Sun. Jun 7th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

जो वक़्त है, वही तो उम्र है : गोलोक विहारी राय

 

झाँकती है सफेदी बालों से
छुपाने लगा हूँ उन्हें काली मेंहदी से
धुँधलाने लगे हैं शब्द पढ़ने पे
चश्मा लग चुका है नजरों का
भूलता हूँ बहुत लोग कहते हैं
अब टालता हूँ उलाहना औरों का
जब लकीरें पड़ती है माथे पर
तब कुछ ज़्यादा ही मुस्करा देता हूँ
अल्हड़ चंचल मन जिसे
समझाने लगा हूँ मैं…
जो वक़्त है, वही तो उम्र है

hair loss

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *