‘बाल–प्रतिभा’ बचाने की चिन्ता : लिलानाथ गौतम
लिलानाथ गौतम
आहना खड्का ६ वर्षीया बाल कलाकार हैं । ‘कान्छी अफिसियल’ युट्वुब च्यानल से प्रसारण होनेवाली ‘कान्छी’ टेलिसिरियल में उनकी भूमिका और अभिनय कला बेजोड़ है । इसीलिए आज के दिन आहना लाखों बच्चों के बीच परिचित नाम है । मार्च ६ को काठमांडू में आयोजित एक (सुकुमाया टिभी तथा कान्छी अफिसियल युट्वुब चैनल द्वारा आयोजित) कार्यक्रम में आहना ने अपनी नयी–नयी दोस्त आरती और अनुसा से कहा– ‘क्या आप को पता है– ‘पल दादा को तो पुलिस ने छोड़ दिया है, लेकिन लोग कहते हैं कि अभी तक नहीं छोड़ा है ।’ उसका ‘पल दादा’ वही है, जो एक चर्चित फिल्मी नायक (पल शाह) हैं और जो फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं । उनके ऊपर एक बाल–गायिका के ऊपर यौन हिंसा करने का आरोप है ।
आहना अपनी दोस्तों से पल के संबंध में और भी कुछ कहना चाहती थी । लगता था कि ‘पल दादा निर्दोष हैं’ कहना चाहती है । लेकिन बातों बात में वार्तालाप का विषय बदल गया । पल दादा संबंधी प्रसंग वहीं समाप्त हो गया । लेकिन यहां बालबालिकाओं के मस्तिष्क में फिल्मी नायक तथा सामाजिक रूप में चिर–परिचित पात्रों का प्रभाव किस तरह पड़ता है, वह देखने को मिलता है । आहना के ‘पल दादा’ अर्थात् फिल्मी नायक पल शाह का व्यक्तिगत चरित्र जैसा भी हो, उसके संबंध में आहना कुछ भी नहीं जानती, लेकिन उसके अवचेतन मन के लिए वह एक ‘रोलमॉडल’ है, इसीलिए उनकी गिरफ्तारी के प्रति वह असंतुष्ट दिखाई देती है ।
आहना ने कहा कि उसके ‘पल दादा’ को पुलिस ने छोड़ दिया है । लेकिन यह सत्य नहीं है । आज के दिन भी पल पुलिस हिरासत में ही है । स्मरणीय तो यह भी है कि इसी वक्त विश्वभर ११२औं अन्तर्राष्ट्रीय नारी दिवस की चर्चा जारी है । नेपाल में भी विभिन्न संघ–संगठन विविध कार्यक्रम के साथ इस दिवस को मना रहे हैं । ऐसी ही पृष्ठभूमि में महिलाओं की सुरक्षा तथा बाल यौन–हिंसा से जुड़ी हुई यह घटना सामने आई है, लेकिन आहना जैसी करोड़ो बच्ची ना तो उल्लेखित घटना की सच्चाई जानती है, न तो महिला दिवस । इसीलिए तो अपने ही क्षेत्र से जुड़े हुए एक कलाकार अर्थात् ‘रोलमॉडल’ की गिरफ्तारी के प्रति वह चर्चा करने के लिए इच्छुक दिखाई देती है ।
दुर्भाग्य की बात ! ऐसे ही प्रतिभाशाली बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाने के लिए ना जाने कहाँ–कहाँ ऐसे ‘रोलमॉडल’ छिपे हुए हैं । पल शाह प्रकरण सिर्फ एक उदाहरण है । शाह के ऊपर आरोप है कि उन्होंने एक बालिका के ऊपर बलात्कार और यौन दुव्र्यवहार किया है । पीडÞित किशोरी भी एक चर्चित बाल–गायिका तथा मॉडल हैं । जिसके चलते फिल्मी जगत, सञ्चार माध्यम तथा सामाजिक संजलों में इस विषयों को लेकर काफी बहस जारी है ।

