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कोरोना से पूरे बचाव के लिए टीके की तीसरी खुराक लेना भी जरूरी

 

कोरोना से पूरे बचाव के लिए टीके की तीसरी खुराक लेना भी जरूरी हो सकता है। इसे बूस्टर डोज नाम दिया गया है जो शरीर में एंटीबॉडी की मात्रा कई गुना तक बढ़ा सकती है। इससे लंबे समय तक शरीर में एंटीबॉडी कम नहीं होगी।

दूसरी डोज के 6 माह बाद लगेगा तीसरा टीका, अध्ययन के परिणाम मिलने के बाद होगा फैसला
केंद्र की विशेषज्ञ समिति ने बूस्टर डोज के क्लीनिकल ट्रायल के लिए मंजूरी दे दी है। हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक के वैज्ञानिकों ने अध्ययन शुरू कर दिया है। अभी 28 दिन के अंतराल पर कोवाक्सिन के दो डोज लेने के बाद ही वैक्सीन कोर्स पूरा हो सकता है लेकिन कुछ अध्ययन में दावा किया जा चुका है कि तीन से छह माह तक ही एंटीबॉडी रहती हैं। ऐसे में लंबे समय तक एंटीबॉडी के लिए बूस्टर डोज भी होना चाहिए। समिति के एक सदस्य ने बताया कि दो डोज के छह माह बाद बूस्टर डोज लगाया जा सकता है।

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भारत बायोटेक को परीक्षण में शामिल लोगों का छह माह तक फॉलोअप लेने के लिए भी कहा गया है। अध्ययन सकारात्मक रहा तो आगामी दिनों में बूस्टर डोज भी उपलब्ध कराया जा सकता है। समिति के सदस्यों का कहना है कि बूस्टर डोज अलग नहीं है लेकिन तीसरे डोज के साथ एंटीबॉडी बूस्ट हो सकती है।

बैठक के दस्तावेजों के मुताबिक, बूस्टर डोज के बाद वायरस के वैरिएंट्स भी शरीर पर हावी नहीं हो सकेंगे। संक्रमण के बाद एंटीबॉडी कुछ सप्ताह तक रहती हैं। बूस्टर डोज लगने के बाद यह कई साल तक वायरस से बचाव कर सकती है। भारत बायोटेक के अनुसार, महामारी का यह समय कब तक ऐसा रहेगा? इसके बारे में कोई नहीं जानता है। ऐसे में जरूरी है कि हम भविष्य को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में ही अपने प्रयासों को बढ़ाएं।

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