लूनकरणदास–गङ्गादेवी चौधरी साहित्यकला मन्दिर द्वारा तीन स्रष्टा सम्मानित
काठमांडू, १० मई । श्री लूनकरणदास–गङ्गादेवी चौधरी साहित्यकला मन्दिर ने ३ स्रष्टाओं को सम्मान किया है । बसन्त चौधरी फाउण्डेशन द्वारा आज मंगलबार काठमांडू में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में प्रा.डा. त्रिरत्न मानन्धर, तेजेश्वरबाबु ग्वङ्गः न्हुछेबहादुर डङ्गोल संस्था की ओर से सम्मानित हुए हैं । संस्था के अध्यक्ष बसन्त चौधरी और प्रमुख अतिथि प्रा.डा. उषा ठाकुर ने स्रष्टाओं को सम्मान किया ।
प्रा.डा. मानन्धर को इतिहास शिरोमणि बाबुराम आचार्य शोध सम्मान, ग्वङ्गः को सरस्वती सम्मान और डङ्गोल को नारायण गोपाल संगीत सम्मान प्राप्त हुआ है । उल्लेखित तीनों सम्मान श्री लूनकरणदास–गङ्गादेवी चौधरी साहित्यकला मन्दिर द्वारा स्थापित है । कार्यक्रम संस्था की स्थापना दिवस अर्थात् २८वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर आयोजित रहा । सम्मानित होनेवाले स्राष्ट अपने–अपने क्षेत्र के विशिष्ट व्यक्तित्व हैं ।
कार्यक्रम में स्वागत मन्तव्य व्यक्त करते हुए संस्था के अध्यक्ष चौधरी ने कहा कि साहित्य हो या संगीत, कला हो या रंगमंच, यह सब सिर्जनशील विधा है, जो आम लोगों को अंधेरे से रोशनी की ओर ले जाता है । उनका यह भी मानना है कि साहित्य से जो आनन्द प्राप्त होता है, वह अन्य किसी भी बस्तु तथा विषय से प्राप्त नहीं होता । साहित्यकार तथा कवि चौधरी ने यह भी कहा कि हर सिर्जना नयां आविष्कार है और नयां–नयां अविष्कार हर युग में होता ही रहता है । उन्होंने कहा कि बिगत की तरह आज कोई भी सर्जक को दुनियां के सामने आने के लिए दिक्कत नहीं है । अध्यक्ष चौधरी ने आगे कहा– ‘सूचना और प्रविधि के क्षेत्र में जो विकास हुआ है, उसको प्रयोग कर आज हर सर्जक दुनियां के सामने आ सकते हैं ।’ उनका मानना है कि इस तरह आनेवाले सर्जकों की सिर्जना अगर उत्कृष्ट रहता है तो उनको शक्तिशाली मंच प्राप्त होने की संभावना भी रहती है ।
कार्यक्रमको सम्बोधन करते हुए बसन्त चौधरी फाउण्डेशन की उपाध्यक्ष मेघा चौधरी ने कहा कि श्री लूनकरणदास–गङ्गादेवी चौधरी साहित्यकला मन्दिर द्वारा स्थापित विभिन्न सम्मान से राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण योगदान देनेवाले स्राष्टाओं को सम्मानित करने का जो अवसर प्राप्त हुआ है, वह असीम खुशी की बात है ।
इसीतरह सम्मानित स्रष्टाओं की ओर से अपने अन्तव्य रखते हुए प्रा.डा. त्रिरत्न मानन्धर ने कहा कि उम्र के हिसाब से जेष्ठ नागरिको कों इस तरह सम्मानित कर संस्था ने उनकी जिम्मेवारी और कर्तव्य को फिर से स्मरण करवायां है । उन्होंने संस्था के अध्यक्ष चौधरी को बहुप्रतिभाशाली व्यक्तित्व के रुप में स्मरण किया और कहा– ‘चौधरी जी राष्ट्र के लिए ही एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व हैं ।’
कार्यक्रम में डा. अस्मिता अर्याल द्वारा लिखित पुस्तक ‘मैले बुझेको दुनियाँ’ का भी विमोचन किया गया । यह पुस्तक एक निबंध संग्रह है, जहां विभिन्न सामाजिक विषयों में लिखी गई २१ निबंध संग्रहित है । पुस्तक के संबंध में टिप्पणी करते हुए फाउण्डेशन की उपाध्यक्ष एवं प्रकाशक मेघा चौधरी ने कहा– ‘डा. अर्याल की साहित्य सिर्जना शक्तिशाली है, मैं कामना करती हूं कि उनकी लेखन यात्रा निरन्तर जारी रहे और आगामी दिनों में ‘मेरी चाहत की दुनियां’ शीर्षक में फिर दूसरी किताब प्रकाशित हो सके ।’


