पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को कश्मीर के मसले पर भारत का तीखा जवाब
न्यूयार्क, एएनआइ।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। वहीं पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इस बार अमेरिका नहीं गए हैं। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) को वर्चुअली जरूर उन्होंने संबोधित किया। एक बार फिर से पाकिस्तान पीएम इमरान खान ने अपने संबोधन में कश्मीर का मुद्दा उठाया। जिसके बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को भारत का करारा जवाब भी मिल चुका है।
इमरान के भाषण पर राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए भारत ने कहा कि पाक प्रधानमंत्री हमारे आंतरिक मामलों को लाकर वैश्विक मंच का दुरुपयोग कर रहे हैं। भारत ने फटकार लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान आग लगाने वाला देश है जबकि खुद को आग बुझाने वालों के रूप में पेश करने का दिखावा करता है।
UNGA में भारत की प्रथम सचिव स्नेहा दुबे ने कहा, ‘यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान के नेता ने मेरे देश के खिलाफ झूठे और दुर्भावनापूर्ण प्रचार के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रदान किए गए मंच का दुरुपयोग किया है और अपने देश की दयनीय स्थिति से दुनिया का ध्यान हटाने के लिए व्यर्थ प्रयास कर रहा है।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में आतंकवादी खुले आम घूमते हैं, जबकि आम लोगों, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों पर बर्बरता की जाती है।
उन्होंने कहा, ‘सदस्य देश इस बात से अवगत हैं कि पाकिस्तान का आतंकवादियों को पनाह देने, सहायता करने और सक्रिय रूप से समर्थन देने की नीति का इतिहास रहा है। यह एक ऐसा देश है जिसे विश्व स्तर पर राज्य की नीति के रूप में आतंकवादियों का समर्थन, प्रशिक्षण, वित्तपोषण और हथियार देने के रूप में मान्यता दी गई है। इसके साथ ही पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादियों की सबसे बड़ी संख्या की मेजबानी करने का अपमानजनक रिकॉर्ड भी रखता है।
बता दें कि आज तड़के पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। अपने संबोधन में जम्मू कश्मीर का मुद्दा भी उठाया। वहीं दूसरी तरफ भारत के साथ शांति से काम करने की इच्छा जाहिर करते हुए कहा,’ दक्षिण एशिया में स्थायी शांति जम्मू-कश्मीर विवाद के समाधान पर निर्भर है।’ इसके अलावा अफगानिस्तान में तालिबान सरकार की मंजूरी पर भी इमरान खान खुलकर बोले। उन्होंने कहा कि तालिबान हुकूमत को दुनिया को कबूल करना चाहिए और उसकी मजबूती के लिए खड़ा होना चाहिए। बता दें कि पाकिस्तान पर तालिबान को खुलेआम और परोक्ष रूप से समर्थन करने का आरोप शुरू से लगा है।

