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एजुकेशनल रिर्सच

 

एजुकेशन करियर का हाँट सेक्टर है क्योंकि पर्दे के पीछे इन्हीं के रिर्सच बेस पर कोई कोर्स अपडेट या लाँन्च किए जाते हैं। इनका मेन वर्क एजुकेशन फील्ड में रिर्सच करके सोसायटी को एडवांटेज पहुंचाना है। इसमें कौन सा कोर्स स्टूडेंट्स के लिए बेहतर है – किसमें ज्यादा जाँब मिलेंगे – और इसके प्रमुख कारण क्या है – किसमें जाँब की कमी है – और इसके लिए कौन सा कोर्स लाँन्च करना फायदेमंद होगा – जैसे सवालों के हल तलाशे जाते हैं। एक्सपर्टर््स की मानें तो इसमें जाँब तभी मिलती है, जब संबंधित क्षेत्रों में अच्छा-खासा रिर्सच किया हो।
एजुकेशनल पब्लिशिंगedu
अधिकतर बुक्स पब्लिशिंग हाउस से निकलती हैं। प्राइवेट और गवर्नमेंट लेवल पर कई पब्लिशिंग हाउसेज हैं। इसमें प्रूफ रीडिंग से लेकर एडिटिंग, राइटिंग तक के काम होते हैं। अगर आपके पास एजुकेशन से रिलेटेड ड्रि्री या डिप्लोमा है, तो आप करियर बना सकते हैं।
सिविल र्सर्विसेज
सिविल र्सर्विसेज में जाना चाहते हैं, तो इस सब्जेक्ट में ग्रेजुएशन करके एंट्री ले सक ते हैं। स्टेट और सेंट्रल गवर्नमेंट हर वर्षएग्जाम लेती है। इसके अलावा भी एग्जाम होते रहते हैं।
टीचिंग
इसमें प्राइमरी टीचर से लेकर काँलेजेज में लेक्चरर की जाँब पा सकते हैं। इसकी बैचलर ड्रि्री बीएड के बराबर है। यदि टीचिंग लाइन में एंट्री चाहते हैं, तो आपके लिए कई सारे आँप्शंस हैं। आँनलाइन एजुकेशन कोर्स भी कर सकते हैं।
एजुकेशनल साइकोलाँजी
अगर आप सोशल र्सर्विस के साथ करियर भी चाहते हैं, तो यह फील्ड बेस्ट है। आप काउंसलर बनकर स्टूडेंट्स की हेल्प कर सकते हैं। यहां आपके पास सरकारी व प्राइवेट इंस्टीट्यूट में नौकरी करके एजुकेशन प्राँब्लम्स साँल्व करने के मौके हैं।
बनें पाँलिसी मेकर
एक्सपर्टर््स के अनुसार इस फील्ड में तभी सक्सेस हासिल कर सकते हैं, जब आपमें कुछ अलग करने की भूख हो। इसके साथ ही इंटेलेक्चुअल, कम्युनिकेशनल, आर्ँगेनाइजेशनल स्किल्स के साथ-साथ कंप्यूटर लिटरेसी भी जरूरी है। अगर इस तरह की स्किल्स आप में हैं, तो बेशक इस सब्जेक्ट को चुन सकते हैं। एजुकेशन सब्जेक्ट में संबंधित रिर्सच, पाँलिसी मेकिंग, कम्युनिकेशन स्किल्स, काउंसलिंग आदि में बेहतरीन करियर बना सकते हैं।
एजुकेशनल जर्नलिज्म
मीडिया सेक्टर में यह सेगमेंट पाँपुलर हो रहा है। सभी न्यूजपेपर और न्यूज चैनल एजुकेशन को कवर करते हैं। आपकी रुचि मीडिया फील्ड में है, तो करियर के अनेक रास्ते खुले हैं। इसके अलावा घर बैठे प|mीलांसिंग का स्कोप भी है।
सिविल र्सर्विस
सिविल र्सर्विसेज में यह सबसे स्कोरिंग सब्जेक्ट है। इस कारण इस सब्जेक्ट को काफी स्टूडेंट्स पढते हैं और बेहतर मार्क्स लाकर इसमें सेलेक्ट होते हैं। अगर आपकी रुचि इस फील्ड में है, तो एक आँप्शनल सब्जेक्ट लेकर सिविल र्सर्विसेज की तैयारी कर सकते हैं।
लाँ फर्म्स