हैरान कर देनेवाली बात तो यह है कि बलात्कार के आरोपी शाह को जब नेपाल पुलिस ने गिरफ्तार किया, तब उनके फ्यान–फलोअर से लेकर कला–क्षेत्र से जुड़े हुए चर्चित व्यक्तित्व और खुद को सामाजिक अभियन्ता बतानेवाले कुछ व्यक्ति शाह को पुलिस हिरासत से मुक्त कराने के लिए मांग करते हुए प्रदर्शन में उतर आए । बलात्कार संबंधी घटना औपचारिक रूप में पुलिस केस बनने से पहले ही शाह और पीडÞित बाल–गायिका के बीच कई ऐसी घटना–परिघटना हुई, जिसका कुछ आडियो रेकर्ड भी सार्वजनिक हो गया, जिससे स्पष्ट होता है कि शाह कानूनी रूप में दोषी हैं । अर्थात् शाह सिर्फ पर्दे के सामने नायक हैं, लेकिन पर्दे के पीछे वह एक खलनायक हैं ।
पीडÞित बाल–गायिका और उनके बीच जो कुछ भी हुआ, उसकी कई तरह से व्याख्या की जा सकती है, जो सामाजिक संजालों में हो भी रहा है । लेकिन अविकसित बाल मनोविज्ञान, किशोर अवस्था की यौन चेतना, सोचने–समझने की उनकी क्षमता तथा कानून दृष्टिकोण से इस घटना में शाह एक पीड़क ही हैं । हां, आज के दिन कानूनी रुप में दोषी प्रमाणित होना बाकी है । इस सच्चाई को जानते हुए भी कला क्षेत्र से ही जुड़े हुए कुछ चर्चित व्यक्तित्व शाह के पक्षधर होकर पुलिस प्रशासन द्वारा शुरु की गई कारवाही के विरुद्ध उतर गए । लेकिन उन लोगों की इस हरकत के विरुद्ध भी आवाज उठने लगी, तब जाकर शाह पक्षधर कुछ पीछे हट गए हैं ।
खैर ! आज पल शाह पुलिस नियन्त्रण में हैं, घटना संबंधी अनुसंधान जारी है । उम्मीद है कि अनुसंधान से सच्चाई सामने आएगी और दोषी के ऊपर कानूनी कारवाही भी होगी । लेकिन पल शाह प्रकरण के बाद जारी बहस में एक और प्रश्न भी सामने आया है, जहां कहा जाता है कि विज्ञान और प्रविधि का विकास, इलोक्ट्रोनिक संचार माध्यम तथा सामाजिक संजाल के प्रयोग आदि के कारण बालबालिकाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है । बहस के दौरान ही कई लोगों ने कहा है कि बालबालिकाओं का श्रम शोषण हो रहा है और उन लोगों की प्रतिभा का दुरुपयोग हो रहा है ।
असुरक्षित बाल प्रतिभा
हां, एक बात तो सच है कि विज्ञान और प्रविधि के क्षेत्र में जो चमत्कारिक विकास हुआ है, उसका प्रभाव संचार जगत में भी है । आज सूचना और मनोरंजन का साधन हर व्यक्ति के हाथ–हाथ में है । लेकिन इसका सही सदुपयोग ही नहीं, दुरुपयोग भी हो रहा है । दुरुपयोग इस तरह हो रहा है कि आज कई ऐसी घटनाएं सामने आती है, जो कल्पना भी नहीं की जाती । लेकिन सच्चाई यह भी है कि इसका सही सदुपयोग के कारण आज लाखों–करोड़ो लोगों के लिए रोजगारी सिर्जित है, नई –नई प्रतिभा का जन्म हो रहा है । विशेषतः युट्वुव, फेशबुक तथा टिकटक जैसे भीडियो मेकिङ प्लेटफार्म आज बच्चों से लेकर वृद्ध–वृद्धा तक के लिए मनोरञ्जन का साधन बन रहा है, कई लोगों के लिए टाइम–पास का माध्यम बन रहा है । खुशी की बात तो यही है कि यही भीडियो प्लेटफार्म के कारण गुमनाम प्रतिभा दुनियां के सामने आ रहे हैं, जिसके चलते वे लोग नाम और दाम दोनों कमा रहे हैं ।
