जयनगर जनकपुरधाम रेलवे का इतिहास है 86साल पुराना

जनकपुरधाम /मिश्री लाल मधुकर । नेपाल रेलवे का इतिहास 86साल पुराना है। विक्रम संवत 1994को जयनगर से जनकपुरधाम होते हुए बिजलपुरा तक नैरो गेज चली थी। रेल चलाने का उद्देश्य था नेपाल की जंगल से सखुआ ढुलाई करना। उस समय भारत में बिट्रिश का राज्य था तथा नेपाल में राजशाही था लेकिन हूकुमत राणा करता था। विक्रम संवत 2018 यानी आज से 70साल पहले विवाह पंचमी के दिन ही जयनगर से जनकपुरधाम से बिजलपुरा तक इस रेल कोयात्री सेवा में वदल दी गयी। उस समय भारत सरकार ने राम, सीता गुहेश्वरी तीन स्टीम इंजन तथा कुछ कोच दिए। जो विक्रम संवत 2051यानी 27साल पहले भारत सरकार ने दो डीजल इंजन तथा कुछ डव्वा दिए। राइट्स कंपनी के एम. वर्गिश के नेतृत्व में इंजीनियर तथा लोको पायलट एक साल रहकर नेपाली रेलवे कर्मचारी को प्रशिक्षण दिए। जव तक स्टीम इंजन पर रेल चला उनकी चाल काफी धीमी थी। 27बर्ष पहले डीजल इंजन आने के बाद इसकी गति में सुधार हुयी। आठ साल पहले जयनगर से जनकपुरधाम रेल सेवा ठप हो गयी। इसके बाद ब्राड गेज रेलवे के निर्माण प्रारंभ हुयी। शनिवार यानी 2अप्रैल को जयनगर से कुर्था तक (29.8)किलोमीटर तक रेल का परिचालन होगा। इसका वर्चुअल उद्घाटन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा नेपाल के प्रधानमंत्री शेरवहादुर देउवा संयुक्त रूप से करेंगे। शुरू में इसका नाम जनकपुर रेलवे। करीब पंद्रह साल पहले इसका नाम नेपाल रेलवे रखा गया। नैरो गेज के समय खजुरी जंक्शन था। अभी नैरो गेज के इंजन, फीश प्लेट आदि रखा है। जो कवाड़ वना हैं।




