Fri. Sep 18th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

सामाजिक अन्धविश्वास के बीच राजनीतिक क्रान्ति सम्भव नहीं : लिलानाथ गौतम

 

अन्धविश्वास का शिकार समाज
सामाजिक अन्धविश्वास के बीच राजनीतिक क्रान्ति सम्भव नहीं

लिलानाथ गौतम, हिमालिनी अंक नोवेम्बर 2021। 
सीके राउत नेतृत्व में निर्मित जनमत पार्टी से आबद्ध राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने पिछले दिन जनकपुर स्थित एक सरकारी कार्यालय के इन्जीनियर के ऊपर ‘जनकारवाही’ के नाम में दुव्र्यहार किया । कानून के अनुसार प्रमाणित सत्य तो नहीं है, लेकिन आरोप के अनुसार दुव्र्यहार में पड़नेवाले कर्मचारी भ्रष्टाचारी एवं कामचोर भी हो सकते हैं । यह छानबीन का विषय भी है, अगर आरोप प्रमाणित हो जाता है तो कारवाही के लिए भी कानूनी प्रक्रिया ही है ।

इसीलिए इस विषय को लेकर सामाजिक सञ्जालों में काफी चर्चा हुई, विशेषतः प्रशासनिक एवं राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े हुए व्यक्ति बहस में सहभागी हो गए । घटना के प्रति टिप्पणियां करनेवाले अधिकांश लोगों का कहना था कि जनमत पार्टी की ऐसी हरकत कानून सम्मत नहीं है, इसीलिए यह स्वीकार्य नहीं हो सकता । यहां एक और बात भी स्मरणीय है, जिस देश में भ्रष्टाचार अघोषित रूप में संस्थागत है, प्रशासनिक और राजनीतिक व्यक्तित्व ही इसमें प्रत्यक्ष–अप्रत्यक्ष संलग्न हो जाते हैं तो भ्रष्टाचार होते हुए भी उसको प्रमाणित करना मुश्किल है । भ्रष्टाचार के मामले में नेपाल की वर्तमान अवस्था यही है । इसीलिए कभी–कभार जनमत पार्टी की तरह कुछ हरकत करनेवाले लोग एवं समूह दिखाई देते हैं तो आश्चर्य की बात भी नहीं है ।

खैर ! यह बहस के लिए अलग विषय है । यहां उस घटना को जोड़कर चर्चा के लिए चयनित विषय यह है कि जिस समय जनमत पार्टी के कार्यकर्ता भ्रष्टाचारी एवं कामचोर होने के आरोप में कर्मचारी के ऊपर कारवाही कर रहे थे, उसी समय प्रदेश नं. २ (महोत्तरी जिला) में ही डायन के आरोप में तीन महिलाओं के ऊपर अमानवीय दुव्र्यवहार होने की घटना सामने आयी थी । सिर्फ दुव्र्यहार ही नहीं, महोत्तरी गांवपालिका–३ मडई निवासी शीलादेवी की डायन के आरोप में हत्या की गई । हत्या में संलग्न व्यक्ति अपने ही परिवार के सदस्य थे । अन्य दो महिलाओं को मानव मल–मूत्र खिलाकर दुव्र्यहार किया गया, इसमें भी पारिवारिक सदस्य एवं गांव के ही लोग सहभागी थे । लेकिन इस विषय को लेकर प्रशासनिक, राजनीतिक एवं सामाजिक रूप में बहस करने वाले कोई भी नहीं दिखाई दिए ।

यह भी पढें   भारत ने संकटग्रस्त नेपाल को बिजली निर्यात की दी मंजूरी, बाढ़ के कारण हुए नुकसान के बीच बढ़ाया मदद का हाथ

डायन के आरोप में महिला के ऊपर जो अमानवीय दुव्र्यहार हो रहा है, इससे हमारी सामाजिक चेतना के स्तर का प्रदर्शन होता है । ऐसी दुर्घटना पहाड़ो में भी होती है, लेकिन तुलनात्मक रूप में तराई–मधेश में ऐसी घटना अधिक दिखाई देती है । दुर्भाग्य की बात यह है कि राजनीतिक रूप में तराई–मधेश में आज जितनी भी क्रान्तिकारी बात की जाती है, समाज को शिक्षित बनाने के लिए और लोगों को अन्धविश्वास से मुक्त कर जागरुक बनाने के लिए ऐसा कुछ भी नहीं होता है । भ्रष्टाचारी होने के आरोप में कर्मचारी के ऊपर कारवाही करनेवाले राजनीतिक कार्यकर्ता भी इसके लिए खुद को जिम्मेदार नहीं मानते हैं ।

