Thu. Jul 30th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

“गिरगिट” व्यग्ंय लेख:- बिम्मी कालिन्दी शर्मा,

 

बिम्मी कालिन्दी शर्मा, व्यग्ंय , बिरगंज । राजनीति के जंगल मे बहुत सारे रंग के गिरगिट पैदा हो गए हैं जो दल नाम के पेडों में फुदकते रहते हैं । कभी ईस दल के पेड में तो कभी उस दल के पेड में । चुनाव नजदिक आ रहा है ईसी लिए योग्यता विहीन गिरगिट नेता पेड बदल कर ही अपने मतदाताओं को आकर्षित कर रहे हैं । अब जिसके पास जितनी योग्यता होगी वह उतना ही योग्यता दिखाएगा । गिरगिट की योग्यता होती है रंग बद्लना और नेताओं की प्रमुख योग्यता मानी जाती है दल बदलना । जिस नेता ने जितने ज्यादा दल बदले वह उतना ही अनुभवी कहलाया ।
गिरगिट का अपना कोई रंग नही होता । वह जंहा जिस जगह या पेड पर रहता है उसी रंग का बन जाता है । घर के अंदर पाए जाने वाले गिरगिट सफेद रंग के होते हें तो जंगल या पेड पौधों में पाए जाने वाले गिरगिट हरे रंग के । गिरगिट जगह देख कर रंग बदल लेता है । ईसी लिए गिरगिट को कोई पंसद नहीं करता । वैसे भी गिरगिट की शारीरिक संरचना घडियाल से मिलती है । और नेता भी घडियाल जैसे ही होते है । जनता के आगे अच्छे बन कर घडियाली आंसू बहाते हैं पर दिल में मक्कारी भरी होती है । ईन्हे तो जैसे भी चुनाव जितने है । और चुनाव जितने के लिए चुनाव के परिणाम आने तक यह सब जानवरों का करतब दिखा कर खुद ही एक चीडिया घर बन जाते हैं ।
चुनाव जो न कराए कम है । ‘ईधर का माल उधर, उधर का माल ईधर’ के तर्ज पर ईस दल के नेता उस दल पर और उस दल के नेता ईस दल पर प्रवेश कर रहे हैं । दल का सुप्रिमो राजतिलक लगा कर और फूल माला पहना कर ऐसे उनका स्वागत कर रहा है जैसे कि दल बदलू नेता सिकंदर ही हो । पर अब जनता भी चालाख लोमडी जैसी हो गई है । यह दल बदलू घडियाली गिरगिट नेता को कब सिकंदर से बंदर बना देगी मालूम नहीं ।
यह गिरगिट जैसे नेता थाली के बैगंन ही हैं जो एक जगह या पार्टी में टिकते ही नहीं । राजनीतिक दल थाली जैसी ही हैं जिसमें बैगंन रुपी नेता लुढक कर दुसरे छोर या पार्टी में पहुंच जाते हैं । ऐसे नेता को ‘बिन पेंदी के लोटा’ भी कहते हैं । जिस लोटे के निचे पेंदी नहीं होता वह लोटा एक जगह टिकता ही नहीं । लुढक कर कभी ईधर तो कभी उधर गिरता ही रहता है । वास्तव में जिस नेताओं को अपनी काबिलियत पर बिश्वास नहीं होता और सिद्दांत पर कोई पकड या आस्था नहीं होती वही नेता कपडे कि मानिंद पार्टी बदलता है । ईन दल बद्लू नेताओं को सत्ता सुंदरी ईतनी भाती है कि उसका आंचल किसी भी हालत में छोड्ना ही नहीं चाहते । और सत्ता सुंदरी के हाथों में पैसा और पावर रुपी ‘सुरा’ है जिसे वह अपने खादिमों को बांट रही है । अब कौन नेता ईस सुरा को पी कर मदहोश होना नहीं चाहेगा ? हम साल में जितने कपडे नहीं बद्लते उतने तो यह नेता पार्टी बदल लेते हैं ।
नेता के पास बैंक बैलेंस तो बहुत है पर वोट बैंक जिरो है । अब जिरो को भी तो हिरो बनने की ईच्छा होती ही है । ईसी लिए कौन पांच साल तक देश और जनता के लिए काम कर के उन पर अच्छा प्रभाव डालने का जहमत उठाए ? जैसे उपर से चोगा पहन कर अंदर की गंदगी को छुपाया जाता है ठीक उसी तरह यह गिरगिट नेता पार्टी बदल कर अपनी एबों को ढकने कि कोशिश करते है । यदि किसी नेता को अपनी योग्यता और तागत पर ईतना ही बिश्वास है तो बिना किसी दल के लपेट में आए ही स्वतंत्र रुप से उठे और जीत दिखाएं ? पर बेचारे पार्टी की बैशाखी के बिना उठ भी नहीं सकते जितना तो दूर की बात है । वास्तव में ताकत सत्ता की होती है और जिस नेता को आदमखोर शेर कि तरह सत्ता की ताकत का चस्का लग जाता है वह हर हाल में जितना ही चाहता है । ईसके लिए वह पार्टी तो क्या अपना ‘जेंडर’ भी चेंज कर ले तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है ।
ईसी लिए पार्टी नेताओं.को देख कर उदास मत हो । अभी नएं-नएं नेता बने है खुराफात तो करेगें ही ।.धैर्य और गंभीरतारता तो ईनमें रत्तीभर भी नहीं है ईसी लिए गिरगिट कि तरह चुनाव के मौसम मे पार्टी बदल रहे हैं । जिसको जो काम आता है वह वही करता है । ईन गिरगिट नेताओं को बस पार्टी बदलना ही आता है बस बदल रहे हैं । अगर चुनाव परिणाम अनपेक्षित रहा और हार गए तो औंधे मुंह गिरेगें और लौट के बुद्धु वापस पुरानी पार्टी में भी आ सकते हैं । कभी-कभी अपना ही पुराना कपडा पहनना भी काफी सुकुन देता हैं जब बारिश में सभी कपडे भीग गएं हो तब । यह चुनाव भी तो एक बारिश ही है जो ईन गिरगिट या मेढक जैसे नेताओं को भिगो कर पारदर्शी कर के उनकी औकात सब को बता देता है । तो गिरगिट नेता जी एक पार्टी से दुसरी पार्टी में प्रवेश करते रहिए हम ताली बजाते रहेगें । क्यों कि आप भालु है और पार्टी मदारी और हम ईस देश के अवाम तमाशाई हैं ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *