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“ओलीवेशन” की शुभकामनाएं 😊 व्यंग्य.: बिम्मी कालिन्दी शर्मा

 
केपीशर्मा ओली, फाईल तस्वीर

व्यंग्य….. बिम्मी कालिन्दी शर्मा । जब किसी राजनीतिक पार्टी पर सिद्धांत हावी न हो कर कोई व्यक्ति विशेष हावी हो जाता है तब वंहा महाधिवेशन नही ओलीवेशन होता है । नेपाल मे कभी नेकपा एमाले नाम की एक कम्युनिस्ट पार्टी थी जो अब जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली पार्टी बन चूकी है । एमाले के कार्यकर्ता भैंस है तो केपी ओली महाशय उसके देखरेख करने वाले लठैण हैं जिनके पास धनवल और बाहुवल दोनों ही है जिसके कारण भैंसों की पार्टी एमाले उनकी हो गई है ।
यह कैसा किसी राजनीतिक दल का महाधिवेशन हे जिसमें अध्यक्ष या दल के अन्य पदाधिकारी चुनने नहीं दिया जा रहा है । गोप्य भेला, गुप्त मंत्रणा कर के लाठी के वल पर खुद को स्वयंभू अध्यक्ष बनने और माने जाने की कवायद की जारी है । जब किसी राजनीतिक दल के अंदर ही आंतरिक लोकतंत्र नहीं है तो उसी पार्टी के कार्यकर्ता जब नेता या मंत्री बन कर सत्ता में जाएगें तब क्या वह देश में लोकतंत्र को टिकने देगें ? जबज यानी जनता का बहुदलीय जनवाद को तो इन्होंने कब का नदी मे बहा दिया । बस अब एक बहू और एक दल ही बांकी है । जनवाद मे धनवाद और डनवाद हावी है । जिसकी जिंदगी दुसरों की कृपा और उधार पर टिकी है वह पार्टी अध्यक्ष बनने के लिए उन्हीं भावनाओं को बेच रहा है ईमोशनली ब्लैकमेल कर के । एमाले के कार्यकर्ता ओली के लिए सती जाने को भी तैयार हैं तो भेंड बन कर ओली को ऊन की गर्मी देना कौन सी बडी बात है ।
ईस देश में सिर्फ दो किस्म के ईंसान पैदा हुए एक तो शासक और शोषक दुसरा दास और गुलाम । ओली जैसे मानसिकता वाले लैग शासक बन कर अपने कार्यकर्ताओं को दास मान कर खुब शोषण करते हैं । कार्यकर्ता भी अपना शोषण होने में फख्र मानते है । क्यैं कि उन्हें उनके आकाओ ने सिखाया ही यही है । अब भैंस को त लाठी से ही खदेड़ा जाएगा और ओली वही कर रहे हैं ।
जनता भैंस और भेंड से आगे नहीं बढना चाहती तो कोई क्या करें । देश में भेंडो की भीड बढ रही है और ईनको चराने और सम्हालने के लिए कोई भेडिहर ही चाहिए । ओली वही भेडिहर के खाल में छूपे भेडिया है जो एक ही लाठी से सबको साध रहे है । वैसे भी सभी राजनीतिक पार्टियां एक ही डाली के अगूंर है जो मिठे नहीं खट्टे है । नेपाली काग्रेंस के महाधिवेशन में गोली चलता है जिससे महाधिवेशन गोलीवेशन मे परिणत हो जाता है और केपी ओली कुछ ऐसा जादू करते है कि सभी कार्यकर्ता जबज को भूल कर लोहे की तरह उनके मुहावरों के चुम्बकीय आकर्षण में फंस कर ओलीवेशन पर मुहर लगा देते हैं ।
लोकतंत्र दुहाई दे कर लोकतंत्र को ही लूटा जा रहा है और देव के नक्शे से ईसे लोप किया जा रहा है । कमिने नेता है खुद को कम्युनिस्ट कह रहे हैं और बजार में बिकने के लिए तैयार है । धर्म को अफीम भी यही बोलेगें और राम का नाम ले कर गँगा जी में डुबकी भी यही लगाएगें । वर्गीय चिंतन भी ईन्ही कमिने कम्युनिस्ट करेगें और समाज का वर्गीकरण करने में भी नही शर्माएगें । क्यों कि ईनमे अपने राजनीतिक दल के प्रति न कोई आस्था है न सिद्धांतों के प्रति कोई निष्ठा । ईनके लिए राजनीति और दल कामधेनू गाय है जिसे दूहने में ही यह अपनी सारी योग्यता को दांव पर लगा रहे है । ईसी लिए तो महाधिवेशन ओलीवेशन में परिणत हो गया ईन्ही भैंस जैसे कार्यकर्ताओं के बदौलत । ईन्हें तो बस भैंस की तरह पगुराना आता है । बांकी अपने दल का सिद्धांत तो ईनके लिए बीन बजाने जैसा ही है । जितना भी बजाईए यह बह मूंडी हिलाएगें क्योंकि ईनकी आत्मा और विवेक बहरा हो चूका है । ओली को खुदा और उनके पैरों तले जन्नत मानने वाले सभी भैसों को ओलीवेशन की शुभकामना ।

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