“ये वक़्त जीवन बचाने का है,राजनीति का नहीं” फ़िल्मकार जलज “
(हिमालिनी फीचर डेस्क) फ़िल्मकार जलज जी का कहना है-“देश और दुनिया आज क़ुदरत के कहर से गुज़र रही है,इस हालत के ज़िम्मेदार हम स्वयं है। प्रकृति से खिलवाड़ का परिणाम है ये। अब भी वक़्त है,हमें पेड़,पौधों को अत्यधिक मात्रा में लगाना होगा, विभिन्न तरह के जीव -जन्तुओं के लिए,वनों का निर्माण करना होगा।” इसी को आधार मानकर, फ़िल्मकार आदित्य वर्मा जलज जी “क़ुदरत एक प्रेमकथा” का निर्माण भी कर रहे हैं। फ़िल्म निर्माण के साथ जलज जी आज दिल्ली में जरूरत मंदों की सहायता कर रहे हैं।जलज जी नम आँखों से कहते हैं कि हर रोज मैं अपनो को खो रहा हूँ,अब ये पीड़ा अब सहन नहीं हो पा रही । आज जो दिल्ली के हालात हैं, मुझसे देखे नहीं जाते।
ऑक्सीजन,प्लाज्मा,बेड,भोजन आदि के बारे में लोगों को सही जानकारी देकर और खुद जाकर लोगों की मदद कर रहे हैं।
आज देश में मौत का तांडव हो रहा है,देश रो रहा है,चारों तरफ लाशों का मंजर है,जलज जी बहुत दुःखी होकर बताते हैं,कि अगर जिन्दगी रही तो फ़िल्म भी बन जाएगी और शूटिंग बंद करके, लोगों की सहायता करने में जुट गए हैं,साथ में अपनी टीम से कई लोगों का सहयोग भी ले रहे हैं-डॉ.राम अवतार सिंह राठौर,डॉ. इमरान, डॉ. प्रवीण सहगल, डॉ.
अमीन,वरिष्ट पत्रकार सत्यप्रकाश सक्सेना, प्रियंका वर्मा जलज, अभिषेक भारद्वाज, मोनिका श्रीवास्तव, अभिषेक श्रीवास्तव, एडवोकेट राम जी शर्मा व तनिष्का मेडिकल स्टोर आदि जलज जी के इस सामाजिक कार्यों में सहयोगी हैं।
दिल्ली में जो भी जलज से हो पा रहा हा,वो कर रहे हैं,कोविड के मरीजों से लेकर हेल्प, ऑक्सीजन
और प्लाज्मा आदि जरूरी मेडिसिन की उपलब्धता आदि पर,लोगों को सही जानकारी दे रहे हैं और जो मजदूर या ऐसे लोग,जिनके पास खाने को लाले हैं उनकी भी सहायता कुछ सामाजिक संस्थाओं व गुरुद्वारों से करवा रहे हैं।
आज हम सब को मिलकर,इंसानियत की मिशाल कायम करनी है,राजनीति करने का आज समय नहीं है।
आओ एक इंसान बनें।





