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ग्राहक के रूप में महिलाएं कितनी सफल !

 


वीरेन्द्र बहादुर सिंह, नोएडा। एक ग्राहक के रूप में महिलाओं में बड़ा धैर्य होता है। बहुत ही कम महिलाएं खरीदारी में उतावल दिखाती हैं। ऐसी तमाम महिलाएं हैं, जो दुकानदार के धैर्य को परखती हैं। जो सेल्स पर्सन धैर्य न रखता हो, वह महिला ग्राहक को गंवा देता है। अगर यह कहा जाए कि महिलाएं और शाॅपिग एकदूसरे का पर्याय हैं तो जरा भी गलत नहीं होगा। शाॅपिग की बात आते ही महिलाओं का मन मयूर नाच उठता है। चिंतक भले की कहते हों कि पैसे से खुशी खरीदी नहीं जा सकती, परंतु शाॅपिग द्वारा खुश होती महिलाओं को देख कर यह बात गलत लगती है। खानेपीने की चीजों से ले कर गैजेट्स तक महिलाएं खरीदती हैं। एक अध्ययन के अनुसार घर की चीजों की खरीदारी में 85 प्रतिशत महिलाएं निर्णय लेती हैं। नए घर की खरीदारी में 75 प्रतिशत महिलाओं का हिस्सा होता है। ग्राॅसरी में लगभग 81प्रतिशत महिलाओं का प्रभुत्व है। हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू के अनुसार ग्राहक के रूप में महिलाएं दुनिया में साल का 28 ट्रिलियन डाॅलर की खरीदारी करती हैं, जो भारत और चीन के विकास के आंकड़े से अधिक है।
आज तक मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट जैसे गैजेट्स की खरीदारी पर पुरुषों का साम्राज्य था। परंतु महिलाओं की बढ़ती जा रही खरीदारीशक्ति के कारण कंपनियों को महिलाओं के मनपसंद कलर, आकार और फीचर्स एक करना पड़ा। अब महिलाओं की ग्राहक के रूप में कोई उपेक्षा नहीं कर सकता। खरीदारी में इस तरह महिलाओं का दबदबा बढ़ा है। इतना ही नहीं, वे पुरुषों की अपेक्षा अलग ही शाॅपिग स्टाइल रखती हैं। ये कस्टमर के रूप में अलग ही अकड़ रखती हैं। अभी तक यह कहा जाता था कि पुरुष वही सामान खरीदते हैं, जिसकी जरूरत होती है। जबकि महिलाएं वह सामान खरीदती हैं, जो उन्हें खरीदना होता है। लेकिन अब इसमें काफी बदलाव आ गया है। अब महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा अधिक होशियार और गंभीर ग्राहक साबित हो रही हैं। और महिलाओं का मानना है कि इनका यह प्रभुत्व इकोनाॅमी को मजबूत करता है। केरी ब्रांड शो जैसी लेखिका और अभिनेत्री शाॅपिग को महिलाओं के लिए कार्डियो से बराबरी करती हैं।
महिलाएं ग्राहक के रूप में कितना खर्च करती हैं, यह जितना मजेदार है, उतना ही मजेदार यह है कि वे ग्राहक के रूप में कैसी हैं। यह जान लेना जरूरी भी है। महिलाएं सब से अधिक कपड़ा खरीदती हैं। भारत की 25 प्रतिशत वर्किंग वुमंस के लिए कपड़े उनकी आइडेंटिटी हैं। अपनी पोजीशन के अनुसार ड्रेसिंग उनकी पहली जरूरत है। उसके बाद एक्सेसरीज और फूटवेयर आता है। पर्स, मोबाइल, वाॅच और लैपटॉप के पीछे वे भी पुरुषों की ही तरह पैसे खर्च करती हैं। इसके लिए अब मध्यमवर्गीय महिलाएं भी उतनी ही क्रेजी हैं। भारत में हर साल कपड़े और फूटवेयर के आउटलेट्स पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं के तीन गुना खुल रहे हैं। पर्सनल केयर और ब्यूटीकेयर का खर्च भी महिलाओं का अधिक है और इसके लिए महिलाएं ट्रायल एंड एरर की नीति का उपयोग करती हैं। घर का सामान और ज्वेलरी परचेजिंग पर तो महिलाओँ का दबदबा था ही, पर अब व्हीकल्स, फोन या अन्य एक्सेसरीज के मामले में भी उनकी पकड़ मजबूत हो रही है। अलमारी में जगह न हो तब भी महिलाएं खरीदारी करने से बाज नहीं आतीं।
एक समय महिलाएं खरीदारी टीवी-मूवी या आसपास की महिलाओं को देख कर करती थीं। अलबत्ता, आज भी महिला की खरीदार पर ये बातें असर डालती हैं। पर अब वे कपड़ा, ज्वेलरी और एक्सेसरीज के बारे में बहुत ही चूजी और क्रेजी हो गई हैं। ट्रेंड में हो ऐसी, परंतु यूनिक चीजों के लिए वे खासी मेहनत करती हैं। एडवरटाइजिंग, इंटरनेट सर्चिंग, सोशल मीडिया और माउथ पब्लिसिटी के आधार पर इन्हें शाॅपिग करना अच्छा लगता है। उच्च मध्यमवर्ग की महिलाएं भी अब धनी महिलाओं की तरह ब्रांड क्रेजी हो रही हैं। खास ब्रांड की शाॅपिग उनके लिए स्टेटस सिम्बल है और इस बात का गर्व उनकी बातों में छलकता भी रहता है। दूसरे अब छोटीमोटी शाॅपिग के लिए वे मात्र इन्फार्म करती हैं।