यहां एक बात समझनी होगी कि जहाँ समाज में रहनेवाले अधिकांश लोगों की चेतना १६वीं शताब्दी के आसपास की रह जाती है, वहां राजनीतिक क्रान्ति भी अराजकता की ओर चली जाती है । प्रमाणित सत्य है कि सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक अन्धविश्वास एवं कट्टरपन से ही आतंकवाद का जन्म हुआ है । इसीलिए कोई सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक परम्परा मानव के लिए है, मानव उसके लिए नहीं हैं । अगर इस बात को समझ जाते हैं तो हर परम्परा समय–परिस्थिति के अनुसार परिवर्तित होता चला जाता है और हर परम्परा विज्ञान का भी अनुशरण करने लगती है ।

यह भी पढें   सर्वदलीय बैठक शुरु

इसीलिए राजनीतिक तथा प्रशासनिक सुधार के लिए समाज में रहनेवाले लोगों की पुरातनवादी सोच एवं चिन्तन में भी परिवर्तन आना जरूरी है । एक महीने के अन्दर महोत्तरी जिला में डायन के आरोप में महिलाओं के ऊपर हुई तीन अमानवीय घटना यही साबित करती है कि यहाँ राजनीतिक चेतना से अधिक सामाजिक तथा सांस्कृतिक चेतना की जरूरत है । समाज में व्याप्त गलत संस्कार, संस्कृति एवं मनोविज्ञान को खतम कर सही दिशा की ओर ले जाने की मुख्य जिम्मेदारी राजनीतिक नेतृत्व की ही है । कर्मचारी के ऊपर हिंसात्मक कारवाही करने से सामाजिक चेतना में परिवर्तन आनेवाला नहीं है । जब तक सामाजिक चेतना में परिवर्तन नहीं आएगी, तब तक राजनीति एवं प्रशासनिक परिवर्तन भी सम्भव नहीं है ।

सिर्फ जनमत पार्टी सम्बद्ध नेता–कार्यकर्ता इस बात को समझ लें, ऐसा नहीं है । स्मरणीय तो यह है कि जिस हरकत को लेकर अन्य पार्टी के नेता–कार्यकर्ता आज जनमत पार्टी एवं सीके राउत का विरोध कर रहे हैं, वे लोग भी ऐसे ही हैं, जो परिस्थिति और अवसर को देखकर ऐसी ही हरकत में उतर आते हैं । राजनीतिक जागरुकता के लिए तराई–मधेश में क्रियाशील पार्टी नेता–कार्यकर्ता जो श्रम करते हैं, सामाजिक जागरुकता के लिए उससे अधिक श्रम करने की जरुरत आज दिखाई दे रही है ।

यह भी पढें   रुकुम पश्चिम में जीप दुर्घटना... दो लोगों की हुई मौत

तराई–मधेश में एक अन्धविश्वास जबरददस्त स्थापित है– दशहरा के अवसर पर डायन सक्रिय हो जाती है । इसीलिए दशहरा के आसपास ही महोत्तरी में डायन के आरोप में महिलाओं के साथ दुव्र्यहार किया गया । लेकिन यह सिर्फ अन्धविश्वास है, इसमें कुछ भी सत्यता और विज्ञान नहीं है । इस बात को समझाने की जिम्मेदारी भी कर्मचारी के ऊपर कारवाही के लिए उतर आने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भी है । महोत्तरी घटना और जनमत पार्टी संबंधी प्रसंग तो एक नमूना है । ऐसी ही परिस्थिति देश के अन्य क्षेत्रों में भी है, जो सामाजिक न्याय को लज्जित बनाता है, मानव अधिकार और महिला अधिकार की दयनीय अवस्था को चित्रण करता है ।

महिलाओं के विरुद्ध होनेवाले ऐसी कई धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, परम्परा है, जिसके आधार पर महिलाओं के ऊपर शारीरिक एवं मानसिक हिंसा हो जाती है । इस तरह की त्रुटिपूर्ण सामाजिक एवं सांस्कृतिक मनोविज्ञान में परिवर्तन लाने के लिए राजनीतिक स्वशासन की जरूरत भी नहीं है । तराई–मधेश में व्याप्त पिछड़ापन के लिए हरदम काठमांडू की सत्ता को दोषारोपण कर राजनीतिक रोटी सेकने वाले तराई–मधेश में क्रियाशील राजनीतिक पार्टी को भी इस तरह की घटना से कुछ सीखना होगा ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com