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मनुमुक्त ‘मानव’ ट्रस्ट ने इंडोनेशिया के दो साहित्यकारों को किया सम्मानित

 


*योगिता व आशीष शर्मा को मिला विशिष्ट हिंदी-सेवी सम्मान*

नारनौल। मेडान (इंडोनेशिया) के दो प्रमुख हिंदी-साहित्यकारों- योगिता शर्मा और आशीष शर्मा को नारनौल पधारने पर आज सम्मानित किया गया। स्थानीय सैक्टर-1, पार्ट-2 स्थित अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र मनुमुक्त भवन में आयोजित एक सम्मान-समारोह में सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बड़ी (राजस्थान) के कुलपति डॉ उमाशंकर यादव, चीफट्रस्टी डॉ रामनिवास ‘मानव’, ट्रस्टी डॉ कांता भारती और अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, नारनौल के अध्यक्ष डॉ जितेंद्र भारद्वाज ने अंगवस्त्र, सम्मान-पत्र और स्मृति-चिन्ह भेंटकर उन्हें ‘डॉ मनुमुक्त ‘मानव’ विशिष्ट हिंदी-सेवी सम्मान’ से सम्मानित किया।
इस अवसर पर एलपीजीआई साहित्यिक एसोसिएशन, मेडान की संस्थापक और अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष योगिता शर्मा तथा इंडियन एक्सपैट्रियेट एसोसिएशन, मेडान के अध्यक्ष आशीष शर्मा ने बताया कि इंडोनेशिया में अनेक संस्थाएं हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में सक्रिय हैं, जिसके कारण वहां हिंदी की स्वीकार्यता बढ़ रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विश्व के सबसे बड़े मुस्लिम राष्ट्र इंडोनेशिया पर हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति की इतनी गहरी छाप है कि वहां भारतीयों को कभी कोई कठिनाई नहीं होती। चीफट्रस्टी डॉ रामनिवास ‘मानव’ ने प्रवासी भारतीयों को भारत का सांस्कृतिक दूत बताते हुए कहा कि वे विभिन्न देशों को भारत के साथ जोड़ने का महत्त्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। कुलपति डॉ उमाशंकर यादव ने ट्रस्ट को बधाई देते हुए कहा कि यदि प्रवासी भारतीय भारत को विदेशों से जोड़ रहे हैं, तो मनुमुक्त भवन प्रवासी भारतीयों को भारत से जोड़ रहा है। समारोह में इंडोनेशिया के युवा गायक एवं संगीतकार अभिलक्ष शर्मा भी उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि अभिलक्ष शर्मा को ट्रस्ट द्वारा गत वर्ष डॉ मनुमुक्त ‘मानव’ विशिष्ट युवा-सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। कार्यक्रम के अंत में आशीष शर्मा द्वारा अपनी पुस्तकों का एक सैट डॉ रामनिवास ‘मानव’ को भेंट किया गया।
कार्यक्रम में फरीदाबाद की प्रेमलता कपिल और अनिल कुमार, रेवाड़ी के मुंशीराम तथा नारनौल के कृष्णकुमार शर्मा, एडवोकेट और पूर्व पार्षद् महेंद्रसिंह गौड़ की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

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