बाज नहीं आ रहा डै्गन ? : रूचि सिंह
रूचि सिंह,वरिष्ठ पत्रकार । भू माफिया डै्गन विश्व के रडार पर अपने दोगले पन और कथनी करनी पर सटीक रूप से बेनकाब हो चुका है.चीन लगातार एल. ओ. सी. से लगे प्रदेश में घुस पैड बनाए हुए है. लिहाज केन्द् सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि चीन सीमा बार्डर पर हालत बेहद नाजुक है. जिसको देखते हुए सरकार ब्रह्म मिसाइल को बार्डर पर ले जाना चाहते हैं.रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सेनाओं को बेहद कम समय के नोटिस पर तैयार रहने के लिए कहा है. काबिलेगौर है कि डै्गन ने पडो़सी देश नेपाल की भूमि पर भी अधिपत्य जमा रखा है. भू लालची
चीन लगातार अरुणाचल तिब्बत सिलीगुड़ी भूटान हिमाचल प्रदेश में कोई न कोई कारनामा करता आ रहा है.अरुणाचल ही नहीं भूटान तिब्बत और चिकन नेक सिलीगुड़ी के पास भू माफिया चीन सड़क का निर्माण कर रहा है. विस्तार वादी डै्गन तिब्बत स्वशासित झेत्र की चुकी घाटी में अपने पैर को जमा रहा है. काबिलेगौर है कि रिजाल्युशन सैटेलाइट के जरिये डै्गन भूटानी इलाके से होते हुए तोहफा नदी के किनारे सड़क को बनाते हुए देखा गया है बरहाल पिछले 37 सालों में दोनों देशों के बीच 24 चरणों की वार्ता एवं विशेषज्ञ समूह की बैठक हुई. लिहाजा सीमा विवाद के समाधान के लिए भूटान और डै्गन के बीच तीन चरणों रोड मैप पर अभी हाल में एम. ओ. यू. हुआ है. जो अब अहम भूमिका के साथ नजर आ रहा है. हालांकि भारत के लिए यह चिंता का विषय है.लेकिन भारत ने भी कोई न कोई मास्टर प्लान कर रखा ही है.भारत बखूबी जानता है कि डै्गन पर किसी भी कीमत पर विश्वास नहीं किया जा सकता है. कहीं पर निगाहें कहीं पर निशाना साधने की कम्युनिषटी चीनियों की रही है. लद्दाख में पी.एल.ए. के अतिक्रमण पर जहाँ सब की नजर है. वही भू माफिया डै्गन अपनी आक्रमक गतिविधियों को अंजाम देने की ओर लगातार कदम बड़ा रहा है. लद्दाख में तो सीमा विवाद समस्या को सुलझाने की 13 वी वार्ता को भी टालमटोल कर डै्गन भारत पर ही आरोप लगाने से बाज नही आया है.अब उतराखंड के पश्चात चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी के निशाने पर अरूणाचल प्रदेश बराबर आता रहता है.1959 में डै्गन ने सीमांत क्षेत्र में एक आपरेशन के दौरान असम राइफल्स की चौकी पर हमला कर के अपना कब्जा कर लिया था.इसे लोगजू की घटना ् के तौरपर जाना जाता है. यही पर चीन ने गाँव बसा लिया है. गौरतलब है कि अरुणाचल में चीन के करीब 200 सैनिक तिब्बत की तरफ से घुस गये थे.एल.ए.सी. पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच क्षड़प भी हुई. बीजिंग की न्यूज़ वेबसाइट ने दावा कर डाला है कि 2040 तक डै्गन अरूणाचल पर कब्जा कर लेगा.2020 से, 2060 के बीच में वह भारत ताईवान के साथ सैन्य क्षड़प करेगा. लद्दाख में हुई सैन्य क्षड़प में चीन को भारतीय जाबांजों ने मुहतोड़ जबाब दिया था. डोकलाम भूटान के पश्चिमी भारत में चीन भूटान ट्राईजक्शन है. जो 495 वर्ग कि. मी.तक फैला हुआ है. चीन इतना बेशर्म है कि वह एल. ओ. सी. पर ही षड्यंत्र को लगातार रचता ही रहता है. पाक अधिकृत कश्मीर में पाक आर्मी आई. एस. आई के अफसरों के लगभग 40 जवान पी.ओ.के. पहुंचे थे.दरअसल इमरान की कठपुतली सरकार जो डै्गन के इशारे पर नाचता रहता है. चीन यहाँ माडल गाँव बनाना चाहता है.इस के लिए भू माफिया शी जी. पिंग ब्लूप्रिंट तैयार कर चुके हैं. जिनमें केन जुलानिया वैली भी शामिल हैं. यहाँ पर हाईटेक एक्यूमेन्ट भी लगाने का मन बना चुका है . दरअसल जम्मू कश्मीर में 1954 कि. मी.का हिस्सा चीन की सीमा से जुड़ी हुई है.