जो बाल–गायिका पल शाह द्वारा यौन हिंसा में पड़ गई, वह भी इसी प्लेटफर्म को प्रयोग करते हुए यहां तक आई थी । सामान्य मोबाइल क्यामरा से लिया गया एक भीडियो (जहां वह गीत गा रही थी) युट्वुब में पोस्ट होने के कारण उनकी प्रतिभा सामने आई थी । कुछ महीनों में ही वह हिट हो गई । व्यस्त बाल–गायिका और मॉडल के रूप में उनका नाम चारों ओर फैलने लगा, आर्थिक दृष्टिकोण से भी उनकी तरक्की हो गई । यह तो सिर्फ एक उदाहण है, जो युट्वुब, फेशबुक तथा टिकटक के कारण रातों–रातों चर्चा में आनेवाले कलाकारों में से एक थी । लेकिन उनके ऊपर यौन–हिंसा संबंधी जो घटना हुई, उसके कारण ही आज सम्पूर्ण बालप्रतिभा भयभीत हैं ।
यहां ऐसे कई बाल प्रतिभा हैं, जो युट्वुब, फेशबुक तथा टिकटक जैसे भीडियो मेकिङ प्लेटफार्म को प्रयोग करते हुए आज चर्चा में हैं, अपनी प्रतिभा खुलकर दुनियां के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं । लेकिन पल शाह प्रकरण के कारण आज हर अभिभावक भयभीत हैं– कहीं हमारे बच्चें भी ऐसी घटना में ना पड़े ! इसी भय के कारण कई लोग बाल प्रतिभा को सामने लानेवालों के ऊपर आरोप लगा रहे हैं कि वे लोग बाल प्रतिभा को दुरुपयोग कर रहे हैं । साथ में बाल श्रम–शोषण का आरोप भी लगाते हैं । लेकिन यह आरोप अर्धसत्य है । सच में तो यह भय के कारण सृजित आरोप है, जो एक अभिभावक की दृष्टिकोण से स्वाभाविक भी है ।
चर्चित बाल प्रतिभा
यहां एक बात उल्लेखनीय है– अगर युट्वुब, फेशबुक तथा टिकटक जैसे भीडियो प्लेटफार्म का उपयोग नहीं किया होता तो आज अशोक दर्जी, समीक्षा अधिकारी, आयुसा गौतम, कमला घिमिरे, रवीना बसेल, राजकुमार बि.क., टेरेसा विश्वकर्मा, सुप्रिम मल्ल, सुरक्षा बाठा मगर, आहाना खड्का, सचिन परियार, वसन्त लामा, मिलन टमटा, जिया भुषाल, प्रिन्स लम्साल, एक्टिमा परियार जैसे बालप्रतिभा तथा कलाकार गुमनाम होते । उल्लेखित नामों में से कुछ ऐसे भी हैं, जिनकी आर्थिक पृष्ठभूमि अत्यन्त दयनीय थी । लेकिन जब वे लोग युट्वुब चैनल के माध्यम से दुनियां के सामने आने लगे और उनकी प्रतिभा बिकने लगी तो आर्थिक जीवन कायापलट हो गई । उदाहरण के लिए रचना रिमाल को ले सकते हैं, जो एक समय चटपटी बेचती थी, साथ में ग्राहकों को गीत गाकर सुनाती थी । एक दिन एक व्यक्ति ने उनका भीडियो बनाया और यूट्यूब में पोस्ट कर दिया । आज वही रचना व्यवसायिक गायिका बन गयी है, गीत गाकर मासिक लाखों कमाती है, व्यस्त गायिकाओं में से एक हैं, उनकी भ्वाइस में गीत रिकार्ड के लिए लोगों की लाइन लगती है । रचना रिमाल एक उदाहरण है, ऐसे कई चर्चित कलाकार हैं, जो यूट्यूब और टिकटक के प्रयोग से ही आज दुनियां में परिचित हैं ।
