जनमत संग्रह के जरिये नेपाल को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने का समर्थन : मंत्री आले
काठमांडू, 31 मार्च। नेपाल सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने गुरुवार को नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि अगर देश के अधिकांश लोग इसके पक्ष में है तो इसे जनमत संग्रह के जरिए समाधान किया जा सकता है।
पर्यटन और संस्कृति मंत्री प्रेम अली ने काठमांडू में वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन की दो दिवसीय कार्यकारी परिषद की बैठक के उद्घाटन को संबोधित करते हुए कहा कि नेपाल को हिंदू राज्य घोषित करने की मांग पर विचार किया जा सकता है और अगर ऐसी मांग आती है तो वह “एक रचनात्मक भूमिका निभाएंगे” इसको पारित करने में।
मंत्री अले यहां कार्यक्रम के दौरान विश्व हिंदू महासंघ द्वारा उठाई गई मांग का जवाब दे रहे थे। दो दिवसीय कार्यकारी परिषद की बैठक में नेपाल, भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, मलेशिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी और यूके सहित 12 देशों के 150 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
मंत्री महोदय ने कहा कि “चूंकि वर्तमान पांच-पार्टी गठबंधन सरकार को संसद में दो तिहाई बहुमत प्राप्त है, नेपाल को एक हिंदू राज्य घोषित करने की मांग को जनमत संग्रह में रखा जा सकता है।”
उन्होंने पूछा, “हालांकि हमारे संविधान ने देश को एक धर्मनिरपेक्ष राज्य घोषित किया है, लेकिन अगर बहुसंख्यक आबादी हिंदू राज्य के पक्ष में है, तो जनमत संग्रह के माध्यम से नेपाल को हिंदू राज्य क्यों नहीं घोषित किया जाता है?” 2006 के जन आंदोलन की सफलता के बाद नेपाल को 2008 में एक धर्मनिरपेक्ष राज्य घोषित किया गया था, जिसमें राजशाही का उन्मूलन किया गया। हिंदू धर्म नेपाल का सबसे बड़ा धर्म है।
कार्यक्रम के दौरान, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन इंटरनेशनल के अध्यक्ष अजय सिंह ने मांग की कि नेपाल को हिंदू राज्य घोषित किया जाए क्योंकि देश में हिंदू आबादी का एक बड़ा हिस्सा है।
उन्होंने कहा, “मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि तत्कालीन हिंदू राज्य नेपाल को अचानक एक धर्मनिरपेक्ष घोषित कर दिया गया था।” यह खबर भारत से प्रकाशित TOI में भी छपी है ।





