आखिर कौन है शारी बलूच जिसने आत्मघाती बम बनकर अंजाम दिया कराची में हमले को
कराची (आईएएनएस)।
कराची यूनिवर्सिटी के आत्मघाती बम धमाके को जिस महिला ने अंजाम दिया वो दो बच्चों की मां थी। सोमवार को हुए इस आत्मघाती हमले में चार लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें तीन चीन के थे। इस हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी ने हमले के कुछ देर बाद ली थी। इस हमले को लेकर सामने आई एक वीडियो फूटेज में साफ देखा जा सकता है कि एक बुर्का पहने महिला के सामने से जैसे ही वैन गुजरी वहां पर धमाका हो गया। कुछ देर में ही वहां का मंजर पूरी तरह से बदल गया।
इस हमले के बाद ये सवाल भी उठ रहा है कि बीएलए इस तरह के हमलों को महिलाओं के जरिए अंजाम देने से भी नहीं चूक रही है। मंगलवार को एक ये सवाल भी गूंजता रहा कि आखिर इस आत्मघाती महिला हमलावर के निशाने पर कौन था। अधिकतर लोगों का मानना है कि इस महिला आत्मघाती हमलावर को पहले आतंकी संगठन ने अपने बहकावे में फांसा और उसके बाद इस धमाके को करने के लिए उसको तैयार किया।
आईएएनएस के मुताबिक जिस आत्मघाती महिला हमलावर ने इस हमले को अंजाम दिया वो अनपढ़ नहीं थी, बल्कि केच जिले के एक सेकेंडरी स्कूल में टीचर थी। इसका नाम शारी बलूच बताया जा रहा है। खास बात ये है कि इस महिला और इसके परिवार का ताल्लुक किसी भी तरह के आतंकी संगठन या फिर कट्टरपंथी समुदाय से भी नहीं था। वर्ष 2014 में बलूच ने बीएड और वर्ष 2018 में उसने एमएड की डिग्री हासिल की थी। यूनिवर्सिटी आफ बलूचिस्तान से उसने जूलाजी में मास्टर्स की डिग्री भी हासिल की थी। इसके अलावा अलामा इकबाल यूनिवर्सिटी से उसने एमफिल किया था।
पिता डायरेक्टर और भाई डाक्टर
शारी बलूच के दो छोटे बच्चे भी हैं। उसका पति डेंटिस्ट है, जबकि उसके सरकारी एजेंसी में डायरेक्टर के पद पर काम कर चुके हैं। रिटायर होने से पहले वो सरकारी ग्रेड 21 में थे। शारी के पिता तीन वर्षों तक डिस्ट्रिक काउंसिल के सदस्य भी रहे थे। शारी बलूच न सिर्फ एक संपन्न परिवार से थी बल्कि एक पढ़े-लिखे परिवार से ताल्लुक रखती थी। शारी बलूच को लेकर ये बात भी सामने आई है कि बलूच लिब्रेशन मूवमेंट के खिलाफ अपने विचार रखने के लिए जानी जाती थी। फिर एकाएक ऐसा क्या हुआ कि उसने इस तरह का कदम उठाया औश्र अपनी जिंदगी को खत्म कर दिया। इस सवाल का जवाब भी यहां पर मौजूद है। कहा जा रहा है कि शारी के तीन भाई और चार बहने थीं।
संपन्न परिवार था शारी का
उसका एक भाई तहसीलदार, एक अन्य भाई डिस्ट्रिक कोर्ट में काम करता है। उसके अंकल रिटायर्ड प्रोफेसर हैं। जबकि एक अन्य लेखक और एक्टिविस्ट हैं। उसके दो चचेरे भाई डाक्टर हैं। शारी के पिता यूनिवर्सिटी आफ टर्बट में रजिस्ट्रार थे और डिस्ट्रिक ओंबडस्मेंट टीम के साथ तीन साल तक उन्होंने काम किया। इतना ही नहीं वो वाटर एंड सेनिटेशन एजेंसी के डायरेक्टर भी थे।
शारी अपनी पढ़ाई के दौरान बलूच स्टूडेंट्य आर्गेनाइजेशन से जुड़ी रही थी। इसके बावजूद वहां पर उसकी मौजूदगी काफी सीमित रहीथी। वो कभी भी इस आर्गेनाइजेशन के तहत होने वाले विरोध प्रदर्शनों या दूसरी राज्य विरोधी चीजों में शामिल नहीं रही थी। न ही उसको कभी किसी चीज के लिए दोषी ही ठहराया गया था। कहा जा रहा है कि उसके एक भाई को वर्ष 2018 में केच में मिलिट्री आपरेशन के दौरान गलत तरीके से मार दिया गया था। दो वर्ष पहले ही शारी ने बीएलए की माजिद ब्रिगेड को ज्वाइन किया था। ये ब्रिगेड खुद को कुर्बान करने के लिए स्वयं से सामने आने वालों को इसके लिए तैयार करती है।
आत्मघाती हमलावर बनने पर आमादा थी
इसमें शामिल होने वाले को दोबारा सोचने का भी मौका दिया जाता है। इन दो वर्षों के दौरान शारी ने कई जगहों पर अपनी सेवा दी। करीब छह माह से वो खुद को कुर्बान करने पर आमादा बताई जाती है। वो इस मिशन में पूरी तरह से घुस चुकी थी। बीएलए ने अपने एक बयान में कहा है कि वो आत्मघाती धमाके के लिए खुद को समर्पित कर चुकी थी। वो छह माह पहले ही कराची वापस लौटी थी। इसकी जानकारी भी किसी अन्य को नहीं थी।
केच के डिस्ट्रिक एजूकेशन आफिसर ने शारी को स्कूल में बिना जानकारी के गैर मौजूद रहने को लेकर कारण बताओ नोटिस भी भेजा, लेकिन उसने इसका कोई जवाब दिया। अब तक भी ये एक बड़ा सवाल बना हुआ है कि आखिर शारी के इस धमाके को करने की वजह क्या बनी। हालांकि, कई लोग इस बात को मानते हैं कि शारी ने बीएलए की माजिद ब्रिगेड इसलिए ही ज्वाइन की थी क्यांकि वो सुसाइड बंबर ही बनना चाहती थी। वो बीएलए की पहली आत्मघाती महिला थी।