कुछ साल पहले तत्कालीन ८ वर्षीया आयुषा गौतम कृष्ण कँडेल द्वारा सञ्चालित एक युट्वुब च्यनल में आकर लोकगीत (दोहरी गायन) गाई थी, उनकी प्रतिभा देखकर नेपाली लोकगीत क्षेत्र के मुर्धन्य स्रष्टा आश्चर्य चकित हो गए । जाने–माने और व्यवसायिक गायक–गायिकाओं के साथ ८ साल की बालिका आयुषा प्रतिस्पर्धा करती थी । प्रत्यक्ष गायन के दौरान उनके द्वारा चयन वाक्य और शब्द व्यवसायिक गायकों से कमजोर नहीं थे । उसके तुरन्त बाद कमला घिमिरे आई, आज कमला भी एक व्यवसायिक गायिका के रुप में स्थापित हो रही है । उसके बाद तो कई बाल प्रतिभा दुनियां के सामने परिचित होने लगे, जिसका श्रेय युट्वुब जैसे भीडियो प्लेटफार्म को ही जाता है । कई बाल प्रतिभाओं में से पिछली बार युट्वुब चैनल में प्रवेश करनेवाली सुरक्षा बाठा मगर की चर्चा उल्लेखनीय है । लोकगीत क्षेत्र से जुड़े हुए कई हस्ती उनको सरस्वती का वरदान मानते हैं । आहना खड्का की अभिनय कला भी बेजोड़ है । संक्षेप में इतना ही कहें कि आज बाल प्रतिभा और कलाकार के रूप में जो भी परिचित हैं, उसका श्रेय युट्वुब चैनल जैसे भीडियो प्लेटफार्म को ही जाता है ।
इतना होते हुए भी आज कई व्यक्ति ऐसे प्लेटफर्म बंद करने के लिए सुझाव देते हैं । लेकिन यह समस्या का समाधान नहीं है । स्मरणीय बात तो यह है कि परम्परागत और मूलधार की संचार माध्यमों में कभी भी प्राथमिकता में ना पड़नेवाला समाचार हो अथवा गांव–गांव के प्रतिभा, यूट्यूब चैनल के कारण ही सामने आ रहे हैं, जो परम्परागत संचार माध्यम के लिए चुनौती भी बन रही है । इसीलिए तो परम्परागत संचार माध्यम भी बाध्य होकर नई प्रविधि को प्रयोग कर रहे हैं । आज कम ही ऐसे परम्परागत संचार माध्यम है, जिनके पास युट्वुब चैनल और टिकटक एकाउन्ट ना हो । नयी–नयी प्रतिभा को दुनियां के सामने लाना सकारात्मक पक्ष है । इसीलिए एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना– ‘पल शाह प्रकरण’ को लेकर बाल प्रतिभा को हतोत्साहित होना ना पड़े, खराब व्यक्ति और चरित्र से उन लोगों को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है, इसकी ओर ध्यान देना और बहस होना जरुरी है । सामाज में रहनेवाला कुछ खराब पात्र और चरित्र के कारण बाल–प्रतिभा को असुरक्षित महसूस होना ना पड़े, हमारा ध्यान इसकी ओर होना चाहिए, न कि उनकी प्रतिभा को संकुचित और कुंठित करने के लिए ।
– हिमालिनी मासिक (मार्च २०२२ अंक) से


