ गई है कुछ धीमी
थम सी गई हैं घड़ियां, महसूस हो रही
आंच अब ना आए,बस बनी रहे प्रीति
व्यस्त जिंदगानी सबको लगती प्यारी
थोड़ी मुस्कुराहट अब होंठों पे दिख रही
है कामना ईश्वर से मिले मन में शक्ति
लौटी फिर से खुशियां वो पहले जैसी।
२
गूंजती श्रेष्ठतम हिंदी
चोटी हिमालय की, लग रही पुकारती
हिंदुस्तान में गूंजती, बस अपनी हिंदी
दिल में तो है बस ,इस बात का गौरव
शान है बरकरार अपनी मातृभाषा पर
मरते दम तक तो ,इसे बोलेंगे श्रेष्ठतम
शीश उठाकर चलेंगे साथ साथ हम
कलम हाथ में आने पर रुकना नहीं हमें
धार तलवार सी है, सच अपनी हिंदी में
भरपूर है इसमें तो शब्दों का खजाना
गोते लगाकर केवल, बस हमें है ढूंढना
प्रयत्न करे जो भी, व्यर्थ न जाए कोई
हिंदुस्तान के रंग में रंगीन हो हर कोई
लालिमा घोष