लीगल फील्ड में लाँ की ड्रि्री लेने के साथ यदि फिलाँसफी की स्टडी की है, तो दूसरो की अपेक्षा आगे बढने के चांसेज अधिक हो जाते हैं। इसका कारण है कि इस सब्जेक्ट के स्टूडेंट्स को हर बात प्रूफ के साथ में देनी होती है। इस तरह उनका माइंड पहले से एनालिटिकल और तर्कपर्ूण्ा बन जाता है। इसके अलावा रिलीजन, पाँलिटिक्स की नाँलेज उनकी तरक्की में बडा रोल अदा करती है।
एजुकेशन
अगर पढने और पढाने में आपकी रुचि है तो इस फील्ड में करियर बना सकते हैं। काँलेज में लेक्चरशिप के अलावा हायर इंस्टीट्यूट में भी अनेक आँप्शंस हैं। कोचिंग और ट्यूशन से घर बैठे कमाई कर सकते हैं। साथ ही रिक्रूटमेंट कंसल्टेंसी में भी फिलाँसफी स्टूडेंट्स के लिए आँप्शंस हैं।
हिंदी में हैं आँप्शंस
फंक्शनल हिंदी
फंक्शनल हिंदी, हिंदी का वह रूप है, जिसे किसी प्रयोजन विशेष या उद्देश्य से जोडकर देखा जाता है। यानी डेली लाइफ की किसी भी फील्ड में हिंदी कोजिस रूप में इस्तेमाल करते हैं, वही फंक्शनल हिंदी है। आज फंक्शनल हिंदी में छुपी संभावनाओं के कारण न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी इसे अपनाया जा रहा है।
टीचिंग
हिंदी में बीए व बीएड करने के बाद स्कूल्स में टीचर की जाँब मिल जाती है। वहीं काँलेज लेवल पर एमए करने के बाद एम-फिल और पीएचडी के पश्चात लेक्चरर पद पर पहुंचने के आँप्शंस हैं। पीएचडी होल्डर काँलेज व यूनिवर्सिटी लेवल पर कहीं भी लेक्चरर की जाँब पा सकते हैं। टीचिंग के लंबे एक्सपीरियंस पर रीडर और प्रोफेसर भी बन सकते हैं।
मीडिया
देश-विदेश में फैला मीडिया नेर्टवर्क हिंदी स्टूडेंट्स को आकर्ष करियर के रास्ते दे रहा है। हिंदी पर स्ट्राँन्ग कमांड के चलते स्टूडेंट्स को जर्नलिज्म में एंट्री करने में आसानी होती है। स्टूडेंट्स बीए या एमए के बाद जर्नलिज्म में डिप्लोमा या र्सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं। कोर्स के बाद न्यूज पेपर, मैगजीन, न्यूज चैनल में बतौर रिपोर्टर या सब-एडिटर शुरुआत कर सकते हैं। इस फील्ड में काम करने के लिए लैंग्वेज पर कमांड के अलावा मीडिया इंस्टीट्यूट से हिंदी में डिप्लोमा या ड्रि्री करना फायदेमंद है।
टूरिज्म
टूरिज्म में भी इनके लिए जाँब के आँप्शन हैं। इस फील्ड में बेहतर करने के लिए कल्चरल टूरिज्म मैनेजमेंट में भी डिप्लोमा कर सकते हैं।
फिल्म
हिंदी के बढिया जानकार फिल्म और टीवी सीरियल में किस्मत आजमा सकते हैं। केवल एक्टिंग ही नहीं गीत-संगीत, स्त्रिmप्ट राइटर, डायलाँग राइटर के तौर पर भी ग्लैमर फील्ड में खुद को इस्टैब्लिश कर सकते हैं। लैंग्वेज से खेलना, व्यावहारिक या लोकल भाषा का इस्तेमाल भी यहां प्लस प्वाइंट हैं।
हिंदी आँफिसर
हिंदी भाषा अधिनियम का प्रावधान है कि सभी इंस्टीट्यूशन्स को हिंदी आँफिसर रखने हैं। लिहाजा आज इस सब्जेक्ट्स के स्टूडेंट्स के लिए काम के खूब मौके हैं। एंबैसीज में भी हिंदी स्पेशलिस्ट को हाथों-हाथ लिया जाता है।
ट्रांसलेटर
