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क्या कांग्रेस के लिए सच में स्वर्ण अवसर आया है ? : अजय कुमार झा

 

अजय कुमार झा, जलेश्वर |  कांग्रेस सभापति शेरबहादुर देउवा एक हफ्ता के भीतर ही संसद में विश्वास के मत पाने में सफल होना अपनेआप में नेपाली राजनीति परिदृश्य में विशेष स्थान रखता है। वर्तमान में नेपाल वैश्विक कूटनीति और सांस्कृतिक हस्तक्षेप का युद्ध मैदान बना हुआ है, इतनी भीषण षड़यंत्र के वावजूद इतनी कम समय में देउवा की यह सफलता अवश्य ही महिमामय है। असार २८ गते के दिन सर्वोच्च अदालत के परम आदेश अनुसार असार २९ गते राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी के द्वारा प्रधानमन्त्री नियुक्त हुए कांग्रेस सभापति देउवा इसी रविवार को संसद में विश्वास के मत को सफल बनाकर कांग्रेसी समर्थक सहित लोकतंत्र प्रेमी नेपालियों में आशा का किरण अवश्य जला दिए हैं। अपने घोर विरोधी पार्टी माओवादी और एमाले को शरणागत करा लेना भी नेपाली राजनीति में ऐतिहासिक घटना है। ज्ञातव्य हो; भीषण जनयुद्घ के नायक पुस्पकमल दहाल प्रचंड सहित माओवादियों को मारने के लिए देउवा सरकार ने कोई कसर बाकी नहीं छोड़ा था। और आज वही माओवादी देउवा को वेसर्त समर्थन कर रहा है। यही है राजनीति के गूढ़ तत्व जिसे सामान्य जनता और पार्टी के कार्यकर्ता नही समझ पाते। ऐसा नहीं है कि, इस निसर्त समर्थन के पीछे उन पार्टियों का अपना विशेष लक्ष्य और दांव नही है। सब मौका के तलास में है।
बेचारे! ठाकुर बाबा को ही देखिए, कहां से कहां पहुंच गए। न कांग्रेसी रह पाए नहीं मधेसी ही। नहीं कांग्रेस के महिमा को सम्हाल पाए नहीं मधेस के गरिमा को गतिशील कर पाए। विदेशी के इशारों और कौटुंबिक गलियारों में इस कदर भटके कि अब शायद ही होश आ पाए।
यही हालत एमाले के माधव नेपाल और उनके समर्थकों का होनेवाला है। अब उन्हें न ओली समूह में सम्मान मिलनेवाला है, न खुद का पार्टी अस्तित्व में आनेवाला है। नेपाल के राजनीति में जिसने भी पार्टी को तोड़ा उसका जड़ समाप्त हो गया है। अतः भारी उठापटक के वावजूद भी जसपा में एकता कायम रह जाना शुभ संकेत ही माना जाएगा।
नेपाली राजनीति में कांग्रेस के खोई हुई शाख को पुनर्स्थापित करने के लिए देउवा को करोना रूपी महामारी के सोपान को प्रयोग में लाना होगा। प्रत्येक नेपाली जनता को टीका उपलब्ध करा कर ओली सरकार के द्वारा आम नागरिक के जीवन तथा भविष्य के प्रति की गई लापरवाही तथा टीका के नामपर भ्रष्टाचार को उजागर कर जनता के हितैषी बनना होगा। देश में विद्यमान अराजकता, कुशासन तथा लुटेरों के गिरोह को निर्मूल कर सुशासन और सुव्यवस्था का आधार शिला स्थापित करना होगा। अपनी जीवन के अंतिम घड़ी में प्राप्त अधिकार को देश और नागरिक के हित में कार्यान्वयन कर राष्ट्र और खुद के जीवन को सफल बनाने