अरूणाचल के 1080 कि.मी. उत्तराखंड में 463 कि. मी. हिमाचल में 345 कि. मी. सिकि्म से 220 का कि. मी. का बार्डर जुड़े हैं. डै्गन अरूणाचल में 90 हजार वर्ग कि. मी. पर अपना दावा करता है. भारत का कहना है कि डै्गन ने अक्साई चीन के 38 हजार वर्ग कि. मी. क्षेत्र अवैध रूप से कब्जा कर रखा है. काबिलेगौर है कि चीन को दझिणी तिब्बत बताता है.1912 तक तिब्बत और भारत के बीच कोई स्पष्ट रेखा नहीं खीची गयी थी.तवांग में जब बौद्ध मंदिर मिला तो सीमा रेखा का आकलन शुरू हुआ.1914 में शिमला में. तिब्बत चीन ब्रिटिश के बीच बैठक हुई डै्गन ने शुरू से ही तिब्बत को स्वतंत्र देश नहीं माना ना ही 1914 के समझौते को माना.चीन ने 1950 में तिब्बत को अपने कब्जे में ले लिया था. डै्गन के शातिर दिमाग ने 1950 के दशक के मध्य से भारतीय इलाके में अतिक्रमण शुरू कर दिया था 21 अक्टूबर 1957 में लद्दाख के काग का मेंगोली बारी मे करके चीन ने 17 भारतीय सैनिकों को शहीद कर दिया था. धोखेबाज चीन ने इसे आत्मरक्षा में की गई कार्य वाही बताया था. बदहाल डै्गन की भारत समेत 14 देशों के साथ 22 457 कि. मी. लंबी जमीन से जुड़ी सीमा है. सीमा वार्ता को अपने हिसाब से डै्गन नहीं साध सका तो नियंत्रण रेखा को सही ठहराने के लिए नये लैड बाऊडरी कानून को पास कर उसे अमलीजामा पहनाना चाहता है. चीन के नये कानून में समुद्र सीमाओं की बात नहीं की गई है.यह कानून केवल भूमि सीमा पर लागू हैं. डै्गन ने अपने कानून में दो शब्दों पर ज्यादा जो र दिया है.प्रोटेक्शन सीमा सुरक्षा दूसरा एक्सप्लाएटेशन यानि विकास सीमा के पास नये घर नये शहर रेल रोड बिजली यातायात सभी सुविधाओं से लैस करेगा. भारत ने इसका कड़े शब्दों में विरोध किया है. भारत का मानना है कि चीन इस तरह के कानून बना कर कुछ भी करले क्योंकि वह मौजूदा व्यवस्था को बदल नहीं सकता है. दोनों देशों के बीच सीमा विवाद का समाधान होना अभी बाकी है.गौरतलब है कि एल एल. ए. सी. से लगे किन्नोर और लाहौल स्पीति जिलों में विगत एक साल से सड़क निर्माण पुल हेलीपैड के निर्माण में तेजी के साथ सैन्य चौकीया भी बना रहा है. सवाल यह पैदा होता है कि भू विस्तार वादी डै्गन ऐसे मंसूबे को अंजाम देकर क्या वह विश्व को यह दिखाना चाहता है कि वह आने वाले समय में वह विश्व विजेता बनेगा.अब वक्त आ गया है कि डै्गन कोइन सभी गतिविधियों के लिए मुंह तोड़ जवाब देना ही होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप बैठने वाले नहीं है. साऊथ ब्लॉक की पैनी नजरें चीन की नापाक हरकतों पर लगी हुई है.बस सही वक़्त सही मौके पर भारत अपना निशाना लगाने से पीछे नहीं रहेगा. डै्गन की चालबाज़ी को नेस्तनाबूत करने के लिए S 400 रूस से यह सुरक्षा कवच जो 400 कि. मी.तक निशाना मार ही नहीं सकता बल्कि यह एंटी डिफेंस से भी लैस है.अगले महीने भारत पहुँच जायेगा. गौर तलब है कि अब भारत डिफेंस सिस्टम से लैस हो चुका है.यह बात चीन बखूबी समक्ष गया है. बेशक चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के 100 साल पूरे हो रहे हैं तो दूसरी ओर डै्गन के राष्ट्रपति शीजिनपिंग अपने अधिकार क्षेत्र को बढाने के लिए तत्पर है. क्योंकि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का अधिवेशन शुरू हो गया है. यदि चीन के राष्ट्र पति आजीवन राष्ट्र पति शीजिनपिंग बने रहे तो यह भारत के लिए भी चिंता का सबब है. लिहाजा एल. ए. सी.पर सीमा विवाद और बड़ा जायेगा.अत. भारत भी अब ऐसे ब्लूप्रिंट तैयार कर चुका है जो डै्गन के द्वारा तैयार हो रहे बिसात पर मात देने के लिए भारत की सैन्य शक्ति तैयार खड़ी है.

रुचि सिंह वरिष्ठ पत्रकाा


