अगहन रविवार को महा-रविवार व्रत

*कल नवमी को उत्तराभाद्रपद नक्षत्र एवं सिद्धि योग में महा -रविवार व्रत किया जाएगा।*
*शुक्ल पक्ष के मध्य में होने से यह व्रत कल ही करना उत्तम होगा। कल प्रातः स्नानादि करने के बाद रोली मण्डित निर्मित सूर्यमूर्ति प्रतिमा, या एक थाली में यंत्र प्रतिमा बनाकर गन्धाक्षत आदि से विधिवत पूजन करे, मूर्ति के अभाव मे सूर्यदेव की ओर देखते हुवे उनका ध्यान कर थाली या जमीन पर ही उन्हें गन्ध पुष्प आदि अर्पित करे।*
*फिर जल मे लाल पुष्प डालकर सूर्यार्घ्य प्रदान करें, एवं आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ तथा सूर्य मंत्र जप करें एवं नए धान के चिउड़ा गुड़ दही का प्रसाद अर्पण कर गो ग्रास,ब्राह्मण को भोजन सामग्री अर्पित कर स्वयं प्रसाद ग्रहण करें अथवा फलाहार करें। सूर्यास्त के बाद कुछ भी न खाएं फिर अगले दिन स्नान पूजन के बाद व्रत पारण करें।*
*रविवार व्रत के सम्पूर्ण पूण्य प्रभाव से सभी व्रती को उत्तम आयु आरोग्यता, विद्या बुद्धि सम्पन्नता, सामर्थ्य दिव्य तेज एवं सन्मति संस्कार प्राप्त हो। सबके सभी रोग शोक शत्रु समाप्त हो और सूर्य कृपा बनी रहे।* *✍🏻 ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री*
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