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इस सीजन कम से कम 59 संक्रमित लोग माउंट एवरेस्ट पर पहुंचे, किन्तु सरकार का इनकार

 

काठमांडू,

इस माह की शुरुआत में पर्वतारोहण का सीजन खत्म होने तक कम से कम 59 संक्रमित लोग माउंट एवरेस्ट पर पहुंचे थे जिनमें शिखर पर पहुंचने वाले पांच लोग भी शामिल हैं। इस बात की जानकारी पर्वतारोहियों के साक्षात्कार, पर्वतारोहण कंपनियों और इंटरनेट मीडिया पर पर्सनल अकाउंट्स से मिली है। हालांकि,  सरकार इससे इन्कार करती है। उसका कहना है कि एवरेस्ट पर कोरोना का कभी कोई मामला नहीं था।

इस साल अप्रैल में जब पर्वतारोही माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप पर ऊंचाई वाले स्थानों के वातावरण के लिए शरीर को ढालने के लिए जुटे थे तब जंगबू शेरपा सर्दी और बुखार से पीड़ित हो गए। 17,590 फीट की ऊंचाई पर उनकी तबीयत और बिगड़ गई। बहरीन के एक प्रिंस की पर्वतारोहण में मदद करने के लिए उनकी सेवाएं लेने वाली पर्वतारोहण कंपनी ने तत्काल उन्हें एयरलिफ्ट करके काठमांडू के अस्पताल में भर्ती कराया जहां उन्हें कोरोना पाजिटिव पाया गया। जंगबू शेरपा ने एक हफ्ता अस्पताल में और छह दिन घर पर बिताए और उसके बाद बेस कैंप पर लौट आए।

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महामारी की वजह से नेपाल के ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ने वाले शेरपा समुदाय के उनके जैसे अनुभवी लोगों की कमी थी और अगर प्रिंस का पर्वतारोहण अभियान रद हो जाता तो पर्वतारोहण कंपनी को हजारों डालर का नुकसान उठाना पड़ता। यही वजह रही कि कोरोना वायरस के प्रभाव से लड़ रहे 38 वर्षीय शेरपा ने प्रिंस और 15 अन्य को 11 मई की सुबह एवरेस्ट शिखर पर पहुंचने में मदद की।

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संभवत: वह पहले व्यक्ति हैं जो कोरोना के बावजूद एवरेस्ट के शिखर पर पहुंचे। जंगबू शेरपा जैसे दर्जनों मामले हैं, लेकिन नेपाल माउंटेनियरिंग एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष आंग शेरिंग शेरपा सवाल उठाते हैं कि क्या शेरपा और पर्वतारोही सुपरमैन थे। उनका कहना है कि इस मसले की गहराई से पड़ताल करने की जरूरत है।

वहीं, नेपाल के पर्यटन अधिकारी पर्वतारोहियों के अकाउंट्स को खारिज करते हुए कहते हैं कि वहां न्यूमोनिया का एक मरीज था। उन्होंने कहा कि पहाड़ की शुष्क हवा में खांसी कोई नई बात नहीं है। नेपाल के पर्यटन विभाग का तब भी यही रुख था जब पहाड़ से लोगों को एयरलिफ्ट किया जा रहा था और पर्वतारोहण अभियानों को रद किया जा रहा था। खासकर तब जबकि इस अभियान पर काफी खर्च होता है और पर्वतारोहण का प्रशिक्षण हासिल करने में काफी वक्त और श्रम लगाना पड़ता है। इस इन्कार की वजह साफ है।

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