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हमें नया बिहार गढ़ना है : अमित कुमार

 

हमें नया बिहार गढ़ना है।

हमें वैशाली वाला लोकतंत्र गढ़ना है।
हमें संस्कृति और सम्मान वाला बिहार गढ़ना है।
हमें बुद्ध,नानक,महावीर गढ़ना है।
हमें जयप्रकाश जैसा बुद्धिमान गढ़ना हैं.
हमें तो नया बिहार गढ़ना है।
हमें सहजानंद जैसा किसान गढ़ना है।
हमें श्री बाबू जैसा इंसान गढ़ना है।
हमें नालंदा वाला ज्ञान गढ़ना है।
हमें वशिष्ठ जैसा विद्वान गढ़ना है
हमें चाण्क्य और आर्यभट्ट गढ़ना है।
हमें तो नया बिहार गढ़ना है।
हमें शारदा और उदित नारायण वाला बिहार गढ़ना हैं।
हमें नागार्जुन और कर्पूरी जैसा इंसान गढ़ना हैं।
हा हा हमें नया बिहार गढ़ना हैं।
हमें चंपारण क्रांति का मिसाल गढ़ना है।
हमें राजकुमार शुक्ला गढ़ना हैं।
हमें भुल्लर और गुलजार गढ़ना हैं।
अजी हमें तो विधापति और नेपाली गढ़ना हैं।
हमें दशरथ मांझी जैसा प्यार गढ़ना है,
आजी हा मुझे नया बिहार गढ़ना हैं।
हमें राजेन्द्र प्रसाद जैसा बिहार गढ़ना हैं।
हमें बैकुंठ और योगेंद्र,बसावन जैसा क्रांतिकारी गढ़ना है।
हमें जनक और माता सीता का बिहार गढ़ना हैं।
हमें विद्यापति वाला बिहार गढ़ना हैं।
हमें चंद्रगुप्त और अशोक का बिहार गढ़ना हैं।
हमें रेणु और बाल्मीकि वाला बिहार गढ़ना हैं।
हमें मिथिला वाला संस्कार गढ़ना हैं।
हमें बौद्धिकता आध्यात्मिकता वाला बिहार गढ़ना है।
हमें जिद्दी मेहनती बिहार गढ़ना है।
हमें तो दिनकर वाला बिहार गढ़ना है।
हमें नया बिहार गढ़ना है।
हमें गोविंद सिंह और कुँवर सिंह वाला ललकार गढ़ना हैं आजी हा हा मुझे तो नया बिहार गढ़ना हैं।

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अमित कुमार।

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