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प्रेम में तेरे हाँ प्रेम में तेरे : निशा अग्रवाल

 

प्रेम में तेरे

विकल प्राण हैं, मन है प्यासा
अधर सुधामृत बस एक आशा
बरसे सावन, घनघोर धटाएँ
हर पल पी की याद दिलाए
भीग गयी है सारी वसुधा
आह्लादित कण कण है भू का
झुला डाले आम की बगिया
पिय संग डोले सारी सखियाँ
मै विरहा की मारी कान्हा
चित लागे ना कहु ओर
निरखूं लता तरू से लिपटी
डाह उठे मोरे तन जोर
जाने कितने सावन बीत गए
आए तुम ना कोई संदेशा
अब धीर धरा नही जावे
अगले सावन न मिलूँ अंदेशा
आ जाओ तुम मेरे सांवरिया
रख अधरों पे बैरन बांसुरिया
नैन न मूंदू तेरा पंथ निहारूं
प्रेम में तेरे गुजरी भी बावरिया
प्रेम में तेरे हाँ प्रेम में तेरे
निशा अग्रवाल
धरान

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