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म्यांमार में कर्फ्यू को तोड़ते हुए सामूहिक विरोध प्रदर्शन,अब तक 67 लोगों की मौत

 

यांगून, एपी।

म्यांमार के सबसे बड़े शहर में प्रदर्शनकारी सोमवार रात 8 बजे कर्फ्यू को तोड़ते हुए सामूहिक विरोध प्रदर्शन के लिए बाहर आए। उनके द्वारा एक पड़ोस के एक छोटे से क्षेत्र में सुरक्षा बलों द्वारा कैद में लिए गए 200 छात्रों को छोड़ने की मांग की गई। छात्रों और अन्य नागरिकों ने पहले पिछले महीने सैन्य कब्जे के खिलाफ देश भर में कई विरोध प्रदर्शनों किए, जिसमें आंग सान सू की की चुनी हुई सरकार को सेना ने खत्म कर दिया और आंग सान सू समेत कई नेताओं को गिरफ्त में ले लिया।

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वहीं, सैन्य सरकार ने मीडिया कवरेज पर भी एक बड़ा अंकुश लगाया है। घोषणा की गई कि पांच स्थानीय मीडिया आउटलेट्स – मजिमा, डीवीबी, खिट थिट मीडिया, म्यांमार नाउ और 7 डी न्यूज़ के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। राज्य प्रसारक एमआरटीवी पर कहा, ‘इन मीडिया कंपनियों को अब किसी भी तरह के मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके या किसी भी मीडिया प्रौद्योगिकी का उपयोग करके प्रसारित करने या लिखने या जानकारी देने की अनुमति नहीं है।’

सभी पांचों आउटलेट्स विरोध प्रदर्शन की व्यापक कवरेज में शामिल थे। अक्सर लाइव स्ट्रीमिंग वीडियो ऑनलाइन की जाती थी। लाइसेंस रद्द करने से पहले सोमवार को अधिकारियों द्वारा म्यांमार के कार्यालयों पर छापा मारा गया था। सरकार ने तख्तापलट के बाद से दर्जनों पत्रकारों को हिरासत में लिया है, जिसमें एक म्यांमार नाउ रिपोर्टर और द एसोसिएटेड प्रेस के दीन ज़ॉ शामिल हैं, दोनों पर एक सार्वजनिक आदेश कानून के तहत आरोप लगाया गया है, जिसमें तीन साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है।

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वहीं, लोगों को कैद में लेने की खबर दुनिया भर पर म्यांमार की सेना पर कार्रवाई का दवाब बना रही है। संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और यूरोपीय संघ के राजनयिक मिशनों ने सभी जारी बयान में सुरक्षा बलों से कैद में लिए लोगों को अपने घरों में सुरक्षित लौटाने का आग्रह किया।

बता दें कि म्यांमार में 1 फरवरी को हुए सैन्य तख्तापलट के खिलाफ देश की सड़कों पर बड़ी संख्या में प्रदर्शन जारी है। सेना और पुलिस प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लगातार ताकत का प्रयोग कर रही है। यहां तक की सड़कों पर मौजूद लोगों पर सीधा गोली चला दी जा रही है। अब तक देश में 67 लोगों की मौत हो चुकी है।

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