जीवन-सार : किशोर कुमार धनावत
शीर्षक:-“जीवन-सार”
जीवन एक जलता चिराग है,
खुद को झुलसाना पड़ता है|
खुबसुरती नजरों में होती है,
तड़प में मुस्कुराना पड़ता है|
केवल दिखावे की सहानुभूति से,
मन की बात जान नहीं सकता|
आदर्श मानवीय मूल्यों के बिना,
कोई भी महान बन नहीं सकता|
कम से कम रिश्तों को निभाईये,
खुशी की एक बूंद भी बरसात है|
जब मनमुटाव हो जाता है तो,
दु:ख-समुंदर की क्या औकात है|
किसीके बहकावे में आनेवाला,
प्यार को कभी जान नहीं पाता|
अपने अभिमान में डूबा रहता है,
किसीसे भी सम्मान नहीं पाता|
आदर उसीका करना चाहिए,
जो इसका अधिकारी हो|
ईश्वर ने बनाया है दोनों को,
चाहे पुरुष हो या नारी हो|
सुख-दु:ख की चिंता छोड़दो,
आसमान तले आजायेगा|
मुसीबतों का सामना करो,
साहस गले लग जायेगा|
यही जिंदगी का सार है,
झुकता सारा संसार है|
व्यवहार ही आधार है,
सफलता का द्वार है|

रायपुर (छत्तीसगढ)


