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बास्तु का भी खयाल राखे

 

आजकल घर से दूर जाकर नौकरी करने की असुविधा से बचने के लिए ज्यादातर स्त्रियां घर रह कर काम करना पसंद करती है। इस वजह से घर पर ही आँफिस बनाकर काम करने का चलन तेजी से बढÞ रहा है। इससे जहां एक ओर आसानी तो हर्ुइ है तो दूसरी ओर कुछ व्यावहारिक दिक्कतें बढÞ रही हैं। इसलिए अगर आप घर पर आँफिस बना कर अपने कामकाज का संचालन करना चाहती है तो आपको वास्तुशास्त्र के इन मूलभूत नियमों का ध्यान जरूर रखना चाहिएः
१. आँफिस हमेशा मकान या फ्लैट के दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित नैऋत्य कोण में होना चाहिए।
२. दूसरे विकल्प के रूप में संपर्ूण्ा दक्षिण दिशा में बने किसी भी कमरे को आँफिस बनाया जा सकता है।
३. इसके अलावा पश्चिम दिशा में बने कमरे को भी अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
४. यदि आँफिस समाज सेवा के उद्देश्य से बनाया जा रहा हो तो संपर्ूण्ा पर्ूव एवं संपर्ूण्ा उलर दिशा के किसी भी भाग में बने कमरे को आँफिस के रूप में व्यवस्थित किया जा सकता है।
५. अगर आप घर पर रह कर आँफिस चलाती है तो जरूरी कागजात, फाइलें, कंप्यूटर बेडरूम में कभी न रखें, इसके नकारात्मक प्रभाव से नींद में खलल पडÞता है।
६. अगर आप डाँक्टर या वकील है तो इस बात का ध्यान रखें कि मरीजों की रिपोर्ट, संबंधित फाइलें, विभिन्न तरह के मुकंदमों के दस्तावेज कभी अपने बेडरूम में न रखें।
७. यदि आपको पूरे घर में कोई उपयुक्त जगह न मिले, तो अपने ड्राइंग रूम के दक्षिण-पश्चिम कोने में मेज-कर्ुर्सर्ीीखकर भी काम कर सकती है।
८. यह भी ध्यान रखें कि आँफिस में बैठते समय आपका मुंह सदा उलर दिशा की ओर रहे, जिसमें कि मुख्य टेबल सामने और साइड टेबल या रैक आपके बाई ओर हो।
९. दूसरे विकल्प के रूप में आप अपनी मुख्य टेबल को इस प्रकार भी रख सकती है कि उस पर बैठे हुए आपका मुंह सदा पर्ूव दिशा की ओर रहे। परंतु ऐसी स्थिति में आप अपनी टेबल के साथ लगी साइड टेबल, रैक या अलमारी को अपनी दाई ओर ही रखें।
१०. किसी भी स्थिति में आपका कंप्यूटर या लैपटाँप साइड टेबल पर न होकर मुख्य टेबल पर ही रखा होना चाहिए, ताकि कंप्यूटर पर काम करते समय भी आपका मुंह पर्ूव या उलर दिशा में ही रहे।
११. आँफिस की भीतरी दीवारों या परदों के लिए हमेशा हलके, सुखद और सौम्य रंगों का ही प्रयोग करे। यहां ज्यादा भडÞकीले रंगों से नकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है।
१२. आँफिस की छत में यदि कोई बीम या लोहे एवं लकडÞी की कोई छडÞ हो तो उसके ऊपर फाँल्स सीलिंग जरूर करवा लें। आँफिस में बैठने की व्यवस्था इस प्रकार रखें कि आपकी कर्ुर्सर्ीीीक इसके नीचे न हो।
१३. दफ्तर के भीतर कलात्मक और रंग-बिरंगे पर्दाे का प्रयोग किया जा सकता है। साथ ही प्रयास करे कि सोफे, फर्नीचर, सजावटी वस्तुओं में काले रंग का प्रयोग बहुत ज्यादा न किया गया हो।
१४. आँफिस में बैठते समय पीठ के पीछे कोई खिडÞकी या दरवाजा नहीं होना चाहिए।
१५. आंतरिक सज्जा में लाँफिंग बुद्धा की मध्यम आकार की मर्ूर्ति को कुछ इस प्रकार रखें कि आँफिस में प्रवेश करते समय आगंतुक की दृष्टि सीधे उस मर्ूर्ति पर जाए, जिसका उस पर सकारात्मक प्रभाव पडÞेगा।
१६. टेबल पर धातु के बने पेपर वेट का प्रयोग न करके केवल शीशे और लकडÞी के पेपर वेट प्रयोग करे, क्योंकि धातु हमारे शरीर की ऊर्जा को सोख कर क्षीण कर देते है।
१७. आँफिस की पर्ूवाेलर दिशा में पर्ूव की ओर लक्ष्मी-गणेश जी की छोटी-सी प्रतिमा या फोटो प|mेम लगाएं। १८. आँफिस का दरवाजा सदा भीतर की ओर खुलने वाला होना चाहिए, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का वास आँफिस हमेशा में बना रहे।

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