Sun. Oct 4th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

कर्फ्यू : डा रेखा सिन्हा

 

कर्फ्यू

सड़कों पर फैला है
वीरान सन्नाटा दूर तक
न रिक्शेवाले ,न टाँगेवाले
न खोमचेवाले ,न दिहाड़ी मजदूर
और न ही कोई वाहन ।

नजर आते हैं ,गस्त करती पुलिस
उनकी सरपट दौड़ती गाड़ियां
और कभी कभी
इक्का दुक्का लोग राशन पानी की जुगाड़ में ,
कुछ चेहरे ऐसे भी
जिनपर घनीभूत है विवशता
और आँखों में दर्द का समन्दर ।

सरक रही है जिंदगी
थम गई है रफ्तार जीवन की ,
लगता है इस विशाल लोकतंत्र में
आदमी की भीड़ कहीं खो गई है ,
किसी भयावह अंधेरी गुफा में
जहाँ एक दूसरे की साँसों का स्वर भी
सुनाई नहीं देता ।

यह भी पढें   नेपाल से एक –दो दिनों में मानसून के बाहर जाने की प्रक्रिया शुरु होने की संभावना

शायद कोई अदृश्य सुरसा
बढ़ी आ रही है मानवता को लीलने ,
या क्षुधा का दानव बढ़ रहा है
अपनी रक्तिम आँखों और
लपलपाती जिह्वा लिए ,
उनकी ओर जो पहले ही
बढ़ रहे हैं अनंत आकाश की ओर
अपनी आँखों में एक प्रश्नचिह्न लिए ।

किसे फ्रिक है ,कौन है दोषी
मानवता को विनाश की ओर
ढकेलने के लिए ,या केवल
तबाही का मंजर देखने के लिए ,
घृणा , वैमनस्य और शक्तिशाली बनने की होड़ ने
पहले ही रच दी है विनाश की इबारत ।

यह भी पढें   भोटेकोशी बाढ़ के कारण ४३० मेगावाट बिजली आपूर्ति बाधित, वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी

फिर किस पर और कैसा शासन
वैसे भी सत्ता और सुख उनके लिए
जो साधन संपन्न हैं और
शोषण और शासन उन पर
जिनका मुख तो है पर आवाज नहीं ,
क्योंकि गुम है कहीं उनकी आवाज
हृदय के गहन गह्वर में
अशांत , पर पत्थर सा प्रहार करती हुई ।

 

डा रेखा सिन्हा
राजगीर नालंदा

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com