अगर दो या दो से अधिक लैंग्वेजेज पर कमांड है, तो ट्रांसलेटर बन सकते हैं। विभिन्न ट्रैवल एजेंसीज व गवर्नमेंट, प्राइवेट इंस्टीट्यूट्स ऐसे लोगों को मौका देते हैं। मीडिया के क्षेत्र में भी ऐसे लोगों की डिमांड है। इसमें हिंदी की नाँलेज होने के साथ-साथ आपको अंग्रेजी की भी नाँलेज होनी चाहिए।
एग्जाम से आरजे तक
हिंदी से ग्रेजुएट होने के बाद विभिन्न काँम्पिटिटिव एग्जाम से बैंक, ज्यूडिशियरी, सिविल र्सर्विस, स्टेट र्सर्विस के अलावा रेलवे, बैंक आदि में भी जाँब के रास्ते हैं। हिंदी स्पेशलिस्ट के सामने सीनियर-जूनियर हिंदी टाइपिस्ट, स्टेनो, हिंदी असिस्टेंट, ट्रांसलेटर, एडवरटाइजमेंट, स्लोगन राइटर, पू्रफ रर्ीर्डस, क्रिटटिव राइटिंग, रेडियो जाँकी, एर्ंकर्स, काँरेस्पाँन्डेंस, एडिर्टस, हिंदी स्पोर्टर््स कमेंटेटर जैसे कई आँप्शन हैं।
पाँलिटिकल साइंस
कैंपेन सेक्टर
अपनी कंट्री पाँलिटिकल एक्टिविटीज में बहुत आगे है। नेशनल लेवल पर तो कुछ ही बडी पार्टर्ीीहैं, लेकिन स्टेट्स लेवल की पार्टर्ीीको जोड लिया जाए, तो यह बहुत ज्यादा हो जाती हैं। इलेक्शन हो या न हो अपनी एक्टिविटीज की इन्फार्ँमेशन के लिए ये पार्टर्ीीइस सब्जेक्ट के स्पेशलिस्ट को अपाइंट करती हैं।
एनजीओ और सोशल वर्क
गवर्नमेंट और इंटरनेशनल आर्ँगेनाइजेशन्स समय-समय पर बहुत से प्रोग्राम्स चलाती रहती हैं। इसके लिए भी वह पाँलिटिकल साइंस के लोगों को अपने साथ जोडती हैं। इनके साथ जुडकर भी काफी आगे बढा जा सकता है।
टीचिंग सेक्टर
पाँलिटिकल साइंस सभी यूनिवर्सिटीज और इंस्टीट्यूट्स में पर्ढाई जाती है। एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स की संख्या भी अधिक रहती है। अच्छे टर्ीचर्स की तलाश सभी जगह है, जिन्हें सब्जेक्ट की अच्छी नाँलेज है, वे इसके लिए भी ट्रार्ँइ कर सकते हैं। इसके अलावा, सिविल सेवा में भी इस सब्जेक्ट का काफी क्रेज है।
हिस्ट्री में करियर
हेरिटेज मैनेजमेंट
इंडिया में प्राचीन स्मारकों के संरक्षण, खुदाई और रिर्सच का काम तेजी से चल रहा है। पुरातत्व विभाग की सक्रियता हिस्ट्री स्टूडेंट्स को करियर की नई राहें दे रही हैं। इस फील्ड में ग्रोथ के लिए हिस्ट्री की डीप नाँलेज के साथ उसकी इंपार्ँटेस को भी समझना होगा। चीजों का पौराणिक महत्व, खोज-बीन, आकलन में रुचि भी करियर में हेल्पफुल होगी।
इंफार्ँमेशन मैनेजर
टूरिज्म सेक्टर में इंफार्ँमेशन मैनेजर का मेन किरदार है। यहां हिस्ट्री पासआउट्स खुद के लिए चांस तलाश सकते हैं। इस सब्जेक्ट में हिस्ट्री के अर्ंतर्गत देश के विभिन्न ऐतिहासिक और प्राचीन स्मारकों के बारे में बताया जाता है। यदि इंफार्ँमेशन मैनेजर को इसकी नाँलेज है, तो वह आने वाले टूरिस्ट को बेटर तरीके से डील करेगा। इस वर्क के लिए सब्जेक्ट की डीप नाँलेज के साथ कम्युनिकेशन स्किल्स, लैंग्वेजेज की नाँलेज मस्ट है।
गाइड
गाइड पुरातात्विक, ऐतिहासिक महत्व की सभी चीजों की नाँलेज रखते हैं। इतिहास के स्पेशलिस्ट व इसकी एजुकेशन रखने वाले क्वालिफाइड यूथ्स के पास बेटर वर्क आर्ँपर्चुनटीज हैं। बतौर गाइड, ट्रैवल जर्नलिस्ट, ट्रैवल राइटर, प|mीलांस टूर गाइड काम किया जा सकता है। गुड कम्युनिकेशन, प|mेंडली नेचर, कई लैंग्वेजेज की नाँलेज ग्रोथ में हेल्पफुल होगी।
