नेपाल के महान ‘कामेडियन आफ द नेशन’ : बिम्मी कालिन्दी शर्मा

व्यग्ंय….. बिम्मी कालिन्दी शर्मा । बडबोला पन का हद पार कर दिया केपी ओली और उनके चाटुकारों ने । बालुवाटार से बालकोट अपने घर पहुंच गए पर ओली की तुजुक कम नहीं हूई । अब वह खुद को ‘फादर आफ द नेशन’ मानने लगे हैं और यही बडबडा भी रहे हैं । और उनकी ईस भारी गफलत करने वाली जिह्वा पर उनके मानस पुत्र और चाटुकार तेल लगा लगा कर उसको और ज्यादा फिसला रहे हैं । अब बिना हड्डी की जीभ फिसल फिसल कर और लटपटा कर देश और जनता को दुर्घटना ग्रस्त कर रहे हैं । ओली को नहीं मालुम वह क्या बोल रहे हैं और ईसका क्या अर्थ निकलेगा ? आखिर आठ कक्षा पढा हुआ या मैट्रिक पास व्यक्ति से हम ईससे ज्यादा कि उम्मीद क्यो रखते हैं ? सभी को मान लेनी चाहिए कि ओली दिमागी रुप से बिमार हैं ईसी लिए गाहे बगाहे कुछ न कुछ बडबडाते ही हैं । वह ईस देश के महान ‘कामेडियन आफ द नेशन है’ ।
देश और जनता को हमेशा भ्रम में रखने वाले केपी ओली जैसे व्यक्ति ‘फादर आफ द ईरिटेशन’ तो हो सकते हैं पर ‘फादर आफ द नेशन’ कतई नहीं । बंदरों जैसा उलजलूल हरकते करने वाला ईंसान बंदरो का बाप तो हो सकता है पर देश का नहीं । यदि ओली को फादर आफ द नेशन माना गया और बनाया गया तो हम जो ईस देश के वासिदें है ओली के सन्तान कहलाएगें और दुसरे देश के नागरिक हमें भी ओली जैसा ही दंभी, फरेबी, भ्रमजाल रच कर दुनिया को बेवकुफ बनाने वाला समझेगें । वैसे भी ठगी करने में नेपालियों को महारत हासिल है और बदनामी और कुख्याति भी नेपालियों ने अन्र्तराष्ट्रीय रुप में खुब कमा लिया है । अब ओली जैसे प्रपंची को फादर आफ द नेशन बना दिया गया तो रहा सहा कसर भी पूरा हो जाएगा और ‘देश गईल भैंस पानी में’ हो जाएगा ।
देश में दो तरह से वाक प्रदूषण फैल रहा है । एक तो ओली अनाप-शनाप बोल कर फैला रहे हैं और दुसरा मीडिया ओली कि बोली को तवज्जो दे कर फैला रहा है । जिसके बोली और भनाई को कूडेदान मे फेंकना चाहिए उसको गूलदान में सजाया जा रहा है । ईसी लिए तो देश का बेडागर्क हो रहा है । हिटलर के मंत्री गोयबल्स कि शैली में ओली के चाटुकार और हनुमान झुट बोल कर और उसको सच का लबादा पहना कर भ्रम फैला ही रहे है । उस पर अचार में बघार की तरह मीडिया ओली की फालतु बोली को उछाल कर तडका मार रही है ।
ओली को भ्रम है कि वह जो बोलेगें या करेगें उस से देश की दीशा और दशा तय होगी । हां पर दीशा तो नहीं उनके फालतु के बडबड से देश को दशा जरुर लि गया है । दो तिहाई बहुमत का जो घंमड था वह तो टायर के हवा कि तरह निकल कर पंचड हो ही गया । तीन साल सत्ता में एकक्षत्र राज कर के भी भ्यूटावर बनाने के अलावा कुछ नहीं कर पाए । देश और जनता “घ्यू” के लिए तरसती रह गई और ओली भ्यूटावर बना कर अपना यशोगान करने में ही मस्त रहे । देश के सातों राज्य सें उनकी पार्टी से जो मुख्य मंत्री बने थे सब हट गए । खुद बालुवाटार से बालकोट के अपने नीजि मकान के बार्दली पर आ गए पर उनका अहंकार कम नही हुआ । खुद को तीसमार खां समझने और औरों को दो कौडी का भी भाव न देने के कारण आज ओली का पतन हो गया है । वह अभी भी आगामी चुनाव में पहले कि तरह दो तिहाई बहुमत ला कर फिर से सत्ता में राज करने का दिवास्वप्न देख रहे है और उनके चाटुकार और मानस पुत्र ईसी में भरमा रहे है । उनके टुकड़े में पलने वाले ओली को अपना पिता या ‘बा’ मानते मानते अब देश का ही पिता बनाने पर तुले हैं । पिता अगर ऐसा बज्र स्वांठ है तो उनके कथित पुत्र और कैसे होगें यह तो अनुमान ही लगाया जा सकता है ।
राणा शासन से मूक्ति दिलाने के कारण राजा त्रिभुवन को राष्ट्र पिता कहा और माना गया । अब यदि ओली को कथित रुप से राष्ट पिता माना गया तो बेचारे राजा त्रिभुवन कि आत्मा भटकने लगेगी और ओली को चैन से रहने नहीं देगी । बाद में ओली मर कर उपर पहुंच भी गए तो राजा त्रिभुवन ओली को स्वर्ग में बैठने नहीं देगें । वैसे भी ओली ने ईतने कर्मकांड किए हैं कि उनके लिए नर्क ही निश्चित है । देश और जनता को खून के आंसू रुला कर स्वर्ग में उनको स्थान मिले तह कतई संभव नही है । एक देश में एक ही राष्ट पिता होता है और उस जगह को राजा त्रिभुवन घेर कर बैठे हुए हैं । लगता है हिटलर कि अगति हूई अतृप्त और असन्तुष्ट आत्मा ने केपी ओली के रुप में नयां जन्म लिया है या जर्मनी से हिटलर कि आत्मा उडते हुए नेपाल आ कर ओली के शरीर मे प्रवेश कर गई है । शायद ईसी लिए वह हिटलर के जैसा ही तानाशाही रवैया अपना रहे है । पर देश के नागरिक ओली के ईस रवैये से हंस भी रहे हैं और दुखी भी हो रहे हैं । ईसी लिए ओली को राष्ट्रीय विदुषक मान कर उन्हें “फादर आफ द कामेडियन” ही बनाया जाना चाहिए यही ओली को सुट भी करता है । 😊😢

