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“आओ बुद्धु बने” : बिम्मी कालिन्दी शर्मा,

 

बिम्मी कालिन्दी शर्मा, वीरगंज, (व्यंग्य) । पता नही सब बुद्ध बनना क्यों चाहते हैं ? जबकि बुद्धु बने रहने में ही भलाई है । बुद्ध बनने में बहुत पचडे हैं । ईसी लिए हम सब मील कर बुद्धु बनें और सुखी रहें । वैसे नेता और देश की सरकार हमें बुद्धु ही समझती है । यह तो सभी ने आसन्न चुनाव में देख ही लिया । बुद्धु बन कर रहो अपनी झोली भरो । मासभात खाओ अपने नेता के गुण गाओ और दारु में सराबोर हो कर सो जाओ और नींद में भी अपने नेता के ही जयकारा लगाते रहो । बुद्धु जनता का नेता पीठ थपथपाते हैं कि चलो यह देश का नागरिक नहीं बस जन्तु भर है । ईसी लिए ईस के पीठ में महंगाई के कोडे मारते रहो । बेचारा बुद्धु है उफ भी नहीं करेगा ।
बुद्धु बनोगे तो संसार की दु:ख और चिंता आपको सताएगी । यहां ए नहीं हुआ वंहा वह नहीं हुआ । जंहा कुछ गलत देखा नहीं ज्ञान का कीडा कुलबुलाने लगता है और विद्रोह.करने की ईच्छा घेर लेती है । अब बुद्धु है तो काहे का ज्ञान और कौन सा कीडा ? सब गए तेल लेने और आप गए अपने प्रिय नेता के पैर दबाने । जो बुद्ध बन कर ज्ञान प्राप्त हो जाएगा चारों और सत्य ही सत्य दिखाई देगा और असत्य.या झूट दिखाई दिया लगे फरियाने और देने लगे ज्ञान बुद्ध बन कर । ऐसे ज्ञान की ऐसी की तैसी । क्या आपका ज्ञान आपको खाने देगा , पीने को पानी देगा ? नींद आने पर बिस्तर और बिमार पड्ने पर दवा देगा ? सिद्धार्थ गौतम भी जब ज्ञान का ‘वोध’ हो कर बुद्ध. बने थे तब भी घर-चर जा कर भीख ही मांगते थे । जब.दरबार में राजकुमार के रुपमें रहते थे । क्या ठाठ थे उनके । कोई चिंता फिक्र नहीं बस मोज करो । बस यह ज्ञान का रोग लगा कर खुद तो वितरागी हो गए और दुनिया को ज्ञान का रोगी बना दिया । यदि दुनिया को बुद्ध ज्ञान का रास्ता नहीं दिखाते तो सभी कितने सुखी रहते ? पर शांतिदूत बुद्ध. ने शांति की कामना करते करते सारी दुनिया में ज्ञान की अशांति मचा दी । अब भुगतो !
बुद्धु बनने के बहुत खास फायदे हैं । सत्य आपको च्यूंटी नहीं काटेगा, दुसरों के दु:ख और तकलीफ से आप बौराएगें नही औरों की खुशी और सफलता से आप अभिभूत होगें । आप तो चिलम लगाए नशेडी की तरह बुद्धु बन कर अपनी ही दुनिया में मस्त रहेगें । बस खाओ, पिओ और मोज करो । बांकी दुनिया जाए भांड मे । पर यह दुनिया भी अजीब है भांड में नहीं जाती लोटा भर जल लेने के लिए गँगा जी चली जाती है । फिर वह जल ज्ञान का भी हो सकता है । जिससे कूल्ला कर के चर्म चक्षु खूल जाते हैं जैस किसी नेत्रहीन के आगे बिजली का खंबा आ जाए वैसा ही । जब ज्ञान प्राप्त हो कर बुद्ध बन जाते है तब सारी दुनिया बुद्धु नजर आते है और लोग किडे मकौडे जैसे लगने लगते हैं । ज्ञान आया तो अहंकार भी उसके छोटेलाल भाई की तरह साथ मे आ गया । मैं ज्ञानी हो गया हूं यह भाव मन में आते ही आंखों के आगे भ्रम छा जाता है और ज्ञानी वह कर्म वा कुकर्म करने लग जाता है जिससे बुद्ध ही लज्जित हो जाएं । ज्ञानी खुद को खुदा मानने लगता है और चाहता है कि सब उसकी पूजा करें ।