क्यूरेटिंग
क्यूरेटिंग इन दिनों फर्टर्ाा फील्ड है। इसका काम लाइब्रेरीज, म्यूजियम, आर्ट गैलरी, ऐतिहासिक महत्व के स्थलों की देखरेख व संरक्षण-सर्ंवर्धन होता है। म्यूजियम की रोज की एक्टीविटीज, कल्चरल प्रोग्राम्स को आर्ँगेनाइज करना इनका ही काम है। इस फील्ड में ग्रोथ के लिए हिस्ट्री, म्यूजियम स्टडीज व रिलेटेड सब्जेक्ट्स में मार्स्र्टस होना कंपल्सरी है।
आर्किविस्ट
अपनी जडों से लगाव इस फील्ड में एक्टिव लोगों की स्पेशियलिटी है। एक आर्किविस्ट के तौर पर आपको ऐतिहासिक साक्ष्यों के असेसमेंट, कलेक्शन, मेंटिनेंस, प्रिजर्वेशन जैसे काम करने होते हैं। एक्सपर्टर््स मानते हैं कि हिस्ट्री के साथ बायोलाँजीरबाँटनी, कार्बन डेटिंग की नाँलेज यहां हेल्पफुल है।
अदर सेर्क्र्टस
हिस्ट्री के स्टूडेंट्स के लिए भी कई तरह के हाँट आँप्शन्स मौजूद हैं। वे चाहें तो एजुकेशनिस्ट, आर्कियोलाँजिस्ट, रिर्सचर, हिस्टोरियन, हिस्ट्री टीचर, राइटर के तौर पर विभिन्न आर्ँगेनाइजेशन्स के साथ वर्क कर सकते हैं। अगर हिस्ट्री के स्टूडेंट की सामाजिक सरोकारों में रुचि है, तो उसके लिए एनजीओ में भी कई आँप्शंस हैं। एनजीओ के साथ जुडकर वह देश ही नहीं, विदेश में भी काम कर सकता है।
पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन
एडमिनिस्ट्रेटिव आँफिसर
अगर आप में डिसीजन लेने की एबिलिटी और आगे बढकर जिम्मेदारी उठाने की क्षमता है, तो आप एडमिनिस्ट्रेशन की ओर रुख कर सकते हैं। सिविल र्सर्विसेज और स्टेट लेवल के एग्जाम में सक्सेस पाकर आप गवर्नमेंट कीपाँलिसी मेकिंग में भी अहम रोल अदा कर सकते हैं।
काँरपोरेट मैनेजर
स्ट्राँन्ग लीडरशिप, प्राँब्लम साँल्विंग कैपेसिटी है और एजुकेशन के दौरान यूजी और पीजी लेवल पर पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन सब्जेक्ट रहा है, तो काँरपोरेट की ओर रुख कर सकते हैं। इसमें हैवी सैलरी के साथ ही मैनेजेरियल स्किल्स डेवलप करने की जरूरत होती है।
कंसल्टेंट
इन दिनों इस तरह के प्रोफेशनल की काफी डिमांड है, क्योंकि गवर्नमेंट और प्राइवेट सेक्टर की सभी कंपनीज व इंस्टीट्यूट अच्छे वर्क के लिए बेहतर एंप्लाई चाहते हैं। एंप्लाई की क्वाँलिटी को इंपू्रव करना इनका मेन वर्क है। इसके अलावा प्रोग्राम डेवलपमेंट, पब्लिक रिलेशन, मार्केटिंग और आर्ँगेनाइजेशनल पाँलिसी में भी ये मेन रोल अदा करते हैं। यदि आप में पैशन, डिसीजन, मेकिंग कैपिसिटी है, तो आप इस फील्ड को आजमा सकते हैं।
एजुकेशन
गवर्नमेंट और प्राइवेट इंस्टीट्यूशंस में पब्लिक एड के जानकार रखे जा रहे हैं, क्योंकि कैंपस प्लेसमेंट में स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग देने का वर्क इन्हीं के जिम्मे होता है। इसके साथ हृयूमन रिसोर्स मैनेजमेंट, हेल्थ केयर एडमिनिस्ट्रेशन में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन से पीजी या हायर एजुकेशन करने वाले स्टूडेंट्स को प्रिफरेंस दी जाती है। काँलेज में लेक्चरर बनकर भी करियर संवार सकते हैं। एजुकेशन सेक्टर में सैलरी भी ठीक-ठाक है। इसके अलावा भी करियर के आँप्शन इस सब्जेक्ट में काफी हैं।
