गीनिज बुक में नहीं गाली बुक में ओली महोदय की बोली, गोली और गाली तिनों दर्ज : बिम्मी कालिन्दी शर्मा

बिम्मी कालिन्दी शर्मा, बिरगंज ( व्यंग्य) । अपने तीन साल के कार्यकाल के दौरान ओली महाशय ने ईतना अच्छा काम किया है कि सच में ईतिहास में दर्ज कराने लायक है । पर गीनिज बुक में नहीं गाली बुक में ओली महोदय कि बोली, गोली और गाली तिनों दर्ज कराने लायक है । अपने तीन साल के कार्यकाल में ओली ने मुहावरा सुनाने, अपने विपक्षियों को कोसने और गाली देनें के अलावा कुछ तो नहीं किया । अब बेचारे सत्ता से हट गए तब भी अपना तुजुक दिखाना नहीं भुलते । ईसी को कहते हैं रस्सी जल गई पर ऐंठन नहीं गया । ओली जी जब सरकार प्रमुख थे तब रस्सी जैसे ही थे । अब जब सत्ता से हट चूके हैं तब जल कर खाक होने के वावजुद भी अपनी अकड दिखा रहे हैं ।
ओली को भ्रम है कि उन्होंने बहुत अच्छा कार्य किया था । हां अपने हनुमानों और अन्धभक्तों के लिए बहुत अच्छा किया । ओली के ही सहारे बेचारों कि जीवन की नैंया आगे बढ रही है । अपने हनुमानों के लिए ओली ईतने दिलदार रहनुमा हैं कि पशुपतिनाथ में सौ किलो का सोने का जलहरी चढा कर उसमें से ११ किलो सोना हडप लिया और सबको बांट दिया । स्वास्थ्य सामग्री खरिद में भी घपला कर के कमिशन डकार लिया । नकली सडक आयोजना का खाका दिखा कर ठेका हतिया लिया । दुनिया को दिखाने के लिए भ्यू टावर बनाया । महगाई को गरीब के माथे पर बिंदी की तरह सजाया । टैक्स के बोझ से देश के धागरिको को बयल बना कर खेत में हल जैसा जुतवा दिया । अपनी ही पार्टी का दो टुकडे कर के खुद ‘स्वयंभू’ बन गए । अपने हनुमानों का दिमाग, विचार और तर्क सब को अकेले ही हजम कर के उनको टांगे का घोडा जैसा बनवा दिया । जब एक ही आदमी में ईतनी सारी खुबिलिटी हो तो उसको गीनिज बुक वाले नकार भी कैसे सकेगें ?
और गालियो के तो शंहशाह है ओली । उनके जैसा विरोधियों को कोसने और चून- चून कर गालियां देने वाला नेता पूरी दुनिया में नही होगा । ईसके लिए ओली को गुरु मान कर उनसे गालियों की दीक्षा लेनी चाहिए । हो सके तो ओली खुद ही गालियो का एक बिश्वविद्यालय खोल कर उसका कूलपण बन कर सबको दीक्षित करें तो यह देश और गीनिज बुक दोनों का आहोभाग्य होगा । यह ओली को मुफ्त में दी गई नेक सलाह है ।
मुहावरों का तो ओली पूरी ईन्साईक्लोपीडिया है । अपनी कम शैक्षणिक योग्यताओं को ओली मुहावरों से ही ढक देते है । ईसी लिए किसी को पता ही नहीं चलता कि वह सिर्फ मैट्रिक तक ही पढे हैं । ईसी लिए तो उन्हें डाकटरेक्ट कि डिग्री दे कर सम्मानित किया या गया । बेचारा डिग्री अपने करम पर आंसू बहा रहा होगा ।
सभी मां के गर्भ से पैदा होते हैं पर ओली भ्रम के गर्भ से पैदा हुए हैं । ईसी लिए तो सब को भ्रम बांटते है । खुद भी भ्रम में जी रहे हैं । ओली ने बस गीनिज बुक का नाम सुना है । गीनिज बुक कैसे कैसे हैरतअंगेज कारनामें करने वालों का रेकर्ड रखता है और उनको अपने बुक में सामेल करता है यह नहीं पता । ओली को देश के नागरिको सें कोई मतलब नहीं है । उनको तो जैसे भी चुनाव जीत कर प्रधान मंत्री बनना था बन गए । भ्रष्टाचार करना और हर सरकारी आयोजना में कमिशन घूषा कर अपने हनुमानों का भविष्य बनाना था सो बना दिया ।
ओली को प्रश्न कर सकने वाला और सही तर्क और विचार से पराजित करने वाला अभी तक कोई नहीं मिला है । सभी के पास एक अदद मुंह और पेट है और उसके लिए पैसे और भोजन कि ब्यवस्था करना नितांत जरुरी है । ईसी लिए सब सर खूजा कर चूप हो जाते हैं । ओली वह उंट है जो अभी तक पहाड के निचे नहीं आया है । जिस दिन ओली नाम का उंट पहाड के निचे आएगा उस दिन ओली खुद ही कहेगें मेरे लिए गीनिज बुक नही गाली बुक सही है । मैने सभी को गाली दी है और मेरी पात्रता ही गाली देनें मे ही है । ईसी लिए मैं गाली बुक का हकदार हूं गीनिज बुक का नहीं ।