ज्ञान अभिमान का भी जड है । बिरला ही कोई ज्ञानी होगा जिसे कोई अभिमान न हो । ईतने वर्षों की तपस्या से ईतने परिश्रम से ज्ञान प्राप्त की है तो उसका अभिमान भी न करें । अभिमान तो सर्टिफिकेट है ज्ञान और अज्ञान का जो हमेशा साथ में रहेगा ही । बुद्ध बनने से दुनिया की दु:ख तकलीफ और गरिबी परेशान करती है । उसके निराकरण के लिए मन चिंतित हो जाता है । पर जब आप बुद्धु बनेंगे दुनिया से जिंदा मे ही मोक्ष पा लेगें । बुद्धु बन कर किसी नशेड़ी की तरह अपने में ही मस्त रहेगें । काहे को दुनिया की चिंता ? दुनिया तो हमारे ईस धरति पर आने से पहले भी थी और हमारे जाने के बाद भी रहेगी । जब दुनिया शास्वत है तो उसके दु:ख , सुख और परेशानी भी सास्वत ही रहेगें । हम बुद्ध बन कर क्या उखाड लेगें ईस दुनिया का । बुद्ध बन कर चिंता से और दुब्ले हो जाएगें । बुद्ध बनने पर महंगाई की चिंता खाएगी, परिवार कैसे समहाले, बच्चो की पढाई, कैरियर और शादी के सौ टंटे अलग से दिमाग खराब करेगी । ईसी लिए बुद्धु बने रहने में ही भलाई है ।
बुद्ध बनोगे तो सौ नखरे होगें । समाज की भृकुटि तनी रहेगी अलग से । घर मे रह नहीं सकते वन गमन करना होगा । पर अब वन है ही कंहा ? न वन है न धन है न मन है बस एक बेचारा ज्ञान है जिससे कंहा कंहा पर सरफोडे ? बुद्ध बनोगे तो हर जगह बुराई दिखाई देगी और उस बुराई को जड से मिटाने के लिए मन मचलने लगेगा । ईससे न मन में शांति होगी न वन में । ईसी लिए बुद्ध बनने का आईडिया ही बेकार है । बुद्ध बनेगें तो किसी वृद्ध को देख कर अपना भविष्य याद आएगा । किसी रोगी को देखेगें तो कल अपना शरीर भी ऐसे ही जर्जर होगा यह ख्याल सताने लगेगा । और जब किसी मृतक या लाश को देख लेगें तो जीवन की क्षणभंगुरता से मन क्षोभ से भर जाएगा । यदि बुद्धु बने रहे तो यह हर दिन का ढकोसला है सब चलता है और चलता रहेगा ‘टेक ईट ईजी’ का भाव मन में आएगा और आप दुनिया के झमेलो से दूर रह कर खा पी कर अपने में मस्त रहेगें और प्यारे आका भजन किर्तन करते रहेगें । अपने उन आकाओं के कारण ही तो आप आज बुद्धु है और बुद्धु रहेगें । ईसी लिए बुद्धु बने रहिए ईसी में आपका और समाज का भलाई है । बुद्ध बनने के बात तो हर चीज से निर्लिप्त हो जाएगें तो समाज और दुनिया का विकास कैसे होगा ? ईसी लिए ईस दुनिया को ऐसे ही टिकाए रखना है तो आप बुद्धु बने रहिए । यही सब के सेहत के लिए अच्छा है । बुद्धुपन को एक टानिक के रुप में ग्रहण किजिए और समाज को सोता हुआ छोड दिजिए । बुद्धु मा सोया हुआ समाज में ही राजनीति अपना रंग जमाती है । तो बुद्ध नहीं बुद्धु बनिए वरना आपकी खैर नहीं । 😊

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