होम साइंस
डायटिशियन एंड न्यूटि्रशनिस्ट
लाइफ स्टाइल तेजी से बदल रही है। लोग खुद तो अच्छा दिखना चाहते ही हैं साथ ही अपने घरों को भी अच्छा दिखाना चाहते हैं। इस समय डायटिशियन एवं न्यटि्रशनिस्ट की डिमांड बहुत है। गवर्नमेंट और प्राइवेट दोनों ही जगहों पर अच्छी वर्क अपार्ँर्च्युनिटीज हैं। यहां हाँस्पिटल, इंडस्ट्री में भी काम किया जा सकता है। चाहें तो लोगों के पर्सनल हेल्थ एडवाइजर का भी वर्क आँप्शन चुन सकते हैं। इसमें काँम्पिटिशन तो है, लेकिन एक बार पकड बन गई तो फिर नेम और फेम दोनों ही आसानी से मिल जाता है।
टीचिंग
कंट्री में होम साइंस को मेन सब्जेक्ट के रूप में बहुत जल्दी ही पढाया जाना शुरू कर दिया जाता है। इसलिए ज्यादातर स्कूल एवं काँलेजों को बेहतर होम साइंस टर्ीचर्स की तलाश रहती है। इस सब्जेक्ट की कोचिंग चलाकर भी बढिया आँक्यूपेशन बनाया जा सकता है।
काँम्पिटिटिव एग्जाम
अगर आप इस सब्जेक्ट में काँम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी करते हैं, तो आपको बेहतर अवसर मिलते हैं। प्रायस् सभी एग्जाम में होम साइंस लेकर स्टूडेंट्स एग्जाम देते हैं और सक्सेस होते हैं।
साइकोलाँजी में करियर
क्लिनिकल साइकोलाँजिस्ट
ये मनोवैज्ञानिक समस्या से पीडित व्यक्तियों को मेडिसिन और र्सर्जिकल तरीके से ठीक करते हैं। यह एक बडा सेक्टर है, जिसमें हेल्थ साइकोलाँजी, न्यूरो साइकोलाँजी और जेरो साइकोलाँजी भी शामिल है।
काउंसलिंग साइकोलाँजिस्ट
कैसे किसी खास साइकोलाँजिकल प्राँब्लम से बाहर निकलना है, काउंसलिंग साइकोलाँजिस्ट यही बताते हैं। इसके लिए ये इंटरव्यू, टेस्ट आदि की मदद लेते हैं।
एजुकेशनल साइकोलाँजिस्ट
ये टीचर, स्टूडेंट्स, एडमिनिस्ट्रेशन एवं पैरेंट्स की प्राँब्लम्स का साँल्व करते हैं। इसके अलावा, इंडस्टि्रयल साइकोलाँजिस्ट, रिर्सच साइकोलाँजिस्ट, सोशल साइकोलाँजिस्ट आदि के रूप में भी काम कर सकते हैं।
टीचिंग और एग्जाम में आँप्शन
हर काँलेज व स्कूल में इस सब्जेक्ट के टीचर रखे जाते हैं और सिविल र्सर्विसेज में बहुत सारे स्टूडेंट्स इसे लेकर एग्जाम पास करते हैं।
संस्कृतःओल्ड इज गोल्ड टीचिंग
संस्कृत एजुकेशन प्राइमरी से ही कोर्स का पार्ट है और इसमें हम रिर्सच तक कर सकते हैं। टीचिंग यहां भी एक बेटर आँप्शन है। इसके लिए सब्जेक्ट की डीप नाँलेज जरूरी है। इसमें आगे बढने के लिए सीखने की लगन और भाषा व्याकरण पर कमांड होना जरूरी है, क्योंकि व्याकरण के मामले में संस्कृत को बेहद डेवलप्ड लैंग्वेज माना जाता है।
डिफेंस
डिफेंस सेक्टर में धर्माचार्य पोस्ट के लिए जाँब निकलती हैं। संस्कृत में हायर एजुकेशन लेकर इसके लिए अप्लार्ँइ कर सकते हैं।