हां, महिलाओं की बार्गेनिंग की आदत अभी भी नहीं बदली है। वे सागसब्जी वाले के साथ जिस तरह किचकिच करती हैं, उतनी ही किचकिच वे साड़ी की दुकान वाले के साथ भी करती है। फिक्स रेट का बोर्ड पढ़ने के बाद या माॅल्स वगैरह में जहां बार्गेनिंग नहीं होती, यह जानते हुए भी वे एक बार तो पूछ ही लेती हैं कि कुछ डिस्काउंट वगैरह मिल सकता है या नहीं? नो एक्सचेंज की सूचना होने के बावजूद कलर-साइज में कुछ प्रॉब्लम होने पर चाहे कितना भी बड़ा शोरूम क्यों न हो, वे जा कर किचकिच करती हैं। अरे कुछ महिलाएं तो खीरा या लौकी कड़वी निकल जाए तो उसे भी सब्जी वाले को लौटा आती हैं। संक्षेप में महिलाएं जो पैसा अदा करती हैं, उसके बदले ग्राहक के रूप में पूरी तरह संतुष्ट होना चाहती हैं। वे कूपन, डिस्काउंट, सेल, एक्जबिशंस तथा फ्री ऑफर्स का पूरा उपयोग करती हैं।
अगर महिलाओं के मन में कोई चीज पहले से ही बैठ जाए तो वे उसे आंख बंद कर के खरीद लेती हैं। वे उस प्रोडक्ट के बारे में ठीक से पता भी नहीं करतीं। उसी तरह वे फूड प्रोडक्ट पर एक्सपायरी डेट देखना भूल जाती हैं। ज्यादातर महिलाएं गुणवत्ता को महत्व देती हैं। ज्वेलरी वगैरह तो एक बार में मुश्किल से ही पसंद करती हैं। उसके लिए वे चार ज्वेलरी की दुकान पर जाती हैं और भाव पूछती हैं।
महिलाएं युवा होती हैं तो अधिक शाॅपिग करती हैं। धीरे-धीरे कुछ चीजों की खरीदारी कम होती जाती है। खरीदी गई चीज कितनी भी महंगी क्यों न हो, कोई उसके लिए खराब अभिप्राय दे दे तो वे उसका उपयीग बिलकुल नहीं करतीं। ऑनलाइन शाॅपिग इस मिलेनियम महिलाओं की नई हैबिट्स है। बाहर जा कर समय खराब करने की अपेक्षा ऑनलाइन सामान खरीद लेना इन्हें बहुत आसान लगता है। पर जब रिटर्न की स्कीम होती है, तभी वे ऑनलाइन सामान खरीदती हैं। कुछ महिलाएं तो ऑफलाइन जा कर सामान के बारे में पता करती हैं। उसके बाद सस्ता लगता है, तभी वे ऑनलाइन सामान खरीदती हैं। महिलाएं सामान के पीछे बहुत पैसा खर्च करती हैं। उन्हें लगता है कि दुकानदार सामान महंगा दे रहा है तो वे सस्ता सामान खरीदने के चक्कर में उससे ज्यादा का पेट्रोल जला देंगी, पर दुकानदार को अधिक पैसे नहीं देंगीं।
कंप्यूटर, मोबाइल, आदि खरीदने के लिए रूल-रेगुलेशन फिक्स होता है, फिर भी कोई समस्या आती है तो पुरुष तो तेजी से बातचीत कर के तुरंत समस्या खत्म कर देते हैं।
जबकि महिला ग्राहक समस्या के मूल तक जाती हैं। सेल्समेन, कस्टमर केयर, मैनेजर या ऑनर तक किचकिच करती हैं। महिलाएं इसलिए ऐसा करती हैं, क्योंकि वे घर चलाती हैं। बच्चे, बड़े और खुद की शाॅपिग महिलाएं ही करती हैं। इसका बड़ा इफेक्ट है। उन्हें तमाम चीजें खरीदनी होती हैं, महिलाएं ग्राहक के रूप में महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि-
0 83 प्रतिशत चीजें महिलाएं ही खरीदने आती हैं।
0 75 प्रतिशत महिलाएं प्राइमरी कस्टमर हैं।
0 महिलाएं वर्क फोर्स में बढ़ती जा रही है। इससे इनका परचेजिंग पावर भी बढ़ा है।
0 58 प्रतिशत महिलाएं सोशल साइट्स और ऑनलाइन शाॅपिग का उपयोग करती हैं।
0 महिलाएं ब्रांड की बहुत वफादार होती हैं।
0 90 प्रतिशत महिलाएं प्रोडक्ट के बारे में फ्रेंड्स के साथ शेयर करती हैं।
कस्टमर या शाॅपर के रूप में महिलाओं के बारे में एलिजाबेथ ट्रेलर की बात सही लगती है- अगर शाॅपिग करने से सारी उदासी दूर हो जाती हो तो पैसा तमाम अनिष्टों का मूल कैसे हो सकता है।

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वीरेंद्र बहादुर सिंह
जेड 436ए, सेक्टर 12ए नोएडा,गौतम बु( नगर, पिन: 201301

 

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