आंधी भी ये थमेगी ज़ुरूर, कुछ टूट जाएंगे विश्वास कुछ के अब टूटेंगे गुरूर : डॉ सुनीलजी गर्ग

जैसे सांस का बन गया मीटर
कोई आस का मीटर बना डालो
हुए बावरे नब्ज नाप कर
उम्मीद की सड़क पर चल डालो
बिछड़े हैं वो बहुत थे प्यारे
बचे रहे वो भी अच्छे हैं
झूठों ने बर्बाद किया सब
कुछ लोग यहाँ अब भी सच्चे हैं
इन्फेक्शन अब फैल हवा में
सबको जरूर डराता है
थोड़ा ध्यान देने वाला पर
ज़्यादातर बच जाता है
सबक यही है सबसे सुंदर
तन से हो दूर, बस मन से मिलो
साफ सफाई करो हर पल
मुंह पर मास्क लगा कर चलो
रेमडेसीवीर और फैबीफ्लू
बहुत रट ली मेरे प्यारों
डैक्सा की वो सस्ती गोली
जान बचाई जिसने हज़ारों
प्लानिंग में सबसे कमजोर
अभी कई चेहरे हैं ढके हुए
मंद्र स्वरों में कुछ बोले हैं
कुछ बिल में हैं दुबके हुए
मंज़र बड़े भयंकर दिखाकर
आंधी भी ये थमेगी ज़ुरूर
कुछ टूट जाएंगे विश्वास
कुछ के अब टूटेंगे गुरूर
अब अश्रु भी कम हो जायेंगे
बार बार का दुःख बन जाता है आदत
याद करते रहिये पुरानों को
नए आने वालों का दुनिया में करें स्वागत
जितने जा रहे हैं, उससे ज़्यादा
आज भी दुनिया में नए आ रहे हैं
ख्वाब आज भी बुने जा रहे हैँ
कहीं तो निकले हैं कहीं तो जा रहे हैं ।
(कल रात जाने क्यों ये लिख डाला, रोज़ कई यादें आ रहीं हैं. मन को शांत करने के लिए लिख लेता हूँ । ख्याल रखिये, स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें)