मैन्युस्त्रिmप्टोलाँजी और पेलोग्राफी
विभिन्न कंट्रीज में प्राचीन लैंग्वेजेज पर रिर्सच हो रहे हैं। इसमें संस्कृत भी शामिल है। इसकी पांडुलिपियों को पढने वाले स्पेशिलिस्ट्स की डिमांड है। जो लोग संस्कृत पर कमांड रखते हैं, वे इन रिर्सच ग्रूपस के साथ जुड सकते हैं। इसके अलावा, आँनलाइन पूजा का भी क्रेज अब बढ रहा है। इसमें भी चांस आजमाया जा सकता है। अच्छी नाँलेज है तो मीडिया में न्यूज एंकर या रीडर भी बना सकते हैं।
सोशियोलाँजी में मल्टीपल आँप्शंस
सोशल रिर्सच
गवर्नमेंट सोशल सेक्टर पर ज्यादा ध्यान दे रही है, इस कारण उन्हें ऐसे यूथ की जरूरत है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, विवाह, सामाजिक रीतियों आदि के बारे में न सिर्फतथ्यपरक र्सवेक्षण करें बल्कि गवर्नमेंट को अपने इनपुट्स की बदौलत विकासपरक नीतियां बनाने में मदद करें। सरकारी व गैर-सरकारी दोनों ही क्षेत्रों में सोशल रिर्सचर के लिए आँप्शंस हैं। इंडियन काउंसिल आँफ सोशल साइंस रिर्सच, एनजीओ, सेंटर फाँर सोशल रिर्सच, मानव संसाधन मंत्रालय, बाल पोषण, शिक्षा जैसे कई क्षेत्रों में सोशल रिर्सचर्स की रिक्वाँयरमेंट है।
पब्लिक पाँलिसी एनालिस्ट
इसका काम रिर्सच व स्टडी के जरिए सरकार द्वारा चलाई जा रही नीतियों का विश्लेषण, मौजूदा कमियों की स्टडी कर उन पर सलाह देना है। टैक्स पाँलिसी एनालिस्ट, क्रिटिकल इंप|mास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन पाँलिसी, सिक्योरेटी पाँलिसी एनालिस्ट जैसे क्षेत्रों में सोशियोलाँजी या फिर एंथ्रोपोलाँजी में मास्टर ड्रि्री होर्ल्र्डस के लिए चांसेज हैं।
एनजीओ
इन दिनों देश व समाज में अलग-अलग मुद्दों पर कई एनजीओ -नाँन-गवर्नमेंट आर्ँगनाइजेशन) कार्यरत हैं। यदि आपके भीतर समाज के लिए कुछ करने की चाहत है तो इनके साथ जुड सकते हैं। हालांकि यहां विषय की बाध्यता नहीं है, फिर भी इस सब्जेक्ट की नाँलेज आपको फील्ड में कदम दर कदम इस्तेमाल होगी। निर्धन, पीडितों, शोषितों के प्रति गहरी संवेदना व उनके कल्याण के लिए र्समर्पण भाव जैसी चीजें कार्यक्षेत्र में जरूरी हैं।
मार्केट रिर्सच
इस क्षेत्र में सोसायटी व उसके ट्रेंड की समझ रखने वाले युवाओं को मौका दिया जाता है। दरअसल, आज कंज्यूमर प्रोडक्ट बनाने वाली ज्यादातर कंपनियां अपने उत्पाद की सेल से लेकर डेवलपमेंटके लिए मार्केट रिर्सच पर बेस्ड हैं। ऐसे में यहां क्वाँलिफाइड लोगों को हायर किए जाने के अच्छे चांसेज हैं। मार्केट की बेहतर परख, बदलते ट्रेंड्स की नाँलेज, शानदार कम्युनिकेशन यहां आपके बहुत काम आएगी। र्
र्सवे रिर्सचर
सोशियोलाँजी में कोर्स के बाद आपके करियर आँप्शंस में इजाफा हो जाता है। इस क्षेत्र में क्वाँलिफाइड यूथ के पास हृयूमन रिसोर्स मैनेजमेंट, फाँरेन र्सर्विस आँफिसर, डाटा एनालिस्ट, प्रोजेक्ट मैनेजर, र्सवे रिर्सचर, टूरिज्म, हृयूमन राइट आँफिसर आदि के तौर पर काम के असीमित मौके हैं। िि
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