34सालो से हिंदी में रमा है रमन पांडेय, हिंदी दिवस पर विशेष

जनकपुरधाम /मिश्री लाल मधुकर । आज विश्व हिन्दी दिवस हैं। नेपाल में भी इस अवसर पर भारतीय दूतावास तथा भारतीय बाणिज्य महादूतावास वीरगंज द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर नेपाल के महोतरी जिला के पिपरा गांव के मधेशवादी नेता रमन पांडेय का जिक्र करना अनिवार्य हैं। रमण पांडेय 34सालो से अपने जुवान से हिन्दी के अलावा कुछ नहीं वोले हैं। पिछले दिनों नेपाल के चर्चित पत्रकार ऋषि धमला ने प्राइम टाइम के लिए नेपाली भाषा में ही इंटरव्यू देने के लिए बाध्य किया। दोनो में काफी नोकझोंक हुआ। रमण पांडेय को ऋषि धमला ने टस से मस नहीं हुआ। वे हिन्दी में ही इंटरव्यू दिए। इनका इंटरव्यू नेपाल में काफी चर्चित रहा। हिंदी वोलने के कसम खाने के पीछे भी कारण हैं। आज से 34साल पहले नेपाल सद्भावना पार्टी का काठमांडू में कार्यक्रम आयोजित किया था।
17बर्षीय रमन पांडेय नेपाल बिद्यार्थी मंच के संस्थापक सदस्य थे। वे भी मंच के व्यवस्थित में लगे थे। हिंदी में मंच संचालन हृदेश त्रिपाठी मंच संचालन कर रहे थे। हिन्दी में कार्यक्रम संचालन होते ही पहाड़िया पुलिस ने डंडा बरसाना शुरू किए। गजेन्द्र नारायण सिंह सहित कई नेता घायल हुए। रमण पांडेय भी इसमें घायल हुए। छह टांके लगे। उसी दिन उन्होंने संकल्प लिया कि जव तक नेपाल में हिन्दी का सम्मान नहीं मिलेगा। वे नेपाली नहीं वोलेंगे। सद्भावना पार्टी हिन्दी को संपर्क भाषा के लिए पार्टी के मेनिफेस्टो में रखे थे। स्व. गजेन्द्र बावू के सपनो को साकार कर रहे हैं। वे मधेशी अधिकार के लिए विना किसी लोभ के लोसपा से जुड़े हुए हैं। आज मधेशवादी नेता हिन्दी को छोड़कर नेपाली तथा मैथिली भोजपुरी की ओर अग्रसर हैं। वहीं रमन पांडेय हिन्दी में रमा है। मधेशी अधिकार के लिए अच्छी पगार की नौकरी को तिलांजलि दे दी है।