का प्रयास करना होगा। इसके लिए पड़ोसी देश भारत के प्रधानमंत्री युग पुरुष मोदी से प्रेरणा लेना होगा। व्यक्तिगत संपत्ति चाहे कितना भी हो, यदि जीवन; जनता के धन लूटनेवाले के नाम से कलंकित और कलुषित है तो वह दो कौड़ी का भी नहीं। नेपाल के राजनेता लोग प्रजातंत्र (२०४६) के वाद कंगाल से रातारात सीधे मालामाल हो गए, लेकिन नेपाली जनता ने किसीको अपमानित नही किया है। लेकिन अब लोग आजित हो चुके हैं, क्योंकि अब ए लोग देश को ही बेचने में लग गए हैं। तो देउवा जी! कितना और धन चाहिए? लूटते लूटते एकदिन देश ही लूट जाएगा, तो फिर राजनीति कीजिएगा कहां?
अतः इन सभी लुटेरों के ऊपर कड़ी कार्यवाही करने की हिम्मत दिखाइए। स्वस्थ छानबीन के लिए अन्य देशों से योग्यतम एक्सपर्ट को लाकर इन लुटेरों को दंडित कर जनता के विश्वास को जीतने का प्रयास कीजिए। अभी आप आम नेपाली जनता के विश्वास से प्रधानमंत्री नही बने है, वल्कि सर्वोच्च न्यायालय के परमादेश से बने हैं। यदि आगामी चुनाव में आज के विश्वासमत की तरह पार्टी को बहुमत नहीं दिला पाते हैं तो, इस बीच किए गए सारे निर्णय और कार्य अयोग्य प्रमाणित होंगे। जो कि पांच पांच बार प्रधानमंत्री हो चुके व्यक्ति के लिए बड़ी ही शर्मनाक बात होगी।
नेताओं और भ्रष्ट कर्मचारियों को छोड़कर नेपाल में आज ऐसा एक भी व्यक्ति नहीं जो यह कह सके कि मैं भ्रष्टाचारियों का शिकार नहीं हुआ हूं। प्रत्येक नागरिक को मुठ्ठी भर लोगों के शोषण का शिकार होना पड़ रहा है, क्योंकि इनके संरक्षक और पोषक स्वयं सरकार और सरकारी संयंत्र है।तो जाते जाते देउवा जी को क्या, इन भ्रष्टाचारियों को मसलने का अभियान चलाने की हिम्मत नही दिखाना चाहिए? मैं तो दावे के साथ कह सकता हूं, कि यदि आज कांग्रेस भ्रष्टाचार विरुद्ध कड़ा कदम उठाने की हिम्मत दिखादे तो आनेवाला चुनाव में बिना भोट मांगे ही विजय का डंका बज उठेगा।
स्वदेशी लुटेरों के द्वारा तहस नहस किए गए देश के अर्थतन्त्र का पुनरुत्थान करना और ओली जैसे कुटिल तथा शक्तिशाली प्रतिपक्ष का सामना करने के साथ ही ओली के पक्ष से पक्षपात करने के आरोप से आरोपित राष्ट्रपति के साथ संतुलित सहकार्य करना राजनीतिक और कूटनीतिक योग्यता का जबरदस्त प्रमाणपत्र होगा। इसके लिए देशप्रेमी प्राज्ञों के साथ सतसंग से आप इन समस्याओं से निजात पा सकते हैं।स्थायित्व और उत्तम व्यवस्थापन के लिए अंतरराष्ट्रीय संबंधों को सुमधुर बनाते हुए भारत के साथ गहनतम विश्वास का माहौल तयार करना होगा। थोड़ा अहंकार को गलाना होगा। थोड़ा देशप्रेम जगाना होगा। थोड़ी सी समझदारी दिखानी होगी। थोड़ा हिम्मत जगाना होगा। झूठे ममत्व को त्यागना होगा।

यह भी पढें   नेपाल–भारत के पत्रकारों का संयुक्त गोष्ठी नानपारा में सम्पन्न
अजयकुमार झा, जलेश्वर

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